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सेहत बिगाड़ रहा बोतल का दूध.. हर माह 1600 बच्चे कुपोषित, पैदा होने वाले हर चाैथे नवजात का वजन 2.5 किलो से कम

Mon, 18 Aug 2025 12:07 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Mon, 18 Aug 2025 12:07 PM IST
सार

मुरादाबाद जिले में कुपोषण की स्थिति चिंताजनक है। हर महीने औसतन 1600 बच्चे कुपोषण से पीड़ित पाए जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण बच्चों को पर्याप्त मां का दूध न मिलना और बोतल के दूध पर ज्यादा निर्भरता, सिजेरियन डिलीवरी और स्तनपान से बचने की प्रवृत्ति सामने आई है।  

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Moradabad: Bottle milk is ruining health.. 1600 children are malnourished every month
पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आधुनिक युग के अधिकांश बच्चों को पर्याप्त मात्रा में मां का दूध और देसी माखन नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि बोतल का दूध पीने से उन्हें ठीक से पोषण नहीं मिल रहा है। हालात यह है कि जिले में हर महीने 1600 बच्चे कुपोषण से पीड़ित मिल रहे हैं। यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग का है।

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मां का दूध न मिलने की वजह सिजेरियन डिलीवरी और बच्चे को स्तनपान कराने से बचने की आदत है। तमाम बच्चे ऐसे भी हैं, जो विभाग के सर्वे में नहीं आए हैं। गर्भावस्था में महिला को सही खानपान और जन्म के बाद बच्चे को मां का दूध न मिलने से यह समस्या हो रही है।
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महिला अस्पताल का पिछले तीन माह का आंकड़ा कहता है कि यहां पैदा होने वाले हर चौथे नवजात का वजन 2.5 किलो से कम है। जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले हर दूसरे बच्चे का वजन उम्र के सापेक्ष कम है। शहर में कुपोषित बच्चों का आंकड़ा देहात क्षेत्रों से दोगुना है।
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यहां सबसे ज्यादा 454 बच्चे जुलाई 2025 में कुपोषित मिले हैं। इसके बाद बिलारी 220 बच्चों की संख्या के साथ दूसरे स्थान पर है। यह आंकड़ा शून्य से छह साल तक के बच्चों का है। प्रशासनिक अधिकारियों व स्वास्थ्य विभाग के लिए यह बड़ी चिंता है लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं मिल पा रहा है।

डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों को प्रोटीन, आयरन युक्त आहार न मिलना इसका बड़ा कारण है। आयरन की कमी वाले औसतन दो बच्चे हर दिन अस्पताल में आ रहे हैं। इन्हें चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर ब्लड चढ़ाना पड़ता है।

मोटापा भी कुपोषण का कारण, इनका कोई सर्वे नहीं
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके दत्त और डॉ. शलभ अग्रवाल का कहना है कि पिछले आठ वर्षों में कुपोषण का ग्राफ बदला है। अंडर वेट वाले बच्चे कम हुए हैं। ज्यादा वजन वाले बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ी है। यह बच्चे भी कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। जंक फूड खाने व शारीरिक गतिविधि न होने के कारण इनमें शुगर की समस्या उत्पन्न हो गई है।

एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मो. रजी की ओपीडी में ऐसे केस आए हैं, जिनमें 12 साल के बच्चे का वजन 90 किलो है। बाल विकास विभाग ऐसे बच्चों का कोई सर्वे नहीं करता, जबकि जिलाधिकारी भी बैठक में कई बार इस विषय पर चर्चा कर चुके हैं।

क्षेत्र (ब्लॉक/शहर) कुपोषित बच्चों की संख्या
मुरादाबाद शहर 454
बिलारी 220
कुंदरकी 199
मुरादाबाद देहात 164
डिलारी 158
छजलैट 138
मूंढापांडे 130
भगतपुर टांडा 96
ठाकुरद्वारा 89

नोट: यह आंकड़ा जुलाई 2025 का है।

कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र हैं। सभी 10 बेड फुल हैं। हर दिन औसतन दो बच्चे यहां भर्ती करने पड़ते हैं। 14 दिन तक इन्हें प्रोटीन व आयरन युक्त आहार दिया जाता है। इसके बाद हर 15 दिन में फॉलोअप के लिए बुलाते हैं। -डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्साधीक्षक 

वर्तमान में अंडरवेट और ओवरवेट दोनों बच्चों की संख्या लगभग समान है। दोनों की चिंता अनिवार्य है। अंडरवेट वालों को अच्छा आहार देकर पोषित किया जा सकता है। ओवरवेट वाले बच्चों को मोबाइल, जंक फूड से दूरी बनानी होगी। भविष्य में शुगर, बीपी, हृदय रोगों का खतरा है। - डॉ. शलभ अग्रवाल, बाल रोग विशेषज्ञ

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