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Moradabad News: सिग्नल की नई प्रणाली लागू, बढ़ेगी ट्रेनों की स्पीड
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मुरादाबाद। रेलवे ने 50 साल पुरानी सिग्नल व्यवस्था को बदलकर मंडल में ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (एबीएस) लागू की है। पहले चरण में महरौली-डासना-पिलखुआ और जंगबहादुर-मैकलगंज-नेरी रेलखंडों में इस व्यवस्था से ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया है। इससे ट्रेनों की गति बढ़ने व एक सेक्शन में अधिक ट्रेनें चलाने का दावा किया जा रहा है।
रेलवे ने हर सेक्शन में सिग्नलों की संख्या बढ़ाई है। साथ ही उन्हें स्वचालित बना दिया है। हर किलोमीटर पर एक सिग्नल होगा, जिसके हरा होते ही ट्रेन स्टेशन छोड़ सकेगी। ड्राइवर को अपने से आगे वाली ट्रेन के चलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 1500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में गाजियाबाद-मुरादाबाद-रोजा तक ऑटोमेटिक सेक्शन बनाया जा रहा है।
इसके लिए जगह-जगह रेलवे ने नॉन इंटरलॉकिंग का काम भी पूरा कर लिया है। गाजियाबाद-मुरादाबाद और सीतापुर-रोजा रेलखंड पर कार्य पूरा हुआ है। पुरानी व्यवस्था जिसे एबसोल्यूट ब्लॉक सिग्नलिंग कहते हैं उसमें एक स्टेशन से गाड़ी निकलने के बाद अगला सिग्नल दूसरे स्टेशन के आउटर पर मिलता है। यह दूरी 10-12 किलोमीटर से 20-25 किलोमीटर की होती है।
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रेलवे ने हर सेक्शन में सिग्नलों की संख्या बढ़ाई है। साथ ही उन्हें स्वचालित बना दिया है। हर किलोमीटर पर एक सिग्नल होगा, जिसके हरा होते ही ट्रेन स्टेशन छोड़ सकेगी। ड्राइवर को अपने से आगे वाली ट्रेन के चलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 1500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में गाजियाबाद-मुरादाबाद-रोजा तक ऑटोमेटिक सेक्शन बनाया जा रहा है।
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इसके लिए जगह-जगह रेलवे ने नॉन इंटरलॉकिंग का काम भी पूरा कर लिया है। गाजियाबाद-मुरादाबाद और सीतापुर-रोजा रेलखंड पर कार्य पूरा हुआ है। पुरानी व्यवस्था जिसे एबसोल्यूट ब्लॉक सिग्नलिंग कहते हैं उसमें एक स्टेशन से गाड़ी निकलने के बाद अगला सिग्नल दूसरे स्टेशन के आउटर पर मिलता है। यह दूरी 10-12 किलोमीटर से 20-25 किलोमीटर की होती है।
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