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Moradabad News: न नल मिला न जल....गांव-गांव खुदी सड़कें दे रहीं बड़ा दर्द
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मुरादाबाद। जल जीवन मिशन... योजना यह थी कि लोगों को स्वच्छ जल मिले लेकिन हकीकत यह है कि पानी तो मिला नहीं, घर से निकलना और दूभर हो गया। गांवों में इस योजना का सच चौंकाने वाला है। सवाल भी खड़े करता है कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी लोगों को सहूलियत नहीं मिल रही तो इसे क्या कहा जाए। खुदी सड़कों पर गिरकर लोट चोटिल हो रहे हैं।
ठाकुरद्वारा। ग्राम पंचायत लौंगी खुर्द में पाइपलाइन डालने के लिए सड़कें खोदी गई थीं। पाइप लाइन तो डाल दी गई लेकिन प्रशासनिक मशीनरी सड़कें सही करना भूल गई। अब बारिश हो जाने से इन सड़कों का बुरा हाल हो गया है। यहां से निकलने पर डर लगता है कि कहीं गिर न जाएं। ग्राम पंचायत की आबादी करीब 3500 है। गांव में एक वर्ष से जल जीवन मिशन का काम पूरी तरह बंद है। पानी की आपूर्ति के लिए गांव के बाहर जंगल में एक नलकूप बनाया गया है, जिसे बोरिंग कर छोड़ दिया गया है। गांव में करीब 400 घर हैं। सभी घरों में कनेक्शन भी नहीं किया गया है। गांव के मिद्दन खां का कहना है कि योजना शुरू होते समय लोगों को काफी खुशी हुई थी लेकिन अब यह खुशी नाउम्मीदी में बदल चुकी है। योजना के नाम पर सिर्फ परेशानियां ही मिली हैं। गांव के पूर्व प्रधान यूनुस का कहना है कि गांव में खोदी गई सड़कें खुद ही लापरवाही बयां कर रही हैं। ग्राम प्रधान साजिया का कहना है कि योजना के बीच में बंद हो जाने पर अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन एक साल बाद भी बंद काम शुरू नहीं हुआ है। टैंक का निर्माण भी नहीं किया गया है। सिर्फ बोरिंग कर नलकूप का कमरा और चहारदीवारी बनाकर काम बंद कर दिया गया।
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उखड़े खड़ंजे दे रहे जिम्मेदारों के काम की गवाही
बिलारी। ग्राम पहाड़पुर और उसमें शामिल मझरा कनौबी को पानी की आपूर्ति के लिए पहाड़पुर गांव में परिषदीय स्कूल के निकट की भूमि का चयन किया गया। दो साल पहले ओवरहेड टैंक बनाने के लिए फाउंडेशन बनाया गया। सरिये के साथ पिलर खड़े कर दिए गए। इसके बाद काम रुक गया। जलनिगम द्वारा जिस संस्था को जिम्मेदारी दी गई उसने दो साल से कोई काम नहीं किया। पहाड़पुर गांव के पूर्व प्रधान चौधरी गंभीर सिंह का कहना है कि स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के नाम पर जल निगम द्वारा सड़कें तो खोद दी गईं लेकिन मरम्मत नहीं कराई गई। कनौबी पहाड़पुर गांव निवासी हरकिशोर ने बताया कि खड़ंजे उखाड़ दिए गए। दो साल बाद भी उनकी मरम्मत नहीं कराई गई। हरकिशोर के अनुसार उखड़े खड़ंजे के कारण उनके पशु की मौत तक हो गई। नरोत्तम सिंह का कहना है कि कई महिलाओं और बच्चों को चोट लग चुकी है। खड़ंजे ठीक कराने के लिए जल निगम के अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजे गए लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। संवाद
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शिकायती पत्र तो छोड़िए, ऑनलाइन शिकायतों की भी सुनवाई नहीं कांठ
छजलैट के गांव तेलीपुरा में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीणों को पानी देने के लिए सालों पहले काम शुरू हुआ था। बोरिंग करके कमरा बना दिया गया। सौर ऊर्जा सिस्टम लगा है मगर ओवरहेड टैंक नहीं बनाया गया। कुछ घरों में कनेक्शन भी दिए गए। गांव में रास्तों को खोदकर पाइप लाइन बिछाई गई। कुछ हिस्से अभी तक इससे भी अछूते हैं। खोदे गए रास्तों की मरम्मत भी नहीं की गई। पाइप लाइन को डायरेक्ट नलकूप से जोड़कर पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई। प्रेशर न होने से ग्रामीणों को जरूरत भर का पानी भी नहीं मिलता। शुक्रवार को गांव के फैसल, जैद, फरमान ने बताया कि न तो पानी प्रेशर के साथ आ रहा और न ही पानी आने का कोई समय है। रास्तों की मरम्मत भी नहीं की गई। सुरजीत सिंह, शोबिंद्र सिंह ने कहा कि एक साल पहले पाइप लाइन को खोदे गए खड़ंजे को ऐसे ही छोड़ दिया गया। राहगीर ठोकर खाकर गिरते हैं। शिकायती पत्र तो छोड़िए, अफसर ऑनलाइन शिकायतें भी नहीं देखते। पूरे गांव में पानी भी नहीं आता। प्रधान करन सिंह ने बताया कि ओवरहेड टैंक नहीं बनाया गया। डायरेक्ट पानी दिया जा रहा है। ज्यादातर रास्तों को भी खोदने के बाद ऐसे ही छोड़ दिया गया। कई की उन्होंने खुद मरम्मत कराई है। उनकी पंचायत के ही गांव मेडयो में अभी पाइप लाइन भी नहीं है। संवाद
