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Moradabad: रेलवे के भूमि पर बनी दुकानों को तोड़ने पहुंचा बुलडोजर, दुकानदारों के समर्थन में पहुंचे भाजपा विधायक

Fri, 26 Dec 2025 03:33 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 26 Dec 2025 03:33 PM IST
सार

रेलवे की जमीन पर बनी दुकानों को हटाने पहुंची टीम का कारोबारियों ने विरोध किया। रेलवे ने दुकानों पर लाल निशान लगाकर कुछ दिन की मोहलत दी थी। शहर विधायक रितेश गुप्ता भी माैके पर पहुंचे। 

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Moradabad: bulldozer arrived demolish shops built on railway land; BJP MLA arrived support shopkeepers
मुरादाबाद में अतिक्रमण हटाने का विरोध - फोटो : संवाद

विस्तार

रेलवे की जमीन पर बनीं दुकानों को खाली कराने के विरोध में शुक्रवार को स्टेशन रोड पर चार घंटे खींचतान चली। रेलवे की इंजीनियरिंग टीम और आरपीएफ दुकानें खाली कराने पहुंची तो नगर विधायक रितेश गुप्ता व्यापारियों के समर्थन में उतर आए और कहा कि पहले प्रशासन इनकी अजीविका की व्यवस्था करे।

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सीओ कटघर, सिटी मजिस्ट्रेट और कटघर व कोतवाली थाने की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। नगर विधायक का साथ मिला तो व्यापारियों का हौसला बढ़ गया। सभी मिलकर रेलवे के मंडल कार्यालय पहुंचे और डीआरएम संग्रह मौर्य से मुलाकात की। विधायक ने व्यापारियों का पक्ष रखा कि 1971 से दुकानें स्थापित हैं।
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दुकानें खाली कराई गईं तो व्यापारी कहां जाएंगे। पहले प्रशासन इन दुकानदारों को दूसरे स्थान पर जमीन उपलब्ध कराए। उसके बाद दुकानों को हटाने की कार्रवाई की जाए। डीआरएम ने कहा कि दुकानें खाली करने के लिए ज्यादा समय नहीं दिया जा सकता। जमीन खाली करनी ही होगी। रेल प्रशासन से असहमति जताते हुए विधायक और व्यापारी वहां से लौट आए।
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रेलवे की टीम और दुकानों के बीच व्यापारी और विधायक सड़क पर खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की लाठियां खाएंगे लेकिन व्यापारियों की अजीविका नहीं खोने देंगे। खींचतान के बीच वहां से गुजर रहे वाहनों को जाम का सामना करना पड़ा।


तीन दिन का अल्टीमेटम देकर चली गई रेलवे की टीम
जनप्रतिनिधि का समर्थन और व्यापारियों का विरोध देख रेलवे की टीम ने अपने अधिकारियों से संपर्क साधा। मुख्यालय से मिले निर्देशों के आधार पर टीम तीन दिन का अल्टीमेटम देकर चली गई। आरपीएफ ने घोषणा की है कि जिन 85 दुकानों पर लाल निशान लगाए गए हैं, उन्हें तीन दिन के भीतर खाली कर दिया जाए। अन्यथा रेलवे अपनी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए कार्रवाई करेगा। वहीं व्यापारियों ने कहा कि 50 साल से चल रहे व्यापार को हटाने के लिए तीन दिन का समय कम है, व्यापारी कहां जाएंगे।

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