फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Moradabad ranks among the five most polluted cities

मुरादाबाद देश के सबसे प्रदूषित पांच शहरों में शुमार : अनामिका

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 28 Oct 2023 02:08 AM IST
विज्ञापन
Moradabad ranks among the five most polluted cities
मुरादाबाद। मुरादाबाद शहर ई-वेस्ट रिसाइकिलिंग का हब बन गया है। इसकी वजह से देश के सबसे प्रदूषित पांच शहरों में मुरादाबाद भी शुमार है। इसका बड़ा कारण अप्रशिक्षित कारीगरों का ई-वेस्ट को अवैध तरीके से रिसाइकिलिंग करना है।
विज्ञापन

अवैध तरीके से रिसाइकिलिंग करने का मुख्य कारण मूल्यवान धातुओं जैसे-सोना, प्लेटिनम और कॉपर की ई-वेस्ट में उपलब्धता है। इसी लालच के चलते ये लोग अपने और शहर के लोगों के स्वास्थ्य के साथ शहर के पर्यावरण को भी प्रदूषित कर रहे हैं। ऐसे में हवा और पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है। ये कहना हिंदू कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. अनामिका त्रिपाठी का। वे तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के रसायन विज्ञान विभाग की ओर से हरित प्रौद्योगिकी-रिसर्च ट्रेंडस इन ग्रीन एसपेक्ट्स ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी 3.0 की राष्ट्रीय कार्यशाला में बतौर अतिथि वक्ता के रूप में बोल रहीं थीं।
विज्ञापन

कुलपति प्रो. रघुवीर सिंह ने कहा कि विभिन्न प्रकार की दवाइयों का निमार्ण सिद्ध करता है कि रसायन विज्ञान किसी वरदान से कम नहीं है, जबकि युद्ध में प्रयोग होने वाले रासायनिक हथियार बहुत ज्यादा घातक है। कुछ रसायनों से आज पर्यावरण बेहद दूषित हो गया है, जिसके भयावह परिणाम समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं के रूप में हमारे सामने आते हैं। मुख्य अतिथि रिसर्च टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्री मुरादाबाद के जनरल मैनेजर डॉ. आरके शर्मा ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण की वजह से पेयजल और मिट्टी में कैडमियम, मरकरी, आर्सेनिक, लेड, पॉलीक्लोरिनेटेड एंड पॉलीब्रोमिनेटेड डाई फिनाइल्स सरीखे खतरनाक तत्वों की मौजूदगी का बुरा प्रभाव मानव और वनस्पति दोनों पर है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इन हानिकारक तत्वों से श्वतंत्र तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने निर्यातकों से लेकर आम आदमी तक पर्यावरण प्रदूषण से बचाव के लिए सरकार की ओर से जारी दिशा निर्देश का सख्ती से पालन करने का सुझाव दिया। इस दौरान संयुक्त रजिस्ट्रार, रिसर्च डॉ. ज्योति पुरी, निदेशक प्रो. आरके द्विवेदी, डॉ. पंकज गोस्वामी, डॉ. गन्धर्व आदि मौजूद रहे। कार्यशाला के दूसरे सत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के शोधार्थियों की ओर से तीस शोध पत्र भी प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर कांफ्रेंस सोविनियर का विमोचन भी किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article