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ठाकुरद्वारा। ग्राम पंचायत लौंगी खुर्द में पाइपलाइन डालने के लिए सड़कें खोदी गई थीं। पाइप लाइन तो डाल दी गई लेकिन प्रशासनिक मशीनरी सड़कें सही करना भूल गई। अब बारिश हो जाने से इन सड़कों का बुरा हाल हो गया है। यहां से निकलने पर डर लगता है कि कहीं गिर न जाएं। ग्राम पंचायत की आबादी करीब 3500 है। गांव में एक वर्ष से जल जीवन मिशन का काम पूरी तरह बंद है। पानी की आपूर्ति के लिए गांव के बाहर जंगल में एक नलकूप बनाया गया है, जिसे बोरिंग कर छोड़ दिया गया है। गांव में करीब 400 घर हैं। सभी घरों में कनेक्शन भी नहीं किया गया है। गांव के मिद्दन खां का कहना है कि योजना शुरू होते समय लोगों को काफी खुशी हुई थी लेकिन अब यह खुशी नाउम्मीदी में बदल चुकी है। योजना के नाम पर सिर्फ परेशानियां ही मिली हैं। गांव के पूर्व प्रधान यूनुस का कहना है कि गांव में खोदी गई सड़कें खुद ही लापरवाही बयां कर रही हैं। ग्राम प्रधान साजिया का कहना है कि योजना के बीच में बंद हो जाने पर अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन एक साल बाद भी बंद काम शुरू नहीं हुआ है। टैंक का निर्माण भी नहीं किया गया है। सिर्फ बोरिंग कर नलकूप का कमरा और चहारदीवारी बनाकर काम बंद कर दिया गया।
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उखड़े खड़ंजे दे रहे जिम्मेदारों के काम की गवाही
बिलारी। ग्राम पहाड़पुर और उसमें शामिल मझरा कनौबी को पानी की आपूर्ति के लिए पहाड़पुर गांव में परिषदीय स्कूल के निकट की भूमि का चयन किया गया। दो साल पहले ओवरहेड टैंक बनाने के लिए फाउंडेशन बनाया गया। सरिये के साथ पिलर खड़े कर दिए गए। इसके बाद काम रुक गया। जलनिगम द्वारा जिस संस्था को जिम्मेदारी दी गई उसने दो साल से कोई काम नहीं किया। पहाड़पुर गांव के पूर्व प्रधान चौधरी गंभीर सिंह का कहना है कि स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के नाम पर जल निगम द्वारा सड़कें तो खोद दी गईं लेकिन मरम्मत नहीं कराई गई। कनौबी पहाड़पुर गांव निवासी हरकिशोर ने बताया कि खड़ंजे उखाड़ दिए गए। दो साल बाद भी उनकी मरम्मत नहीं कराई गई। हरकिशोर के अनुसार उखड़े खड़ंजे के कारण उनके पशु की मौत तक हो गई। नरोत्तम सिंह का कहना है कि कई महिलाओं और बच्चों को चोट लग चुकी है। खड़ंजे ठीक कराने के लिए जल निगम के अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजे गए लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। संवाद
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शिकायती पत्र तो छोड़िए, ऑनलाइन शिकायतों की भी सुनवाई नहीं कांठ
छजलैट के गांव तेलीपुरा में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीणों को पानी देने के लिए सालों पहले काम शुरू हुआ था। बोरिंग करके कमरा बना दिया गया। सौर ऊर्जा सिस्टम लगा है मगर ओवरहेड टैंक नहीं बनाया गया। कुछ घरों में कनेक्शन भी दिए गए। गांव में रास्तों को खोदकर पाइप लाइन बिछाई गई। कुछ हिस्से अभी तक इससे भी अछूते हैं। खोदे गए रास्तों की मरम्मत भी नहीं की गई। पाइप लाइन को डायरेक्ट नलकूप से जोड़कर पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई। प्रेशर न होने से ग्रामीणों को जरूरत भर का पानी भी नहीं मिलता। शुक्रवार को गांव के फैसल, जैद, फरमान ने बताया कि न तो पानी प्रेशर के साथ आ रहा और न ही पानी आने का कोई समय है। रास्तों की मरम्मत भी नहीं की गई। सुरजीत सिंह, शोबिंद्र सिंह ने कहा कि एक साल पहले पाइप लाइन को खोदे गए खड़ंजे को ऐसे ही छोड़ दिया गया। राहगीर ठोकर खाकर गिरते हैं। शिकायती पत्र तो छोड़िए, अफसर ऑनलाइन शिकायतें भी नहीं देखते। पूरे गांव में पानी भी नहीं आता। प्रधान करन सिंह ने बताया कि ओवरहेड टैंक नहीं बनाया गया। डायरेक्ट पानी दिया जा रहा है। ज्यादातर रास्तों को भी खोदने के बाद ऐसे ही छोड़ दिया गया। कई की उन्होंने खुद मरम्मत कराई है। उनकी पंचायत के ही गांव मेडयो में अभी पाइप लाइन भी नहीं है। संवाद