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मुरादाबाद फिर सबसे प्रदूषित : कुछ नियमों की मार, कुछ हाकिम लाचार...कैसे कम हो प्रदूषण का वार
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मुरादाबाद। बारिश के बाद मौसम साफ हो गया है। सुबह के समय तेज हवाओं के संग चटख धूप भी खिली है। इसके बावजूद शनिवार सुबह मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक देश में सबसे अधिक 342 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण की यह स्थिति बहुत खराब श्रेणी में है। इसका प्रमुख कारण अवैध पीतल भट्ठियों का संचालन और ई-कचरा जलना है। कोयले के बजाय पीतल भट्ठियों को गैस से संचालित करने के नियम ऐसे हैं कि विभाग एनओसी नहीं दे सकता। दूसरा, इस समस्या के निस्तारण के लिए अधिकारी गंभीर भी कम नजर आ रहे हैं। यही कारण है कि इसके लिए सार्थक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इस लापरवाही का परिणाम यह है कि पिछले सात दिन से मुरादाबाद का प्रदूषण स्तर देश में नंबर एक पर बना हुआ है।
हालत खराब है। शहर का प्रदूषण गत सात दिनों से देश में पहले स्थान पर दर्ज किया जा रहा है। इसके कई कारण हैँ। पीतल भट्ठियां दिन रात सुलग रही हैं तो ई कचरा भी जलाया जा रहा है। ऐसे में हालात बेकाबू तो होंगे ही। पुराने शहर में पीरजादा, चक्कर की मिलक, बरबलान, लालबाग, दसवां घाट, पीतल नगरी, कटघर, करूला, गुड़िया बाग, नवाबपुरा आदि स्थानों पर अवैध पीतल भट्ठियां संचालित हैं।
परिवार की खातिर जहरीली सांस लेने को मजबूर
पीतल कारोबार से करीब चार लाख कारीगर जुड़े हुए हैं। इन भट्ठियों में पीतल गलाने के अलावा उत्पाद बनाने, जोड़ने, मेटल की छिलाई करने, फिनिशिंग करने और उत्पाद पर कलर करने का काम यहां होता है। कारीगर मोहम्मद गुलफाम, पक्का बाग निवासी मोहम्मद नदीम, मोहम्मद मोहसिन, इंद्रा चौक निवासी मोहम्मद साजिद पीतल की ढलाई, छिलाई आदि का काम करते हैं। इन कारीगरों ने बताया कि पीतल भट्ठियों की तपिश बहुत अधिक होती है। कड़ाके की सर्दी में काम करते समय पसीना आता है और गर्मियों में शरीर झुलसने लगता है। काम करते समय जहरीले धूआं की सांस लेते हैं। खांसी, टीबी, दमा, त्वचा संक्रमण आदि बीमारियां होती हैं, लेकिन परिवार के पालन पोषण की खातिर यह काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मोहल्ले में शिविर नहीं लग रहे हैं। आयुष्मान कार्ड नहीं बने हैं। उनका कहना है कि हम कतई नहीं चाहते कि पूरे क्षेत्र में एक भी कोयले की भट्ठी सुलगे पर इसके लिए उन्हें गैस की भट्ठियां लगाने की अनुमति एवं गैस लाइन तो देनी ही होगी।
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तारीख एक्यूआई देश में स्थान
छह फरवरी 342 पहला
पांच फरवरी 342 पहला
चार फरवरी 342 पहला
तीन फरवरी 400 पहला
दो फरवरी 441 पहला
एक फरवरी 418 पहला
31 जनवरी 426 पहला
मेरे कारखाने में पीतल गलाने से लेकर उत्पाद बनाने तक का काम होता है। गत वर्ष मैंने अपने स्तर से गैस की एक भट्ठी बनवाई थी। इसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को भी दिखाया था और उनसे पीतल भट्ठी संचालन के लिए एनओसी की मांग की थी, लेकिन उन्होंने एनओसी देने से इन्कार कर दिया। हम बहुत परेशान हैं। अब जिला प्रशासन को हमें आर्टिजन पार्क में सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए, भले ही इसके लिए हमसे किराया ले लें। कम से कम हमारे परिवार का भविष्य तो सुरक्षित होगा और शहर को जाम व प्रदूषण से निजात मिलेगी।
राशिद अली, पीरजादा।
हमारे कारखाने में पीतल गलाने के अलावा कैंडल स्टैंड, पीतल के दीये, कटोरे व सजावटी सामान बनता है। कोयला महंगा हो रहा है और इससे प्रदूषण की भी समस्या है। इसलिए हमारा कारोबार सुरक्षित करने के लिए जिला प्रशासन को हमें अधिकृत क्षेत्र कारखाना संचालन के लिए देना चाहिए। हमने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कोयले की भट्ठी के स्थान पर गैस की भट्ठी की मांग की थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। कोयले की भट्ठियों से स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचता है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से शिविर भी नहीं लगवाए जाते।
मोइन अंसारी, लाजपत नगर।
पीतल उद्योग से करीब चार लाख कारीगरों की रोजी-रोटी चल रही है। पीतल उद्योग के लिए वर्ष 2016 के अंत में रामगंगा नदी के किनारे आर्टिजन पार्क के नाम से जमीन पंजीकृत हुई थी, लेकिन वहां पर अभी उद्योग संचालित नहीं हो रहे हैं। स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत गैस पाइप लाइन बिछाई जा रही है, लेकिन पीतल कारखाने संचालकों को कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है। यदि गैस से भट्ठियां संचालित होंगी तो प्रदूषण का स्तर कम हो जाएगा। जिला प्रशासन की ओर से मोहल्लों में स्वास्थ्य शिविर भी नहीं लगते हैं। इसके अलावा कारीगरों के बच्चों की शिक्षा की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
