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Moradabad News: सीरम के लिए लगानी पड़ती है 120 किमी की दौड़
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मुरादाबाद। जिले में हर दिन कुत्ते, बंदर व गीदड़ के काटने के 150 मामले आते हैं। 10 से ज्यादा मामले गंभीर होते हैं, जिसमें वैक्सीन से काम नहीं चलता। इन लोगों को एंटी रैबीज सीरम की जरूरत पड़ती है। मंडल स्तरीय जिला अस्पताल में सीरम की सप्लाई नहीं है। यह सप्लाई सिर्फ मेडिकल कॉलेजों के लिए है। इसलिए यहां से मरीजों को 120 किलोमीटर दूर मेरठ जाना पड़ता है।
सीरम की तीन डोज मिलने तक मरीज मेरठ के चक्कर लगाते रहते हैं। बुधवार को मूंढापांडे के स्वास्थ्य उपकेंद्र से एक मरीज को जिला अस्पताल भेजा गया। मरीज को गीदड़ ने काटा था और उसे सीरम की जरूरत थी। जिला अस्पतालों में सीरम न होने के कारण मरीज को निजी अस्पताल से सीरम खरीदकर लाना पड़ा, जिला अस्पताल के स्टाफ ने उसे लगाया।
इसी तरह मैनाठेर थाना क्षेत्र में कुत्तों के हमले से घायल झाड़ियों में मिली नवजात को भी मेडिकल कॉलेज से मंगाकर सीरम दिया गया है। मुरादाबाद में मेडिकल कॉलेज बनने से लोगों को इस परेशानी से मुक्ति मिल सकेगी। सिर्फ सीरम ही नहीं, आईसीयू की जरूरत वाले मरीज मेरठ रेफर किए जाते हैं। एक्सीडेंट में गंभीर घायल मरीजों का इलाज तक यहां नहीं हो पाता, क्योंकि उन्हें न्यूरोलॉजिस्ट की जरूरत पड़ती है। न्यूरोलॉजिस्ट की तैनाती सिर्फ मेडिकल कॉलेज में है।
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पेट में दर्द आज तो अल्ट्रासाउंड होता है 20 दिन बाद
जिला अस्पताल में सिर्फ एक ही रेडियोलॉजिस्ट होने के कारण काम का दबाव अधिक है। ऐसे में लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए कई दिन बाद की तारीख दी जाती है। एक मरीज के तीमारदार ने सवाल भी उठाया कि पेट में दर्द आज है और अल्ट्रासाउंड 20 दिन बाद होगा। जवाब मिला कि डॉक्टर कहां से लाएं, मेडिकल कॉलेज चले जाओ। वहां एक दिन में ही अल्ट्रासाउंड हो जाएगा। यदि मुरादाबाद में मेडिकल कॉलेज बनेगा तो रेडियोलॉजिस्ट सहित विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदों पर नियुक्ति होगी। इससे मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा।
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तीन महीने तक रिपोर्ट के लिए करना पड़ता है इंतजार
जिला अस्पताल में अब तक हेपेटाइटिस के वायरल लोड की जांच की व्यवस्था नहीं थी। यहां से सैंपल लेकर मेरठ भेजे जाते थे। वहां से रिपोर्ट आने में तीन महीने लग जाते थे। कई बार मरीजों के सैंपल खराब हो गए और रिपोर्ट ही नहीं आई। अब मुरादाबाद में ही बीएसएल-2 लैब शुरू की गई है। एमआरआई भवन का उद्घाटन दो साल पहले हुआ था, लेकिन मशीन अब तक नहीं लग पाई है। मेडिकल कॉलेज बनने से यह सुविधा भी शुरू हो जाएगी।
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सरकारी अस्पताल में इन डॉक्टरों की जरूरत
जनरल फिजिशियन - एक
चेस्ट फिजिशियन - एक
बाल रोग विशेषज्ञ - एक
रेडियोलॉजिस्ट - दो
कार्डियोलॉजिस्ट - दो
न्यूरो सर्जन - एक
दंत रोग विशेषज्ञ - एक
एनेस्थेटिक - एक
ऑर्थो सर्जन - एक
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ईएनटी सर्जन, न्यूरोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजिशियन के एक-एक पद खाली हैं। इसी तरह इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के दो व एमओ के तीन पद खाली हैं। यह पद तब ही भरे जा सकते हैं, जब मुरादाबाद में मेडिकल कॉलेज बन जाएगा।
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वर्जन
