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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही बच सकती है देश की संस्कृति : प्रो. केपी सिंह
Sun, 01 Dec 2024 02:04 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Sun, 01 Dec 2024 02:04 AM IST
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मुरादाबाद। सांस्कृतिक समिति केजीके (पीजी) कॉलेज में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद : राष्ट्र निर्माण में अपरिहार्य है विषय पर अंतर महाविद्यालयीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रो. केपी सिंह ने कहा कि कितना भी पुराना राष्ट्र हो, कितनी भी श्रेष्ठ संस्कृति हो। लेकिन उदाहरण हमेशा सफल, संपन्न और शिक्षित राष्ट्रों का ही दिया जाता है। अफ्रीका में ऐसे बहुत से देश हैं, जिनका जन्म अमेरिका के साथ हुआ था। उनकी भी अपनी संस्कृति है, लेकिन कोई उनके बारे में नहीं जानता है। इसलिए भारत की संस्कृति बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण साधन शिक्षा है।
युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर हम अपने राष्ट्र की संस्कृति को बचा सकते हैं। विशिष्ट अतिथि विधायक डॉ. हरि सिंह ढिल्लों ने गुरु नानक के संगत व पंगत को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के न्याय संगत बताया। कॉलेज के संरक्षक व प्रबंधन समिति के सचिव इंजीनियर विवेक खन्ना ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी ने स्पष्ट कि शिष्टाचार व् सभ्यता ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अहम हिस्सा है। इस दौरान डॉ. संजय जौहरी, प्रो. शिव पूजन, प्रो. सत्यव्रत सिंह रावत, प्रो. चारू मेहरोत्रा, प्रो. अजय कुमार सिंह, प्रो. गुरमीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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चंद्रांश को मिला प्रथम स्थान
वाद विवाद प्रतियोगिता में पक्ष की ओर से प्रथम स्थान केजीके पीजी कॉलेज के चंद्रांश देव कौशिक ने प्राप्त किया। दूसरा स्थान डीएके महाविद्यालय मुरादाबाद की हेप्जीबा शिबा व तीसरा स्थान लाला राधेश्याम कॉलेज ऑफ लॉ बिजनौर की नेवेदा नूर ने प्राप्त किया। प्रतियोगिता में विपक्ष में प्रथम स्थान पर लाला राधेश्याम कॉलेज ऑफ लॉ की हानियां रईस, द्वितीय स्थान पर हिंदू कॉलेज की कशिश चौहान, तृतीय स्थान पर दीक्षित कॉलेज ऑफ लॉ रामपुर की प्राची पंडित रहीं। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रो. एम त्रिपाठी, प्रो. एके गुप्ता एवं प्रो. अर्चना राठौर रहीं।
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मुख्य अतिथि एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रो. केपी सिंह ने कहा कि कितना भी पुराना राष्ट्र हो, कितनी भी श्रेष्ठ संस्कृति हो। लेकिन उदाहरण हमेशा सफल, संपन्न और शिक्षित राष्ट्रों का ही दिया जाता है। अफ्रीका में ऐसे बहुत से देश हैं, जिनका जन्म अमेरिका के साथ हुआ था। उनकी भी अपनी संस्कृति है, लेकिन कोई उनके बारे में नहीं जानता है। इसलिए भारत की संस्कृति बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण साधन शिक्षा है।
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युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर हम अपने राष्ट्र की संस्कृति को बचा सकते हैं। विशिष्ट अतिथि विधायक डॉ. हरि सिंह ढिल्लों ने गुरु नानक के संगत व पंगत को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के न्याय संगत बताया। कॉलेज के संरक्षक व प्रबंधन समिति के सचिव इंजीनियर विवेक खन्ना ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी ने स्पष्ट कि शिष्टाचार व् सभ्यता ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अहम हिस्सा है। इस दौरान डॉ. संजय जौहरी, प्रो. शिव पूजन, प्रो. सत्यव्रत सिंह रावत, प्रो. चारू मेहरोत्रा, प्रो. अजय कुमार सिंह, प्रो. गुरमीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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चंद्रांश को मिला प्रथम स्थान
वाद विवाद प्रतियोगिता में पक्ष की ओर से प्रथम स्थान केजीके पीजी कॉलेज के चंद्रांश देव कौशिक ने प्राप्त किया। दूसरा स्थान डीएके महाविद्यालय मुरादाबाद की हेप्जीबा शिबा व तीसरा स्थान लाला राधेश्याम कॉलेज ऑफ लॉ बिजनौर की नेवेदा नूर ने प्राप्त किया। प्रतियोगिता में विपक्ष में प्रथम स्थान पर लाला राधेश्याम कॉलेज ऑफ लॉ की हानियां रईस, द्वितीय स्थान पर हिंदू कॉलेज की कशिश चौहान, तृतीय स्थान पर दीक्षित कॉलेज ऑफ लॉ रामपुर की प्राची पंडित रहीं। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रो. एम त्रिपाठी, प्रो. एके गुप्ता एवं प्रो. अर्चना राठौर रहीं।