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Moradabad News: पुलिस की नाकामी... तीसरी जांच में भी नहीं खुला 10 साल पहले हुई चार हत्याओं का राज
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मुरादाबाद।
शहर के बहुचर्चित डॉ. शैली हत्याकांड की गुत्थी तीसरी बार हुई जांच में भी पुलिस नहीं सुलझा सकी। पुलिस की कमजोर तफ्तीश कहें या अपराधियों की मजबूत प्लानिंग, 10 साल पहले हुई चार लोगों की हत्या का अब तक खुलासा नहीं हो सका है। इस हत्याकांड को रंजिश में अंजाम दिया गया या फिर लूट की खातिर, ऐसे तमाम सवाल आज भी बरकरार हैं।
अब तीसरी बार पुलिस ने केस में फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी शुरू कर दी। सिविल लाइंस के जिगर कॉलोनी स्थित विद्या सदन में जिला अस्पताल की पूर्व सीएमएम डॉ. शैली मेहरोत्रा, उनके पति डॉ. ओम मेहरोत्रा, ननद डॉ. रश्मि मेहरा और पांच साल की पोती दिव्यांशी उर्फ गिन्नी रहती थीं। 16 मई 2014 की दोपहर चारों के शव आवास में पड़े मिले थे। पोस्टमार्टम से पता चला था पोती गिन्नी की गला दबाकर हत्या की गई थी जबकि बाकी तीनों का गला रेतकर उन्हें मौत के घाट उतारा गया था।
इस जघन्य हत्याकांड के समय डॉ. शैली के बेटे उज्ज्वल और बहू बंगलूरू में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। घटना की जानकारी मिलने पर बेटे-बहू और रुद्रपुर (उत्तराखंड) में रहने वाली बेटी डॉ. गुंजन भी मुरादाबाद आ गई थीं। हत्यारे घर से सोने-चांदी के जेवर, नकदी और उनकी कार लूटकर ले गए थे। अगले दिन कार कांठ रोड पर हरथला चौकी के सामने खड़ी मिली थी।
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पुलिस ने शुरुआत में तमाम संदिग्धों से पूछताछ की, लेकिन समय बीतने के साथ केस को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। पुलिस ने एक साल की तफ्तीश के बाद केस बंद कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। इसके बाद बेटे और बेटी ने कोर्ट में एफआर को चुनौती दी और दोबारा जांच शुरू की गई।
कुछ साल बीतने के बाद फिर से पुलिस ने एफआर लगा दी थी। इसके बाद परिवार हाईकोर्ट पहुंच गया और फिर से केस की जांच हुई, लेकिन फिर नतीजा नहीं मिला और पुलिस ने एफआर लगा दी। दस साल बाद तीसरी बार हुई जांच में भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। अब फिर से पुलिस ने एफआर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
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शहर के बहुचर्चित डॉ. शैली हत्याकांड की गुत्थी तीसरी बार हुई जांच में भी पुलिस नहीं सुलझा सकी। पुलिस की कमजोर तफ्तीश कहें या अपराधियों की मजबूत प्लानिंग, 10 साल पहले हुई चार लोगों की हत्या का अब तक खुलासा नहीं हो सका है। इस हत्याकांड को रंजिश में अंजाम दिया गया या फिर लूट की खातिर, ऐसे तमाम सवाल आज भी बरकरार हैं।
अब तीसरी बार पुलिस ने केस में फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी शुरू कर दी। सिविल लाइंस के जिगर कॉलोनी स्थित विद्या सदन में जिला अस्पताल की पूर्व सीएमएम डॉ. शैली मेहरोत्रा, उनके पति डॉ. ओम मेहरोत्रा, ननद डॉ. रश्मि मेहरा और पांच साल की पोती दिव्यांशी उर्फ गिन्नी रहती थीं। 16 मई 2014 की दोपहर चारों के शव आवास में पड़े मिले थे। पोस्टमार्टम से पता चला था पोती गिन्नी की गला दबाकर हत्या की गई थी जबकि बाकी तीनों का गला रेतकर उन्हें मौत के घाट उतारा गया था।
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इस जघन्य हत्याकांड के समय डॉ. शैली के बेटे उज्ज्वल और बहू बंगलूरू में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। घटना की जानकारी मिलने पर बेटे-बहू और रुद्रपुर (उत्तराखंड) में रहने वाली बेटी डॉ. गुंजन भी मुरादाबाद आ गई थीं। हत्यारे घर से सोने-चांदी के जेवर, नकदी और उनकी कार लूटकर ले गए थे। अगले दिन कार कांठ रोड पर हरथला चौकी के सामने खड़ी मिली थी।
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पुलिस ने शुरुआत में तमाम संदिग्धों से पूछताछ की, लेकिन समय बीतने के साथ केस को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। पुलिस ने एक साल की तफ्तीश के बाद केस बंद कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। इसके बाद बेटे और बेटी ने कोर्ट में एफआर को चुनौती दी और दोबारा जांच शुरू की गई।
कुछ साल बीतने के बाद फिर से पुलिस ने एफआर लगा दी थी। इसके बाद परिवार हाईकोर्ट पहुंच गया और फिर से केस की जांच हुई, लेकिन फिर नतीजा नहीं मिला और पुलिस ने एफआर लगा दी। दस साल बाद तीसरी बार हुई जांच में भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। अब फिर से पुलिस ने एफआर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।