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विरासत में मिला हुनर: पद्मश्री दिलशाद बोले- 12 घंटे दिल में दबाई सबसे बड़ी खुशी, खेल-खेल में सीखी दस्तकारी

Thu, 26 Jan 2023 05:16 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Thu, 26 Jan 2023 05:16 PM IST
सार

दिलशाद सिर्फ  दस्तकारी के हुनरमंद नहीं हैं, बल्कि वह सोने के जेवर बनाने की डाई भी बनाते हैं। वैसे तो देश के अनेक स्थानों पर उनके द्वारा तैयार डाई पसंद की जाती है, लेकिन सबसे अधिक राजस्थान के नाथद्वार और उदयपुर के व्यापारी ले जाते हैं।

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moradabad brass craftsman dilshad received padma shri award
पद्मश्री मुरादाबाद के दिलशाद। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पीतलनगरी में उनकी दस्तकारी से तैयार पीतल के जार, मटका, कलश और फूलदान का सिर्फ देश ही नहीं विदेश में भी डंका बज चुका है। जहां कहीं भी वह अपने उत्पादों का स्टाल लगाते हैं, वहां हर किसी की आंखें ठहर जाती हैं। यह हैं मुरादाबाद के दिलशाद हुसैन, जिनका नाम पद्मश्री अवार्ड की सूची में शामिल हुआ है। उनको दस्तकारी का हुनर विरासत में मिला है। अब पद्मश्री सम्मान मिला तो खुशी को 12 घंटे तक दिल में दबाए रहे। कहते हैं कि यह जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी थी, पर हालात ही ऐसे थे। 

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दिल्ली से बताया गया कि चयन हुआ है, पर सूची बाद में जारी होगी
शहर में कैथवाली मस्जिद के निकट रहने वाले दिलशाद ने बताया कि बुधवार सुबह नमाज पढ़ कर बिस्तर पर आराम कर रहे थे। इसी बीच दिल्ली से उनके पास फोन आया। फोन करने वाले अधिकारी ने बताया था कि उनका नाम पद्मश्री अवार्ड के लिए चुना गया है लेकिन वह अभी इसकी किसी से चर्चा नहीं करेंगे। रात आठ बजे के आसपास उन्हें इसकी सूची भेजी जाएगी। लिहाजा उन्होंने इसका किसी से जिक्र नहीं किया। यहां तक कि बच्चों को भी इसके बारे में कुछ नहीं बताया। 
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छह साल की उम्र से सीखा दस्तकारी 
वह बताते हैं कि बच्चों से इतना जरूर कहा कि, रात में बड़ी खुशखबरी मिलेगी। शाम को घर में हलवा बनाकर मोहल्ले में बांट देना। बोले, 12 घंटे बाद रात में आई कॉल ने सबसे बड़ी खुशी दी तो बच्चों को बताया। पद्मश्री की बात सुनकर परिवार के सभी सदस्य उछल पड़े। कहते हैं कि, छह साल की उम्र से ही दादा अब्दुल हमीद के साथ बैठ कर खेल-खेल में हुनर का गुर सीखा। बाद में चाचा कल्लू अंसार के साथ काम कर दस्तकारी की बारीकी को समझने के बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 
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परिवार का हर सदस्य कलाकार
दिलशाद के पांच बेटे और चार बेटियां हैं। उनकी दो बड़ी बेटियां उजमा खातून और तैयबा, पुत्र वधू चमन जहां, बेटे शहजाद अली और अरशद अली के साथ पत्नी रुखसाना बेगम कला के दम पर स्टेट अवार्ड प्राप्त कर चुके हैं। उनकी पत्नी रुखसाना का छह साल पहले निधन हो चुका है। शेष बेट-बेटियों की उम्र अभी कम है लेकिन वह सब भी हस्तशिल्पकार हैं।


शिल्पगुरु समेत पहले मिल चुके कई अवार्ड

  • 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा पहला स्टेट अवार्ड दिया गया।
  • 2012 में नेशनल अवार्ड केंद्र सरकार की ओर से दिया गया।
  • 2017 में शिल्पगुरु अवार्ड के लिए नाम घोषित किया गया। जो 29 नवंबर 2022 को उपराष्ट्रपति के हाथों प्रदान किया गया।
  • 25 जनवरी 2023 को सरकार की ओर से पद्मश्री अवार्ड के लिए चुना गया।

मोदी को भा चुका है दिलशाद का मटका
दिलशाद ने लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में स्टाल लगाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर भी दिलशाद के स्टाल पर जा टिकी उनके द्वारा दस्तकारी के माध्यम से तैयार पीतल के मटके को प्रधानमंत्री ने मंगवाया था। पिछले दिनों जब पीएम जर्मन की यात्रा पर गए थे तो वहां वह दिलशाद का मटका ले गए थे। जिसे उन्होंने वहां भेंट किया था।

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