जिला अस्पताल में 256 बेड हैं। महिला अस्पताल में 178 बेड हैं। मेडिकल कॉलेज के लिए कम से कम 500 बेड होने चाहिए। यहां मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति मिल जाए तो लोगों को बहुत सुविधा होगी। इसके लिए सीएमओ के साथ मिलकर प्रयास करेंगे।
- डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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सीरम की तीन डोज मिलने तक मरीज मेरठ के चक्कर लगाते रहते हैं। बुधवार को मूंढापांडे के स्वास्थ्य उपकेंद्र से एक मरीज को जिला अस्पताल भेजा गया। मरीज को गीदड़ ने काटा था और उसे सीरम की जरूरत थी। जिला अस्पतालों में सीरम न होने के कारण मरीज को निजी अस्पताल से सीरम खरीदकर लाना पड़ा, जिला अस्पताल के स्टाफ ने उसे लगाया।
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इसी तरह मैनाठेर थाना क्षेत्र में कुत्तों के हमले से घायल झाड़ियों में मिली नवजात को भी मेडिकल कॉलेज से मंगाकर सीरम दिया गया है। मुरादाबाद में मेडिकल कॉलेज बनने से लोगों को इस परेशानी से मुक्ति मिल सकेगी। सिर्फ सीरम ही नहीं, आईसीयू की जरूरत वाले मरीज मेरठ रेफर किए जाते हैं। एक्सीडेंट में गंभीर घायल मरीजों का इलाज तक यहां नहीं हो पाता, क्योंकि उन्हें न्यूरोलॉजिस्ट की जरूरत पड़ती है। न्यूरोलॉजिस्ट की तैनाती सिर्फ मेडिकल कॉलेज में है।
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पेट में दर्द आज तो अल्ट्रासाउंड होता है 20 दिन बाद
जिला अस्पताल में सिर्फ एक ही रेडियोलॉजिस्ट होने के कारण काम का दबाव अधिक है। ऐसे में लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए कई दिन बाद की तारीख दी जाती है। एक मरीज के तीमारदार ने सवाल भी उठाया कि पेट में दर्द आज है और अल्ट्रासाउंड 20 दिन बाद होगा। जवाब मिला कि डॉक्टर कहां से लाएं, मेडिकल कॉलेज चले जाओ। वहां एक दिन में ही अल्ट्रासाउंड हो जाएगा। यदि मुरादाबाद में मेडिकल कॉलेज बनेगा तो रेडियोलॉजिस्ट सहित विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदों पर नियुक्ति होगी। इससे मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा।
तीन महीने तक रिपोर्ट के लिए करना पड़ता है इंतजार
जिला अस्पताल में अब तक हेपेटाइटिस के वायरल लोड की जांच की व्यवस्था नहीं थी। यहां से सैंपल लेकर मेरठ भेजे जाते थे। वहां से रिपोर्ट आने में तीन महीने लग जाते थे। कई बार मरीजों के सैंपल खराब हो गए और रिपोर्ट ही नहीं आई। अब मुरादाबाद में ही बीएसएल-2 लैब शुरू की गई है। एमआरआई भवन का उद्घाटन दो साल पहले हुआ था, लेकिन मशीन अब तक नहीं लग पाई है। मेडिकल कॉलेज बनने से यह सुविधा भी शुरू हो जाएगी।
सरकारी अस्पताल में इन डॉक्टरों की जरूरत
जनरल फिजिशियन - एक
चेस्ट फिजिशियन - एक
बाल रोग विशेषज्ञ - एक
रेडियोलॉजिस्ट - दो
कार्डियोलॉजिस्ट - दो
न्यूरो सर्जन - एक
दंत रोग विशेषज्ञ - एक
एनेस्थेटिक - एक
ऑर्थो सर्जन - एक
ईएनटी सर्जन, न्यूरोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजिशियन के एक-एक पद खाली हैं। इसी तरह इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के दो व एमओ के तीन पद खाली हैं। यह पद तब ही भरे जा सकते हैं, जब मुरादाबाद में मेडिकल कॉलेज बन जाएगा।
वर्जन
जिला अस्पताल में 256 बेड हैं। महिला अस्पताल में 178 बेड हैं। मेडिकल कॉलेज के लिए कम से कम 500 बेड होने चाहिए। यहां मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति मिल जाए तो लोगों को बहुत सुविधा होगी। इसके लिए सीएमओ के साथ मिलकर प्रयास करेंगे।
- डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल