Cricketer Piyush Chawla: सचिन को बोल्ड मार बटोरी थीं सुर्खियां, मां पूनम चावला बोलीं- आज तक नहीं भूली वो लम्हा
क्रिकेटर पीयूष चावला ने महज 16 साल की उम्र में चैलेंजर ट्रॉफी 2005-06 में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को बोल्ड कर क्रिकेट जगत में सनसनी मचा दी थी। इस मैच में उन्होंने सचिन के अलावा एमएस धोनी और युवराज सिंह के भी विकेट चटकाए। यह उनके लिस्ट-ए करियर का दूसरा मैच था, जो उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसी प्रदर्शन के दम पर वह पहले अंडर-19 और फिर भारतीय सीनियर टीम में पहुंचे।
विस्तार
पीयूष चावला ने 16 साल की उम्र में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को बोल्ड कर सुर्खियां बटोरी थी। यह लम्हा था चैलेंजर ट्रॉफी 2005-06 का, जब पीयूष ने अपनी गुगली से क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। इस मैच के प्रदर्शन ने पीयूष को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई और उनका सफर भारत की सीनियर टीम तक पहुंचा।
यह मैच पीयूष के लिए इसलिए भी ऐतिहासिक था, क्योंकि तब उनकी उम्र सिर्फ 16 साल की थी और यह उनका लिस्ट-ए का दूसरा मैच था। इस टूर्नामेंट में उन्होंने सचिन तेंदुलकर के अलावा महेंद्र सिंह धोनी और युवराज सिंह का भी विकेट हासिल किया था। यह मैच उनके कॅरिअर का टर्निंग पॉइंट बना।
इसके बाद वह जल्द ही भारतीय अंडर-19 टीम और फिर सीनियर भारतीय टीम में शामिल हुए। पीयूष ने इस टूर्नामेंट में अपनी लेग-स्पिन और गुगली की कलात्मक गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया था। यह उनके कॅरिअर का शुरुआती दौर था। इस प्रदर्शन ने उन्हें 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करने का मौका दिलाया। पीयूष चावला इस टूर्नामेंट को अपनी जिंदगी का सबसे यादगार टूर्नामेंट मानते हैं।
जिस दिन पीयूष चावला पहली बार टीम इंडिया की जर्सी पहनकर मैदान में उतरे थे, तो एक मां का दिल गर्व और भावनाओं से भरा हुआ था। आज, जब पीयूष ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया है, उनकी मां पूनम चावला की आंखों में फिर वही नमी लौट आई है।
अमर उजाला से बातचीत में पीयूष की मां बेहद भावुक हो गईं, उन्होंने कहा कि जब पीयूष का टीम इंडिया में चयन हुआ था और वह पहली बार मैदान पर उतरा था, वो लम्हा आज तक नहीं भूल पाई। उस वक्त उन्हें क्रिकेट की एबीसीडी तक नहीं आती थी। लेकिन बेटे के उस चयन ने सिर्फ उसके कॅरिअर की दिशा नहीं बदली, बल्कि एक मां की दुनिया भी बदल दी।
उन्होंने आगे कहा, धीरे-धीरे वह खुद क्रिकेट देखने लगी। रन क्या होता है, विकेट कब गिरता है, कौन-कौन खिलाड़ी है। सब सीख लिया। जब भी वो मैच खेलता था, वह टीवी के सामने बैठकर हर बॉल पर उसका साथ देती थी। कई बार बेटे को हौसला देने के लिए स्टेडियम भी जा चुकी हैं।
पूनम चावला आगे कहा कि पीयूष ने अपने जीवन के बीस साल क्रिकेट को दिए। अब जब उसने खेल को अलविदा कहा है, तो दिल में अजीब सी हलचल है। वह अपने बेटे को आगे के जीवन के लिए ढेरों शुभकामनाएं देती हैं।
पिता का कोरोना में हो गया था निधन
शहर के दीनदयाल नगर में रहने वाले पीयूष चावला ने कोरोना काल में अपने पिता प्रमोद कुमार चावला को भी खो दिया था। पीयूष अपने कॅरिअर में पिता के योगदान को बेहद अहम मानते हैं। इस समय पीयूष के परिवार में उनकी पत्नी अनुभूति चावला, बेटा अद्विक चावला, मां पूनम और भाई प्रतीक चावला हैं। पीयूष ने बचपन में अपनी पढ़ाई शहर के विल्सोनिया हाईस्कूल से पूरी की थी।
