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20 साल से सांसद और विधायकों ने बसों में नहीं किया सफर
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मुरादाबाद। रोडवेज बसों में करीब 20 साल से सांसद और विधायकों ने सफर नहीं किया। मुरादाबाद और पीतलनगरी डिपो से कुल मिलाकर 280 बसें चलाई जाती हैं। सभी रोडवेज बसों में सांसद और विधायक के लिए सीटें आरक्षित हैं। हालांकि 2001 के बाद से किसी माननीय ने बसों से यात्रा करना मुनासिब नहीं समझा।
सांसद, विधायकों को परिवहन निगम के अलावा रेलवे और हवाई सफर के लिए भी विशेष पास उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके अलावा आजकल हर जनप्रतिनिधि के पास सरकारी गाड़ी (कार) है। ऐसें में वर्षों से माननीय आम जनता के बीच सफर करने से बचते आ रहे हैं। वहीं, वर्तमान में परिवहन निगम की बसों की खटारा हालत किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में लोगों का मानना है कि यदि वर्ष में एक या दो बार जनप्रतिनिधि आम जनता के बीच बसों में सफर करें, तो परिवहन निगम की बसों की हालत सुधर सकती है। ।
इनके लिए भी आरक्षित हैं सीटें
सांसद, विधायकों के अलावा रोजवेज बसों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लोकतंत्र रक्षक, मान्यता प्राप्त पत्रकार, दिव्यांग नागरिकों और महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित रहती हैं। आम तौर पर महिला या दिव्यांग नागरिकों को बसों में खड़े होकर सफर करते और उनकी आरक्षित सीटों पर अन्य लोगों को बैठे देखा जा सकता है। इसके विपरीत माननीयों की आरक्षित सीटों पर कोई आसानी से नहीं बैठता।
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पिछले बीस वर्षोें में हमारे रिकॉर्ड के मुताबिक मुरादाबाद क्षेत्र के किसी सांसद या विधायक ने परिवहन निगम की बसों में सफर नहीं किया। वर्ष 2001 से पहले सांसद, विधायकों की यात्रा से संबंधित कोई रिकॉर्ड परिवहन निगम के पास उपलब्ध नहीं है। माननीयों के सफर न करने की स्थिति में सामान्यत: आम लोग ही इन सीटों पर बैठकर यात्रा पूरी करते हैं।
- दीपक चौधरी, आरएम
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सांसद, विधायकों को परिवहन निगम के अलावा रेलवे और हवाई सफर के लिए भी विशेष पास उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके अलावा आजकल हर जनप्रतिनिधि के पास सरकारी गाड़ी (कार) है। ऐसें में वर्षों से माननीय आम जनता के बीच सफर करने से बचते आ रहे हैं। वहीं, वर्तमान में परिवहन निगम की बसों की खटारा हालत किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में लोगों का मानना है कि यदि वर्ष में एक या दो बार जनप्रतिनिधि आम जनता के बीच बसों में सफर करें, तो परिवहन निगम की बसों की हालत सुधर सकती है। ।
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इनके लिए भी आरक्षित हैं सीटें
सांसद, विधायकों के अलावा रोजवेज बसों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लोकतंत्र रक्षक, मान्यता प्राप्त पत्रकार, दिव्यांग नागरिकों और महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित रहती हैं। आम तौर पर महिला या दिव्यांग नागरिकों को बसों में खड़े होकर सफर करते और उनकी आरक्षित सीटों पर अन्य लोगों को बैठे देखा जा सकता है। इसके विपरीत माननीयों की आरक्षित सीटों पर कोई आसानी से नहीं बैठता।
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पिछले बीस वर्षोें में हमारे रिकॉर्ड के मुताबिक मुरादाबाद क्षेत्र के किसी सांसद या विधायक ने परिवहन निगम की बसों में सफर नहीं किया। वर्ष 2001 से पहले सांसद, विधायकों की यात्रा से संबंधित कोई रिकॉर्ड परिवहन निगम के पास उपलब्ध नहीं है। माननीयों के सफर न करने की स्थिति में सामान्यत: आम लोग ही इन सीटों पर बैठकर यात्रा पूरी करते हैं।
- दीपक चौधरी, आरएम