Nameplate Controversy: कांवड़ियों के कंधों पर सज रही इरशाद की कांवड़, कहा- सेवा और समर्पण किसी एक धर्म का नहीं
नाम विवाद के बीच मुरादाबाद के रहने वाले इरशाद लगातार कांवड़ तैयार कर हैं। उनका कहना है कि उन्हें लगातार काम मिल रहा है। बताया कि उनका परिवार दशकों से कांवड़ तैयार करता है।
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मुरादाबाद में कांवड़ यात्रा मार्ग पर दुकानों पर नाम लिखने के विवाद से अनजान शहर के करूला मीना बाजार गली नंबर चार में रहने वाले इरशाद का परिवार इन दिनों कांवड़ बनाने में व्यस्त है। दशकों से इरशाद के परिवार की कांवड़ कांवड़ियों के कंधों पर सज रही है।
इस बार भी इरशाद को उम्मीद है कि 1000 से 1200 कांवड़ बिक जाएंगी। इरशाद ने कहा कि मुझे बस एक ही चिंता है कि मेरी दुकान पर आना वाला शिवभक्त खाली हाथ न लौटे। इरशाद को कांवड़ बनाने का हुनर विरासत में मिला। वे अपने पुरखों की पहचान को आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने अपने बेटे को भी इस काम में लगा दिया है। बेटा भी अब कांवड़ तैयार करने लगा है। सावन माह शुरू होते ही पूरा परिवार कांवड़ बनाने में जुट जाता है। हर साल 1000 से 1200 कांवड़ बनाकर बेचते हैं, जबकि महाशिवरात्रि पर 500 से 600 कांवड़ हरिद्वार में जाकर बेचते हैं। इसके अलावा अलग-अलग जगह से उन्हें ऑर्डर भी मिलते हैं।
हरिद्वार से मिलता है ऑर्डर
इरशाद ने बताया कि वह करूला मीना बाजार में ही अपने परिवार के साथ कांवड़ तैयार करते हैं। गुरहट्टी चौराहे पर उनकी दुकान है। सावन माह में इसी दुकान से कांवड़ बेचते हैं। सावन माह शुरू होने से पहले ही शिवभक्त उन्हें फोन पर ऑर्डर देना शुरू कर देते हैं। हर साल एक हजार से अधिक कांवड़ बेचते हैं।
60 साल से कांवड़ बना रहा परिवार
मो. इरशाद ने बताया कि उनका परिवार 60 साल से कांवड़ बना रहा है। उनके दादा अब्दुल गफूर अहमद ने कांवड़ बनाना शुरू किया था। दादा ने ताऊ बाबू को कांवड़ बनाने की बारीकियां सिखाईं। दादा के इंतकाल के बाद ताऊ ने उनकी परंपरा को आगे बढ़ाया।
ताऊ ने मेरे पिता निसार अहमद को कांवड़ बनाने का हुनर दिया। पिता निसार अहमद से मुझे विरासत में ये कला मिली। अब मेरा बेटा अरशान अहमद, बहन निशात अंजुम, पत्नी चांद परवीन मिलकर कांवड़ बना रहे हैं।
बाबू भाई कांवड़ वाले के नाम से थी ताऊ की पहचान
मो. इरशाद ने बताया कि मेरे ताऊ की पहचान बाबू भाई कांवड़ वाले के नाम से थी। 2012 में ताऊ का निधन हो गया था। उसके पांच साल बाद पिता निसार अहमद भी नहीं रहे है। तब से इरशाद अपने परिवार के साथ कांवड़ बना रहे हैं।