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Moradabad News: बर्तन बाजार...जाम में फंसे लोग पहुंच ही नहीं पाते दुकान तक

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 11 Apr 2026 01:48 AM IST
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People stuck in the bartenders market are unable to reach the shops.
मुरादाबाद। जाम, और पार्किंग की कमी की वजह से बर्तन बाजार की चमक फीकी होती जा रही है। जाम लगने से दुकानों पर ग्राहक नहीं आना चाहते हैं। इसकी वजह से बिक्री दिनोंदिन घटती जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि पुलिस-प्रशासन की ओर से पार्किंग और जाम से निजात दिलाने का प्रयास कभी नहीं किया गया।
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बर्तन बाजार में 250 अधिक दुकानें हैं। इन पर बर्तनों के अलावा पीतल की मूर्तियां, पूजा के सामान की बिक्री होती है। बाजार में दिनभर ई-रिक्शा की भीड़ लगी रहती है। इसकी वजह से जाम लगता है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि बर्तन बाजार के दोनों ओर मंडी चौक और अमरोहा गेट दो प्रमुख चौराहे हैं। चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस तैनात नहीं रहती है। इसकी वजह से ई-रिक्शा चालकों की मनमानी बढ़ गई है।
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चालक आगे निकलने के चक्कर में एक दूसरे के सामने ई-रिक्शा खड़ा कर देते हैं और लंबा जाम लग जाता है। आस-पास के दुकानदार जाम खुलवाते हैं। दुकानदारों का कहना है कि शाम के समय जब ग्राहकों की भीड़ बढ़ती है तो सबसे ज्यादा जाम लगता है। इसका बिक्री पर सीधा असर पड़ रहा है। दुकानदार बताते हैं कि जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए पुलिस-प्रशासन से कई बार शिकायत की गई है लेकिन सुधार नहीं हुआ है।
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दुकानदार बोले
-शहर के अंदर आने वाले सभी ई-रिक्शा बर्तन बाजार में आते हैं। ई-रिक्शा ट्रेन के डिब्बों की तरह खड़े हो जाते हैं। इसकी वजह से जाम लगता है। जाम देखकर ग्राहक दुकानों पर नहीं आना चाहते हैं। -पंकज अग्रवाल, दुकानदार
-बर्तन बाजार की सड़क पतली है। ई-रिक्शा के साथ भारी वाहनों के आने-जाने से काफी दिक्कत होती है। जाम लगने पर भारी वाहन को निकालने में 20 से 30 मिनट लग जाते हैं। नो एंट्री जोन होने के बावजूद भारी वाहनों को अंदर आने दिया जाता है। -उमेश चंद्र, दुकानदार

-बाजार में ई-रिक्शाओं का संचालन सीमित करना चाहिए। आधे से ज्यादा ई-रिक्शा पर एक या दो सवारी ही रहती हैं। बाजार में अधिक ई-रिक्शा होने की वजह से जाम लगता है। -राज कमल, दुकानदार
-ई-रिक्शा के लिए कोई नियम नहीं बनाया गया है। इन्हें जहां पर सवारी मिल जाती हैं, वहीं से ई-रिक्शा मोड़ लेते हैं। बर्तन बाजार की सड़क पर सबसे ज्यादा जाम लगता है। आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। -सब्बू अहमद, दुकानदार
-दोपहर को बच्चे स्कूल से छूटते हैं। दो बजे से ज्यादा जाम लगना शुरू होता है। रात नौ बजे तक जाम लगता है। जाम की स्थित देखकर ग्राहक रास्ते से ही वापस लौट जाते हैं। प्रतिदिन नुकसान होता है। - मोहम्मद सिकंदर, दुकानदार
-बर्तन बाजार में कभी-कभी दो घंटे तक जाम लगता है। एंबुलेंस के जाम फंसने के बाद भी कोई पुलिसकर्मी नहीं आते हैं। जाम के समय पैदल आने-जाने में भी काफी दिक्कत होती है। -मोहम्मद उबैर, दुकानदार
-ई-रिक्शाओं को नियमानुसार संचालन के लिए कई बार पुलिस विभाग से मांग की गई है लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ई-रिक्शा की वजह से ही जाम लगता है। इसकी वजह से दुकानदार से लेकर ग्राहक तक परेशान होते हैं। -अमरीष अग्रवाल, दुकानदार

-ई-रिक्शा संचालकों के ऊपर कोई रोकटोक नहीं हैं। गलियों में ई-रिक्शा चलते हैं। इसकी वजह से दो पहिया नहीं निकल पाते हैं। ग्राहक जाम में फंस जाते हैं। जाम की वजह से ग्राहक नहीं आना चाहते हैंं। ई-रिक्शा को जोनवार संचालन करने के लिए कई बार पुलिस-प्रशासन से कहा गया है लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।
-संजय सहगल, संगठन मंत्री, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल
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