गानिम मियां, चेयरमैन, फेयर ट्रेड प्राइमरी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन।
कोयले के बजाय पीतल भट्ठियों को गैस से संचालित करने के लिए पाइप गैस पाइप लाइन बिछवाई जा रही है। हम आवासीय क्षेत्र में पीतल भट्ठियों के संचालन की अनुमति नहीं दे सकते हैं। अभी यह मामला शासन स्तर पर लंबित है। हो सकता है कि कोई बीच का समाधान निकल आए।
विकास मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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हालत खराब है। शहर का प्रदूषण गत सात दिनों से देश में पहले स्थान पर दर्ज किया जा रहा है। इसके कई कारण हैँ। पीतल भट्ठियां दिन रात सुलग रही हैं तो ई कचरा भी जलाया जा रहा है। ऐसे में हालात बेकाबू तो होंगे ही। पुराने शहर में पीरजादा, चक्कर की मिलक, बरबलान, लालबाग, दसवां घाट, पीतल नगरी, कटघर, करूला, गुड़िया बाग, नवाबपुरा आदि स्थानों पर अवैध पीतल भट्ठियां संचालित हैं।
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परिवार की खातिर जहरीली सांस लेने को मजबूर
पीतल कारोबार से करीब चार लाख कारीगर जुड़े हुए हैं। इन भट्ठियों में पीतल गलाने के अलावा उत्पाद बनाने, जोड़ने, मेटल की छिलाई करने, फिनिशिंग करने और उत्पाद पर कलर करने का काम यहां होता है। कारीगर मोहम्मद गुलफाम, पक्का बाग निवासी मोहम्मद नदीम, मोहम्मद मोहसिन, इंद्रा चौक निवासी मोहम्मद साजिद पीतल की ढलाई, छिलाई आदि का काम करते हैं। इन कारीगरों ने बताया कि पीतल भट्ठियों की तपिश बहुत अधिक होती है। कड़ाके की सर्दी में काम करते समय पसीना आता है और गर्मियों में शरीर झुलसने लगता है। काम करते समय जहरीले धूआं की सांस लेते हैं। खांसी, टीबी, दमा, त्वचा संक्रमण आदि बीमारियां होती हैं, लेकिन परिवार के पालन पोषण की खातिर यह काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मोहल्ले में शिविर नहीं लग रहे हैं। आयुष्मान कार्ड नहीं बने हैं। उनका कहना है कि हम कतई नहीं चाहते कि पूरे क्षेत्र में एक भी कोयले की भट्ठी सुलगे पर इसके लिए उन्हें गैस की भट्ठियां लगाने की अनुमति एवं गैस लाइन तो देनी ही होगी।
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तारीख एक्यूआई देश में स्थान
छह फरवरी 342 पहला
पांच फरवरी 342 पहला
चार फरवरी 342 पहला
तीन फरवरी 400 पहला
दो फरवरी 441 पहला
एक फरवरी 418 पहला
31 जनवरी 426 पहला
मेरे कारखाने में पीतल गलाने से लेकर उत्पाद बनाने तक का काम होता है। गत वर्ष मैंने अपने स्तर से गैस की एक भट्ठी बनवाई थी। इसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को भी दिखाया था और उनसे पीतल भट्ठी संचालन के लिए एनओसी की मांग की थी, लेकिन उन्होंने एनओसी देने से इन्कार कर दिया। हम बहुत परेशान हैं। अब जिला प्रशासन को हमें आर्टिजन पार्क में सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए, भले ही इसके लिए हमसे किराया ले लें। कम से कम हमारे परिवार का भविष्य तो सुरक्षित होगा और शहर को जाम व प्रदूषण से निजात मिलेगी।
राशिद अली, पीरजादा।
हमारे कारखाने में पीतल गलाने के अलावा कैंडल स्टैंड, पीतल के दीये, कटोरे व सजावटी सामान बनता है। कोयला महंगा हो रहा है और इससे प्रदूषण की भी समस्या है। इसलिए हमारा कारोबार सुरक्षित करने के लिए जिला प्रशासन को हमें अधिकृत क्षेत्र कारखाना संचालन के लिए देना चाहिए। हमने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कोयले की भट्ठी के स्थान पर गैस की भट्ठी की मांग की थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। कोयले की भट्ठियों से स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचता है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से शिविर भी नहीं लगवाए जाते।
मोइन अंसारी, लाजपत नगर।
पीतल उद्योग से करीब चार लाख कारीगरों की रोजी-रोटी चल रही है। पीतल उद्योग के लिए वर्ष 2016 के अंत में रामगंगा नदी के किनारे आर्टिजन पार्क के नाम से जमीन पंजीकृत हुई थी, लेकिन वहां पर अभी उद्योग संचालित नहीं हो रहे हैं। स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत गैस पाइप लाइन बिछाई जा रही है, लेकिन पीतल कारखाने संचालकों को कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है। यदि गैस से भट्ठियां संचालित होंगी तो प्रदूषण का स्तर कम हो जाएगा। जिला प्रशासन की ओर से मोहल्लों में स्वास्थ्य शिविर भी नहीं लगते हैं। इसके अलावा कारीगरों के बच्चों की शिक्षा की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
गानिम मियां, चेयरमैन, फेयर ट्रेड प्राइमरी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन।
कोयले के बजाय पीतल भट्ठियों को गैस से संचालित करने के लिए पाइप गैस पाइप लाइन बिछवाई जा रही है। हम आवासीय क्षेत्र में पीतल भट्ठियों के संचालन की अनुमति नहीं दे सकते हैं। अभी यह मामला शासन स्तर पर लंबित है। हो सकता है कि कोई बीच का समाधान निकल आए।
विकास मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।