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Moradabad News: मच्छरों के वार से लोग बीमार, अब तक डेंगू के 31 मरीज
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मुरादाबाद।
मच्छरों का वार लगातार लोगों को बीमार बना रहा है। जिले में 15 दिन में डेंगू के 31 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से चार बच्चे भी हैं। चिंता का विषय है कि लोग वायरल व डेंगू में अंतर नहीं समझ पा रहे हैं। इसके कारण देरी से इलाज ले रहे हैं। इससे प्लेटलेट्स की संख्या गिर रही है और रिकवर होने में समय लग रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि बुखार है तो फौरन जांच कराएं। बुखार के साथ यदि उल्टी, दस्त और नाक से खून आ रहा है तो यह डेंगू के लक्षण हैं। एहतियात की बात करें तो मलेरिया विभाग फॉगिंग कर रहा है लेकिन यह सिर्फ कागजों तक सीमित है। हाल ही में बीजना गांव में डेंगू के 20 मरीज मिले थे। इसे केंद्र मानकर आसपास के गांवों में जरूर फॉगिंग कराई गई लेकिन शहर के कई मोहल्लों में अब तक एक बार भी टीम नहीं पहुंची है। हर सीजन में बरवालान, मुगलपुरा, हरथला आदि क्षेत्रों में डेंगू के मरीज मिलते हैं। इस बार इन मोहल्लों में फॉगिंग नहीं हुई है। जिला अस्पताल में भी हर दिन बुखार के 150 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से औसतन 30 की जांच की जा रही है। शुरुआत में डॉक्टर सीबीसी ही लिख रहे हैं। बुखार ठीक न होने पर एलाइजा टेस्ट कराया जा रहा है।
मच्छरों से बचाव के लिए बिक गए दो करोड़ के उत्पाद
जिले में मेडिकल स्टोर संचालकों के आंकड़े के मुताबिक एक माह में दो करोड़ रुपये की कॉयल, रिफिल, लोशन व अन्य उत्पाद बिक चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि एहतियात बरतना अच्छी बात है लेकिन घर में घर में छोटे बच्चे हैं तो कॉयल का ज्यादा इस्तेमाल न करें। कई लोग रात में कमरा बंद करके कॉयल जला कर सो जाते हैं, यह गलत है। इससे पूरा श्वसन तंत्र प्रभावित होता है। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह हानिकारक हो सकता है। लोशन या मच्छरदानी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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इस तरह पता करें वायरल और डेंगू में अंतर
- डेंगू में बहुत तेज बुखार होता है, जबकि वायरल में बुखार अपेक्षाकृत कम रहता है।
- डेंगू होने पर मरीजों की त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं, वायरल में ऐसा नहीं होता।
- डेंगू में प्लेटलेट काउंट तेजी से गिरता है, वायरल में ऐसा नहीं होता।
- डेंगू होने पर कई लोगों का ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, वायरल में ऐसा नहीं होता।
- डेंगू की वजह से उल्टी, पेट दर्द होता है, लिवर पर भी असर पड़ता है। वायरल में यह समस्या नहीं होती।
जिले में 15 दिन में डेंगू के 31 मरीज मिले हैं। हमने मरीजों के घरों के आसपास फॉगिंग कराई। क्षेत्र में कैंप लगवाकर लोगों की जांच कराई है। फिलहाल सभी मरीजों की स्थिति बेहतर है। मच्छरों से सावधान रहने व आसपास साफ सफाई रखने की जरूरत है।
- डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ
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मच्छरों का वार लगातार लोगों को बीमार बना रहा है। जिले में 15 दिन में डेंगू के 31 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से चार बच्चे भी हैं। चिंता का विषय है कि लोग वायरल व डेंगू में अंतर नहीं समझ पा रहे हैं। इसके कारण देरी से इलाज ले रहे हैं। इससे प्लेटलेट्स की संख्या गिर रही है और रिकवर होने में समय लग रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि बुखार है तो फौरन जांच कराएं। बुखार के साथ यदि उल्टी, दस्त और नाक से खून आ रहा है तो यह डेंगू के लक्षण हैं। एहतियात की बात करें तो मलेरिया विभाग फॉगिंग कर रहा है लेकिन यह सिर्फ कागजों तक सीमित है। हाल ही में बीजना गांव में डेंगू के 20 मरीज मिले थे। इसे केंद्र मानकर आसपास के गांवों में जरूर फॉगिंग कराई गई लेकिन शहर के कई मोहल्लों में अब तक एक बार भी टीम नहीं पहुंची है। हर सीजन में बरवालान, मुगलपुरा, हरथला आदि क्षेत्रों में डेंगू के मरीज मिलते हैं। इस बार इन मोहल्लों में फॉगिंग नहीं हुई है। जिला अस्पताल में भी हर दिन बुखार के 150 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से औसतन 30 की जांच की जा रही है। शुरुआत में डॉक्टर सीबीसी ही लिख रहे हैं। बुखार ठीक न होने पर एलाइजा टेस्ट कराया जा रहा है।
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मच्छरों से बचाव के लिए बिक गए दो करोड़ के उत्पाद
जिले में मेडिकल स्टोर संचालकों के आंकड़े के मुताबिक एक माह में दो करोड़ रुपये की कॉयल, रिफिल, लोशन व अन्य उत्पाद बिक चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि एहतियात बरतना अच्छी बात है लेकिन घर में घर में छोटे बच्चे हैं तो कॉयल का ज्यादा इस्तेमाल न करें। कई लोग रात में कमरा बंद करके कॉयल जला कर सो जाते हैं, यह गलत है। इससे पूरा श्वसन तंत्र प्रभावित होता है। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह हानिकारक हो सकता है। लोशन या मच्छरदानी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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इस तरह पता करें वायरल और डेंगू में अंतर
- डेंगू में बहुत तेज बुखार होता है, जबकि वायरल में बुखार अपेक्षाकृत कम रहता है।
- डेंगू होने पर मरीजों की त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं, वायरल में ऐसा नहीं होता।
- डेंगू में प्लेटलेट काउंट तेजी से गिरता है, वायरल में ऐसा नहीं होता।
- डेंगू होने पर कई लोगों का ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, वायरल में ऐसा नहीं होता।
- डेंगू की वजह से उल्टी, पेट दर्द होता है, लिवर पर भी असर पड़ता है। वायरल में यह समस्या नहीं होती।
जिले में 15 दिन में डेंगू के 31 मरीज मिले हैं। हमने मरीजों के घरों के आसपास फॉगिंग कराई। क्षेत्र में कैंप लगवाकर लोगों की जांच कराई है। फिलहाल सभी मरीजों की स्थिति बेहतर है। मच्छरों से सावधान रहने व आसपास साफ सफाई रखने की जरूरत है।
- डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