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Moradabad News: अब एआई से होगी मोतियाबिंद की जांच, रोशनी एप तैयार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 01:45 AM IST
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Now Cataract Puja will be done from the hotel, Roshni App is ready
मुरादाबाद। बढ़ते नेत्र रोग की चुनौती से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मोबाइल एप मोतियाबिंद की सटीक पहचान करने में कारगर साबित हुआ है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रीसर्च (आईसीएमआर) द्वारा तैयार किए गए रोशनी एआई मॉडल को मुरादाबाद समेत प्रदेश के सभी जिलों में लागू करने की तैयारी है।
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इसके जरिए स्वास्थ्य विभाग के फ्रंटलाइन वर्कर भी मोबाइल से लोगों की आंखों की जांच कर सकेंगे। मोबाइल से फोटो खींचकर रोशनी एप पर अपलोड करना होगा। इसके बाद रेटिना की सारी रिपोर्ट एआई सॉफ्टवेयर आपके सामने रख देगा। हाल ही में लखनऊ में आयोजित हुई एआई व स्वास्थ्य नवाचार कॉन्फ्रेंस में इस मॉडल पर चर्चा हुई। मुरादाबाद से डिप्टी सीएमओ डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव ने इसमें हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि रोशनी एआई मॉडल को 50 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों की आंखों की तस्वीरों के आधार पर विकसित किया गया है। यह डेटा किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) और बलरामपुर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग से एकत्र किया गया है। प्रत्येक आंख की इमेज को विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा सत्यापित जांच रिपोर्ट से जोड़ा गया। पहले आंख, फिर आईरिस और अंत में पुतली स्तर तक विश्लेषण किया गया।
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96 प्रतिशत तक सटीक परिणाम का दावा

प्रदेश सरकार द्वारा जारी बुकलेट में प्रकाशित तथ्यों के मुताबिक पुतली की तस्वीरों पर आधारित इस मॉडल ने 96 प्रतिशत सटीकता के साथ मोतियाबिंद की पहचान की। राष्ट्रीय अंधत्व और दृष्टि बाधिता सर्वेक्षण (2015-19) में सामने आया कि 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की आंख खराब होने का कारण मोतियाबिंद है। अकेले उत्तर प्रदेश में करीब 46.7 लाख लोग बिना इलाज के मोतियाबिंद से प्रभावित हैं। यह मॉडल सामान्य स्मार्टफोन से ली गई आंखों की तस्वीरों के जरिए मोतियाबिंद की पहचान करता है, जिसे डीप-लर्निंग आधारित एआई मॉडल विश्लेषित करता है।
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मोतियाबिंद के कारण बिजनौर में सबसे ज्यादा दृष्टिहीनता का शिकार हुए लोग

प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश के संवेदनशील 32 जिलों में मोतियाबिंद के कारण दृष्टिहीनता के मामले सबसे ज्यादा चिह्नित किए गए हैं। यहां नेत्र रोगियों में से 3.67 प्रतिशत लोगों की आंखों की रोशनी मोतियाबिंद के कारण शून्य हो गई। जबकि 21.82 प्रतिशत मरीजों की आंखें बेहद कमजोर हो गईं। इस सर्वे में उत्तर प्रदेश के तीन जिले बिजनौर, आंबेडकरनगर और बांदा शामिल रहे।




वर्जन



रोशनी एप को आईआईटी कानपुर में फेडरेटेड सिस्टम पर टेस्ट किया जाएगा जिससे डेटा गोपनीयता बनी रही। साथ ही एआई मॉडल को बेहतर बनाया जा सके। सरकार की योजना है कि स्मार्टफोन से लैस आशा कार्यकर्ताओं के जरिए रोशनी को नियमित सामुदायिक स्क्रीनिंग टूल के रूप में लागू किया जाए।

- डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, डिप्टी सीएमओ
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