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मुरादाबाद दंगा: भीड़ ने पापा को साइकिल से उतारा और कर दिए थे चाकू से 32 वार, बताते हुए फफक पड़े परिजन

Wed, 09 Aug 2023 01:05 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Wed, 09 Aug 2023 01:05 PM IST
सार

नागफनी के दौलत निवासी इंद्र दास ने दंगे का दर्द बयां किया तो उनकी आंखों से आंसू छलक आए। आंसू पोछते हुए बोले, उस मंजर को कैसे भूल सकते हैं। दंगे ने मैंने अपना भाई प्रेम शंकर उर्फ डीजल को खो दिया था।

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Moradabad Riots: mob made father get off his bicycle and stabbed him 32 times with a knife
गलशहीद निवासी नंदकिशोर ने बताई दंगे से जुड़ी आपबीती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुरादाबाद के गलशहीद के भूड़े का चौराहा वाल्मीकि बस्ती निवासी नंदकिशोर ने बताया कि दंगे से कुछ दिन पहले ही दो समुदायों में टकराव शुरू हो गया था। 24 जुलाई 1980 को गलशहीद क्षेत्र में कुंदरकी के हाथीपुर गांव से बरात आई हुई थी। धर्मस्थल के सामने कुछ लोगों ने ढोल बजाने का विरोध किया था। इसके बाद दोनों समुदाय में टकराव हो गया था।

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इसी दौरान मैं अपने पापा बनवारी के साथ साइकिल से इंदिरा चौक जा रहा था। रास्ते में भीड़ ने हमें घेर लिया। मैं साइकिल पर डंडे पर बैठा हुआ था। लोगों ने बाइक से साइकिल रुकवा और उन्हें नीचे उतारकर चाकू से 32 वार किए थे। मैं किसी तरह अपनी जान बचाकर भागा और घर आकर परिजनों को जानकारी दी थी।
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पिता को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 13 अगस्त 1980 को दंगा हुआ था। मार्च 1981 को मेरे पिता की मौत हो गई थी। आज भी मैं उस मंजर को नहीं भूल पाया हूं। मैंने, मेरी बहन संतोष और भाई रोहित ने बहुत संघर्ष किया है।

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Moradabad Riots: mob made father get off his bicycle and stabbed him 32 times with a knife
दौलतबाग निवासी इंद्र दास ने दंग का दर्ज बयां किया - फोटो : अमर उजाला

दंगे में मैंने अपना भाई खोया, आज तक ताजा हैं जख्म

नागफनी के दौलत निवासी इंद्र दास ने दंगे का दर्द बयां किया तो उनकी आंखों से आंसू छलक आए। आंसू पोछते हुए बोले, उस मंजर को कैसे भूल सकते हैं। दंगे ने मैंने अपना भाई प्रेम शंकर उर्फ डीजल को खो दिया था। उस वक्त हमारा परिवार भूड़े के चौराहे पर रहता था।

हमारा भाई प्रेम शंकर दुकान से दूध लेने निकला था। रास्ते में भीड़ ने उसे घेर लिया और हमला कर दिया था। इस हमले में प्रेम शंकर की मौत हो गई थी। इसके बाद हमारा परिवार भूड़े के चौराहे से दौलत बाग आ गया था।

 

Moradabad Riots: mob made father get off his bicycle and stabbed him 32 times with a knife
मुरादाबाद दंगे (प्रतीकात्मक) - फोटो : सोशल मीडिया

पिता जी को ढूंढने अस्पताल पहुंचा तो लाश ही लाश थे

मुरादाबाद के ईदगाह दंगे के गवाह रहे नगर निगम कर्मचारी संघ के पूर्व महामंत्री सुभाष गुप्ता बताते हैं कि 13 अगस्त 1980 को ईदगाह के मेन गेट के सामने ही नगर निगम निगम की ओर से कैंप लगाया गया था। इस कैंप में मैं भी मौजूद था। नमाज के बाद एचएसबी इंटर कॉलेज की ओर से आवाज आई कि जानवर घुस आया और लोगों के कपड़े खराब हो गए।
 

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मुरादाबाद दंगे की गवाह रही ईदगाह - फोटो : अमर उजाला

इसके बाद लोग भड़क गए। अभी हम लोग कुछ समझ पाते कि पत्थर चलने लगे थे। गोलियों की आवाज आने लगीं। किसी तरह मैं वहां से निकलकर घर पहुंचा। घरवालों ने बताया कि पिता जी अभी घर नहीं आए हैं। इसके बाद मैं स्कूटर लेकर उन्हें ढूंढने निकला।

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मुरादाबाद में हुए दंगे के पीड़ितों को इंसाफ की उम्मीद - फोटो : सोशल मीडिया

उस वक्त सरकारी अस्पताल टाउनहॅाल के पास था। जहां लाशें ही लाशें थीं। बच्चों के शव कुचले हुए थे। डरते-डरते लाशोंं के बीच मैं पिता जी को तलाशता रहा। लेकिन वह नहीं मिले। किसी तरह हिम्मत करके ईदगाह की ओर बढ़ा।

लेकिन पुलिस ने आगे जाने से रोक लिया। रात दस बजे किसी तरह पिता जी घर पहुंचे। वह बदहवास थे। दूसरे दिन वह कुछ बोलने की स्थिति हुए तो उन्होंने बताया कि ईदगाह के पास एक घर में जनता सेवक समाज के चार लोगों के साथ छिप किसी तरह जान बचाई थी। 

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