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आज जिला पंचायत की पिच पर खेलेंगे सियासी धुरंधर
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Sat, 17 Oct 2015 02:20 AM IST
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शनिवार को थर्ड फेज का चुनाव सियासत के पुराने धुरंधरों का कद तय करेगा। जिला पंचायत के लिए सलेक्ट होने वाली टीम में यह दिग्गज बतौर मेंबर आएंगे या नहीं इसका फैसला होना है। क्योंकि इनमें कई पांच साल तक जिला पंचायत की टीम में बतौर कप्तान रह चुके हैं।
वह अलग बात है कि इस बार आरक्षण के फेर में कई कप्तानी से दूर हो गए हैं। चार चरणों में कराये जा रहे जिला पंचायत इलेक्शन के दो फेज हो चुके हैं। शनिवार को तीसरा चरण होगा। इस चरण में सियासत के पुराने धुरंधर किस्मत आजमा रहे हैं।
कई तो ऐसे दिग्गज हैं जो जिला पंचायत की सियासी पुस्तक के पन्नों को कई कई बार पढ़ चुके। कितने गांव हैं। कितने वार्ड आ रहे हैं। कहां किस बिरादरी का वोट ज्यादा है इन्हें मुंह जुबानी याद है। हालांकि यह भी सच है कि पालिटिक्स में हर रोज नए उतार चढ़ाव आते हैं।
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किसका समीकरण कब बदल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन फिर भी पुराने खिलाड़ियों का एक प्रभाव तो होता ही है। इसी प्रभाव को लेकर यह पुराने दिग्गज मैदान में हैं। शनिवार को इनके लिए वोटिंग होगी। अपने पुराने कार्यकाल का हवाला और मौजूदा सियासी ताल्लुकात के बल पर यह लोग दम भर रहे हैं।
कोई किसी पार्टी से है तो र्कोई किसी दल से। पार्टियां भी इन्हें कामयाब बनाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही हैं। जगह जगह सभाएं करके वोट मांगे गए। गांवों को सुंदर बनाने का ख्वाब दिखाया गया। सड़क, नाली और पेयजल व्यवस्था में सुधार को दावे किए जा रहे हैं।
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वह अलग बात है कि इस बार आरक्षण के फेर में कई कप्तानी से दूर हो गए हैं। चार चरणों में कराये जा रहे जिला पंचायत इलेक्शन के दो फेज हो चुके हैं। शनिवार को तीसरा चरण होगा। इस चरण में सियासत के पुराने धुरंधर किस्मत आजमा रहे हैं।
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कई तो ऐसे दिग्गज हैं जो जिला पंचायत की सियासी पुस्तक के पन्नों को कई कई बार पढ़ चुके। कितने गांव हैं। कितने वार्ड आ रहे हैं। कहां किस बिरादरी का वोट ज्यादा है इन्हें मुंह जुबानी याद है। हालांकि यह भी सच है कि पालिटिक्स में हर रोज नए उतार चढ़ाव आते हैं।
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किसका समीकरण कब बदल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन फिर भी पुराने खिलाड़ियों का एक प्रभाव तो होता ही है। इसी प्रभाव को लेकर यह पुराने दिग्गज मैदान में हैं। शनिवार को इनके लिए वोटिंग होगी। अपने पुराने कार्यकाल का हवाला और मौजूदा सियासी ताल्लुकात के बल पर यह लोग दम भर रहे हैं।
कोई किसी पार्टी से है तो र्कोई किसी दल से। पार्टियां भी इन्हें कामयाब बनाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही हैं। जगह जगह सभाएं करके वोट मांगे गए। गांवों को सुंदर बनाने का ख्वाब दिखाया गया। सड़क, नाली और पेयजल व्यवस्था में सुधार को दावे किए जा रहे हैं।