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प्रदूषण: मुरादाबाद तीन दिन से देश में नंबर वन, प्रदूषण की मार कब तक सहेंगे हम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 03 Feb 2021 03:02 AM IST
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moradabad on top in pollution
बारादरी क्षेत्र में भट्टी से निकलता धुआं। - फोटो : CITY
लगातार सुलग रही पीतल भट्ठियों और जलाए जा रहे ई कचरे ने मुरादाबाद में हाल बुरा कर दिया है। यहां का प्रदूषण स्तर लगातार तीन दिन से नंबर वन पर है। हैरत की बात यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी एमडीए के पाले में गेंद डाल रहे हैं तो एमडीए अधिकारी कह रहे हैं कि भट्ठियां बंद कराना हमारा काम नहीं है। इस मामले में जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने गंभीरता दिखाते हुए संबंधित विभागों को निर्देश देने की बात कही है।
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पीतल नगरी का वायु गुणवत्ता सूचकांक तीसरे दिन भी देश में सबसे अधिक 441 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। इसमें पीएम 2.5 और पीएम 10 की अधिकतम मात्रा पांच सौ और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की अधिकतम मात्रा 120 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रही। दूसरे स्थान पर दर्ज किए गए गाजियाबाद का एक्यूआई 398 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। सोमवार को मुरादाबाद का एक्यूआई 418 और रविवार को 426 के साथ भी देश में पहले स्थान पर था। हैरत की बात यह है कि इसके लिए विभागों के अधिकारी एक दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे हैं।
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी और मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारी कार्रवाई के नाम पर एक-दूसरे की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। अधिकारियों के इस ढुलमुल रवैये की वजह से शहर की गलियों में धड़ल्ले से अवैध पीतल भट्ठियों का संचालन हो रहा है। शहर के लालबाग, पीतलनगरी, बरबलान, गलशहीद, मुगलपुरा, नागफनी, करूला आदि क्षेत्रों में करीब चार हजार अवैध पीतल भट्ठियों का संचालन किया जा रहा है। तंग गलियों में यहां के लोग अपने घरों में इस कार्य को कर रहे हैं। परिजनों के अलावा ठेके पर और मजदूरों से पीतल गलाने का काम करवाया जा रहा है। पीतल गलाने के लिए इस्तेमाल होने वाली कोयले की भट्ठियों की गहराई तीन से चार फीट होती है। इसमें इतनी अधिक मात्रा में कोयले का इस्तेमाल किया जाता है कि तीन घंटे में ढाई सौ किलो ग्राम पीतल गलकर तरल पदार्थ के रूप में तब्दील हो जाती है। इसके अलावा ई कचरा भी जलाया जा रहा है।
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कैंसर का रहता है खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि ई-कचरा, अवैध पीतल भट्टियां और जाम यही प्रदूषण का मुख्य कारण है। इन गलियों में जाने के बाद स्वस्थ्य व्यक्ति को भी पांच मिनट में सिर दर्द की समस्या हो सकती है। सर्दियों में निगरानी कम हो पाती है, इसलिए रात में यहां के लोग अपने घरों में यही काम कर रहे हैं। भारी कण कार्सोजैनिक होते हैं, इसलिए इससे कैंसर होने की आशंका रहती है। फेफड़ों में संक्रमण का खतरा, त्वचा संक्रमण और आंखों में संक्रमण संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा शरीर पर सूजन की समस्या भी हो सकती है।
गत वर्ष लचर रही कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वर्ष 2019 में करीब 80 अवैध पीतल भट्ठियों को बंद कराने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन गत वर्ष अवैध पीतल भट्ठियों के खिलाफ कार्रवाई लचर रही है। अधिकारियों के अनुसार हम भट्ठियों को बंद कराते हैं, लेकिन बाद में फिर संचालित हो जाती हैं। जब तक भट्ठियों को बंद करने के लिए जनचेतना नहीं जागेगी, कार्रवाई का भी धरातल पर असर नजर नहीं आएगा।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी की गई प्रदूषित शहरों की सूची
शहर एक्यूआई
मुरादाबाद 441
गाजियाबाद 398
ग्रेटर नोएडा 367
नोएडा 370
दिल्ली 364
फरीदाबाद 361
नारनौल 355
भिवाड़ी 347
बहादुरगढ़ 346
लखनऊ 340
पश्चिमी जोन के शहरों की अपेक्षा मुरादाबाद में वायु प्रदूषण सौ एक्यूआई अधिक है। अमूमन इतना अधिक अंतर नहीं आता है। अचानक हो रही इस बढ़ोत्तरी के कारणों की जांच की जाएगी। करीब छह महीने में 70 से अधिक शिकायतें अवैध पीतल भट्ठियों के संचालन को रोकने के लिए आ चुकी हैं। इनके निस्तारण के लिए व आवासीय क्षेत्र में संचालित गैर आवासीय गतिविधियों (औद्योगिक) को रोकने के लिए मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को लगातार लिखा जा रहा है।
- विकास मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
प्रदूषण को नियंत्रण करने का कार्य प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी का है। यह एमडीए का काम नहीं है। हमारे द्वारा जारी होने वाले मैप में आर वन आवासीय होता है और आर टू जोन आवासीय होने के साथ कुछ ऐसे उद्योग संचालित करने की अनुमति देता है, जिसमें प्रदूषण न फैल रहा हो। यदि कोई उद्योग प्रदूषण फैला रहा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई का अधिकार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का है। सभी विभागों के एक्ट और जिम्मेदारी बंटी हुई है। यदि बोर्ड अधिकारी हमारी मदद चाहते हैं तो हमारे कर्मचारी उनके साथ जाएंगे, लेकिन कार्रवाई उन्हें ही करनी होगी। हम सिर्फ यह बता सकते हैं कि यह व्यावसायिक जोन है या आवासीय जोन है।

- सर्वेश गुप्ता, सचिव, मुरादाबाद विकास प्राधिकरण।
उद्योगों को प्रभावित किए बिना बंद कराएंगे अवैध भट्ठियां : डीएम
यह जिम्मेदारी क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की है तथा नगर निगम को भी इस पर काम करना होगा कि अवैध भट्ठियां न सुलगें। ई कचरा जलाने वालों तथा यहां इसके लाने वालों पर तो हाल ही में सख्त कार्रवाई हुई है। यहां प्रदूषण के मुख्यत: तीन कारण है। वाहन, फैक्टरियां और भट्ठियां। मैने टीम से यह दिखवा लिया है। शहर में कहीं भी बड़ा निर्माण नहीं हो रहा है। ऐसे में इन्हीं तीनों पर सख्ती करनी होगी। एक जुलाई 2020 से डीजल के पुराने वाहनों के पंजीकरण भी बंद कर दिए गए हैं। क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अवैध भट्ठियों के बंदी आदेशों को अमल में लाना होगा। हमारा उद्देश्य है कि उद्योगों को प्रभावित किए बिना यहां चल रही अवैध भट्ठियों को बंद कराया जाए। संबंधित विभागों की टीम को इस पर निर्देश दिए गए हैं
- राकेश कुमार सिंह, डीएम
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