Shafiqur Rahman Barq: उम्र जिनके लिए सिर्फ एक पड़ाव भर रही, केबीसी में उनको लेकर पूछा गया था यह सवाल
बर्क अपने बयानों को लेकर भी हमेशा सुर्खियों में रहते थे। उन्होंने संसद में वंदे मातरम का विरोध किया था। जिसको लेकर काफी बवाल भी मचा था। इसके साथ ही उन्होंने इस्राइल और फलस्तीन के बीच चल रहे तनाव में खुलकर फलस्तीन का समर्थन किया था।
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डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के लिए उम्र सिर्फ पड़ावभर ही थी। डॉ. बर्क मौजूदा लोकसभा के सबसे बुजुर्ग सांसद थे। 93 वर्ष की उम्र में नई लोकसभा में उनकी मौजूदगी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने भी तारीफ करते हुए कहा था, 93 साल की उम्र के बावजूद भी डॉ. बर्क मौजूद हैं, सदन के प्रति ऐसी निष्ठा होनी चाहिए।
संभल की राजनीति के केंद्र बिंदु रहे डॉ. बर्क के सियासी कदम वर्ष 1996 में पहली बार लखनऊ से दिल्ली की ओर बढ़े थे। 1996 में सपा के टिकट पर मुरादाबाद लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर डॉ. बर्क पहली बार संसद पहुंचे थे। वह मुरादाबाद से 4 बार लोकसभा का चुनाव लड़े। तीन बार वह विजयी रहे।
बयानों को लेकर रहे सुर्खियों में
बर्क अपने बयानों को लेकर भी हमेशा सुर्खियों में रहते थे। उन्होंने संसद में वंदे मातरम का विरोध किया था। जिसको लेकर काफी बवाल भी मचा था। इसके साथ ही उन्होंने इस्राइल और फलस्तीन के बीच चल रहे तनाव में खुलकर फलस्तीन का समर्थन किया था।
इन दलों से संभल से लड़ा विधानसभा चुनाव
स्वतंत्र पार्टी, भारतीय क्रांति पार्टी (बीकेडी), जनता पार्टी (जेएनपी), कांग्रेस यू, लोक दल (एलकेडी), जनता दल, जनता पार्टी (जेपी), समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय परिवर्तन दल (आरपीडी)
एक बार बसपा के टिकट पर लड़ा था लोकसभा चुनाव
बर्क सात बार लोकसभा चुनाव लड़े थे। छह बार वह सपा के टिकट पर लड़े थे। एक बार बसपा के टिकट पर संभल से लोकसभा चुनाव लड़े थे।
केबीसी में पूछा गया था सवाल
बर्क की उम्र पर कौन बनेगा करोड़पति में भी उन पर सवाल किया गया था। अमिताभ बच्चन ने एक प्रतिभागी से पूछा था कि सबसे ज्यादा उम्र के सांसद कौन हैं, उनका क्या नाम है।
52 साल की सियासत, दो जिले, 10 दल, 17 चुनाव
बर्क ने 52 साल के राजनीतिक सफर में 17 चुनाव लड़े। इसमें 10 विधानसभा तो 7 लोकसभा चुनाव शामिल हैं। 10 दलों में शामिल हुए। वर्ष 1967 में उन्होंने संभल से पहला विस चुनाव लड़ा था। संभल विधानसभा सीट से डॉ. बर्क ने दस बार अपनी किस्मत आजमाई। इसमें चार बार उन्हें जीत मिली। छह बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा मुरादाबाद सीट से चार बार लोकसभा का चुनाव लड़ा था। जबकि संभल से तीन बार लोकसभा चुनाव मैदान में उतरे थे। इन सात चुनावों में उन्हें पांच बार कामयाबी मिली। दो बार हार देखनी पड़ी थी।
बर्क 1996, 1999 और 2004 में मुरादाबाद सीट से विजयी हुए थे। 1999 लोकसभा चुनाव में वह अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस के प्रत्याशी चंद्र विजय सिंह से चुनाव हार गए थे।
2009 के लोकसभा चुनाव में सपा ने उन्हें मुरादाबाद से उम्मीदवार नहीं बनाया। इसके बाद नाराज डॉ. बर्क बसपा में शामिल हो गए थे। बसपा के टिकट पर संभल से लोकसभा चुनाव लड़े और विजयी हुए।