खुद को दिखी रोशनी तो अब दूसरों को दिखा रहे शिक्षा की राह
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मुरादाबाद। लीक से हटकर कुछ अलग करने का जुनून हो तो बड़ी से बडी आपदा भी अवसर में तब्दील हो जाती हैं। कांठ में संचालित कक्षा केंद्र इसे चरितार्थ कर रहा है। कोरोना काल में दो दोस्तों रजत प्रभाकर व अभिषेक विश्नोई ने ऑनलाइन कोचिंग शुरू की थी। जो अब स्टार्ट अप का रूप ले चुकी है। दोनों दोस्तों की उम्र महज 27 वर्ष है। इस स्टार्ट अप से वे दो लाख रुपये माह तक अर्जित कर रहे हैं।
इसमें विद्यार्थियों को तकनीक के जरिये शिक्षा में नवाचार से जोड़ा जा रहा है। जल्द ही इसे राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की तैयारी चल रही है। कक्षा केंद्र में नर्सरी ने कक्षा 12 तक के 300 छात्र कोचिंग लेते हैं।
उनकी वेबसाइट व यूट्यूब चैनल से सैकड़ों छात्र जुड़े हैं। आर्थिक रूप से अक्षम कुछ विद्यार्थियों को यहां न सिर्फ निशुल्क कोचिंग दी जा रही है। बल्कि उनके स्कूल का खर्च भी उठाया जा रहा है। ऐसा हम नहीं बल्कि कक्षा केंद्र में शिक्षा पा रहे कांठ के छात्र बोल रहे हैं।
शिक्षा में नवाचार के लिए दोनों दोस्तों को कांठ के एसडीएम सम्मानित कर चुके हैं। स्वीप कार्यक्रम में तकनीकी सहायता के लिए डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने भी उन्हें पुरस्कृत किया था।
मजबूरी में ट्यूशन शुरू किया था कक्षा केंद्र के संचालक रजत प्रभाकर ने बताया कि उन्होंने 2012 में खर्चे पूरे न होने के कारण मजबूरी में ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया था। एयरफोर्स की परीक्षा भी दी, जिसमें प्रथम रैंक प्राप्त की लेकिन मेडिकल में अनफिट हो गए। इसके बाद ट्यूशन पढ़ाते रहे। 2019 में दोस्त ने सुझाव दिया कि मिलकर कोचिंग शुरू करते हैं। 2020 में लॉकडाउन लगा तो यह प्लान भी ठप पड़ने की कगार पर था लेकिन, दोनों दोस्तों ने मोबाइल से पीडीएफ व ऑडियो रिकॉर्डिंग से टॉपिक पढ़ाने शुरू किए।
सात विद्यार्थियों के 100 में 100 अंक
ऑडियो रिकॉर्डिंग से शुरू हुआ ये सिलसिला अब स्टूडियो तक पहुंच चुका है। कक्षा केंद्र में हाईटेक कैमरा, इंट्रैक्टिव पैनल के जरिये क्लास की लाइव स्ट्रीमिंग भी होती है। चंडीगढ़, पटियाला व अन्य स्थानों के छात्र भी क्लास लेते हैं। यूट्यूब पर कक्षा केंद्र ने क्लास के लिए कोई शुल्क नहीं रखा है। पढ़ने वाले कक्षा 12 के सात विद्यार्थियों ने पिछले वर्ष 100 में 100 अंक पाए थे। उन्हें सम्मानित किया गया था।