{"_id":"66e09e4958f78233e704f4c5","slug":"moradabad-lawyer-kept-cheating-the-captains-kept-collecting-rent-for-housing-for-19-years-with-fake-document-2024-09-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"वकील कप्तानों को लगाता रहा चूना: फर्जी कागजातों से 19 साल तक वसूलता रहा किराया, एसआईटी की रिपोर्ट में खुलासा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वकील कप्तानों को लगाता रहा चूना: फर्जी कागजातों से 19 साल तक वसूलता रहा किराया, एसआईटी की रिपोर्ट में खुलासा
Wed, 11 Sep 2024 03:50 PM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: विमल शर्मा
Updated Wed, 11 Sep 2024 03:50 PM IST
सार
मुरादाबाद एसएसपी आवास केस की जांच एसआईटी ने कमिश्नर को सौंप दी है। इसमें पता चला है कि आरोपी वकील 17 साल तक फर्जी कागजात के आधार पर पुलिस से किराया वसूलता रहा। जांच में खुलासा होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है।
विज्ञापन
मुरादाबाद एसएसपी आवास
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फर्जी कागजात के आधार पर जिले के पुलिस कप्तानों से अधिवक्ता 19 वर्षों तक एसएसपी आवास का किराया वसूलता रहा। लेकिन अपनी तैनाती के दौरान 32 कप्तान इस फर्जीवाड़े को नहीं पकड़ पाए। यह बात एसआईटी की जांच में सामने आई है।
विज्ञापन
एसआईटी के प्रमुख अपर आयुक्त सर्वेश गुप्ता ने एसएसपी आवास के मामले में अपनी रिपोर्ट कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह को सौंप दी है। कमिश्नर रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। जांच अधिकारियों ने माना कि 2003 में अधिवक्ता संजय धवन ने फर्जी कागजातों के आधार पर एसएसपी आवास पर अपना मालिकाना हक जताते हुए दावा ठोका था।
विज्ञापन
2019 में किराया बढ़ाने के लिए संजय ने अदालत में अर्जी दी। 2023 में आए तत्कालीन एसएसपी हेमराज मीणा ने पुलिसकर्मियों से कागजातों की जांच कराई। पुलिस को फर्जीवाड़े का मामला प्रकाश में आने पर एसएसपी ने सिविल लाइंस थाने में केस दर्ज कराया।
विज्ञापन
इसके बाद कमिश्नर ने इस मामले में एसआईटी की चार सदस्यीय टीम गठित कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। एसआईटी का प्रमुख अपर आयुक्त सर्वेश गुप्ता को बनाया गया था। इस टीम में शामिल एडीएम प्रशासन गुलाब चंद्र, एसडीएम सदर, नगर निगम के अपर आयुक्त ने नगर निगम और तहसील के पुराने रिकार्डों को खंगाला।
जांच में आया कि 2003 के पहले किसी ने एसएसपी आवास पर दावा नहीं किया था। एसएसपी आवास की जमीन राजस्व रिकार्ड में राजकीय नाम से दर्ज थी। मंडलायुक्त का कहना है कि इस बारे में अध्ययन किया जा रहा है।
जांच रिपोर्ट भी अदालत में एक आधार बनेगी। इधर पुलिस ने भी अभी अदालत में चार्जशीट दायर नहीं किया है। सिविल लाइंस पुलिस की विवेचना जारी है।