आईपीएल : सबसे सफल रही पीयूष की फिरकी
आईपीएल क्रिकेट का वह फार्मेट जहां बल्लेबाज हावी रहते हैं। यहां भी पीयूष चावला की फिरकी की धमक सबसे ज्यादा रही। एक समय में वह आईपीएल में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। आईपीएल में लगातार न खेलने के बावजूद विकेटों की दौड़ में चावला अब भी अश्विन, जडेजा, कुलदीप से आगे हैं। आईपीएल के सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों में तीसरे नंबर पर हैं।
आईपीएल के अब तक के इतिहास में यजुवेंद्र चहल ने सबसे ज्यादा 220 विकेट लिए। उनके बाद भुवनेश्वर कुमार 196 विकेट लेकर दूसरे स्थान पर हैं। तीसरे स्थान पर 192 विकेटों के साथ पीयूष का नाम आता है। 2025 में आईपीएल के 18वें सीजन के बाद सुनील नारायण उनकी बराबरी तक पहुंचे हैं।
अब संयुक्त रूप से सुनील व पीयूष तीसरे स्थान पर हैं। कॅरिअर के अंतिम पड़ाव पर भी पीयूष का फिरकी की धार कम नहीं हुई। नवंबर 2024 में उन्होंने यूपी की टीम से सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में हिस्सा लिया। इस टूर्नामेंट में मुरादाबाद के आर्यन जुयाल, शिवम शर्मा, मोहसिन खान, शिवा सिंह भी टीम का हिस्सा रहे। पीयूष ने नवंबर 2024 में वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई के खिलाफ 12 रन देकर चार विकेट झटके थे।
इसके बाद वह आईपीएल 2025 की नीलामी में भी शामिल हुई लेकिन इस बार किसी टीम का समर्थन नहीं मिल सका। प्रथम श्रेणी क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय पिच तक वह 22 टीमों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, गुजरात, इंडिया-ए, इंडिया-बी, इंडिया ग्रीन, केकेआर, पंजाब किंग्स, चेन्नई सुपर किंग्स व मुंबई इंडियंस का नाम शामिल है।
धोनी की पसंद रहे पीयूष, 2011 में रोहित को नहीं मिली थी जगह
पूर्व कप्तान रोहित शर्मा 2011 वर्ल्ड कप की योजना में थे, लेकिन तत्कालीन कप्तान एमएस धोनी लेग स्पिनर पीयूष चावला को स्क्वॉड में चाहते थे। इसका खुलासा भारत के पूर्व चयनकर्ता राजा वेंकट ने कुछ साल पहले किया था। वेंकट ने रेवस्पोर्ट्ज को दिए इंटरव्यू में कहा था, ‘जब हम टीम चुनने बैठे, तो रोहित का नाम भी हमारी योजना में शामिल था। नंबर 1-14 तक, पैनल ने हर नाम को स्वीकार कर लिया।
नंबर 15 में, हमने रोहित शर्मा का नाम सुझाया। गैरी कर्स्टन को भी लगा कि यह एक सही चयन है। लेकिन कप्तान धोनी पीयूष चावला को चाहते थे। इसलिए, तुरंत, कर्स्टन ने पलटी मार दी। उन्होंने कहा ‘मुझे लगता है कि यह एक बेहतर विकल्प है।’ इसलिए, इस तरह रोहित शर्मा को बाहर कर दिया गया।’
13 साल पहले खेला अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच
पीयूष चावला ने 2006 में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था। उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 2012 में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 मैच खेला था। वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस मैच में पीयूष ने दो ओवर में 17 रन खर्च किए थे। उन्हें कोई विकेट नहीं मिल पाया था। भारत ने यह मैच पांच विकेट से जीता था। अपने छह साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कॅरिअर में उन्होंने भारत के लिए तीन टेस्ट, 25 वनडे और सात टी-20 मैच खेले।