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चार सौ के पार पहुंचा प्रदूषण, गैसों के संग सांसों पर संकट बन सकते हैं भारी कण
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मुरादाबाद के तहसील स्कूल क्षेत्र में भटटी से निकलता धुआं।
- फोटो : CITY
मुरादाबाद। शहर में बढ़ता प्रदूषण का स्तर डराने लगा है। अब शहरवासियों को मुस्कराने की नहीं, बल्कि संभल जाने की जरूरत है, क्योंकि शहर का वायु प्रदूषण गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है। इसमें भारी कणों के संग गैसों के स्तर में भी बढ़ोतरी हुई है। बुधवार सुबह सात बजे मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 418 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। हालांकि शाम छह बजे मुरादाबाद का एक्यूआई 325 पर आ गया।
मुरादाबाद का वायु प्रदूषण प्रशासनिक अधिकारियों के उन दावों को हवा कर रहा है, जिसमें वह प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कहते हैं। यदि अवैध पीतल भट्ठियों और ई-कचरे से निकलने वाले काले धुएं से इसी तरह शहर का वातावरण जहरीला होता रहा तो इसमें सांस लेना मुश्किल हो सकता है। चिकित्सकों के अनुसार प्रदूषण की बढ़ोतरी से हृदय रोगियों में सांस फूलने की समस्या आ रही है। साथ ही कोरोना संक्रमण के समय जिन लोगों को निमोनिया हुआ था, उनके फेफड़ों में फाइब्रोसिस होने के भी मामले आए हैं। मुरादाबाद में पिछले चार दिन से प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही है। मंगलवार सुबह सात बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 418 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। इसमें पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर पांच सौ, न्यूनतम 324 और औसत 418 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर था। पीएम 10 का अधिकतम स्तर पांच सौ, न्यूनतम 197 और औसत 366 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। तीन दिन लाल निशान पर रहने के बाद बुधवार को एक्यूआई मैरून निशान पर पहुंच गया।
अधिकतम 238 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रही नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड
प्रदूषण के स्तर में नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड में मानक से पांच गुना अधिक बढ़ोतरी हुई है। 24 घंटे में नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का अधिकतम स्तर 50 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए, लेकिन मंगलवार को गैस की वातावरण में अधिकतम उपलब्धता 238 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर हो गई। औसत भी तीन गुना से अधिक 159 और न्यूनतम 12 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रही।
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मानक से 48 गुना अधिक रही कार्बन मोनो ऑक्साइड
शोधार्थी अतुल कुमार चौहान का कहना है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर प्रत्येक घंटे में आंकड़े बदलते हैं। वातावरण में कार्बन मोनो ऑक्साइड एक घंटे में चार मिली ग्राम प्रति घन मीटर होनी चाहिए। वायु गुणवत्ता सूचकांक में कार्बन मोनो ऑक्साइड की अधिकतम मात्रा 192 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, औसत 143 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर और न्यूनतम 106 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
गलियों में धधक रहीं अवैध पीतल भट्ठियां
शहर की तंग गलियों में पीतल गलाने का काम अवैध रूप से होता है। दिन में अधिकारी निरीक्षण पर रहते हैं, इसलिए अब यह काम रात के अंधेरे में होने लगा है। रामगंगा नदी के किनारे और भोजपुर के कुछ क्षेत्रों में ई-कचरा भी जलाया जाता है। इसकी वजह से सुबह के समय वायु गुणवत्ता सूचकांक में बढ़ोतरी होती है।
वर्जन...
कोरोना संक्रमण की वजह से जिन मरीजों में निमोनिया हुआ था, उनमें फेफड़ों का फाइब्रोसिस उत्पन्न होता है। दमा और सीओपीडी की बीमारी के मरीज बढ़ रहे है। प्रदूषण में बढ़ोतरी होने से हृदय रोगियों की सांस फूलती है। कोरोना काल में प्रदूषण से उनकी हालात और खराब होगी।
डॉ. प्रवीण शाह, वरिष्ठ फिजिशियन।
हवा में गति नहीं है। वातावरण में धुंध नहीं, कोहरा है। इसलिए प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। प्रदूषण को कम करने के लिए जो उपाय किए जाने चाहिए, सब किए जा रहे हैं। सौ किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी जनपदों का प्रदूषण स्तर बढ़ा है। इसमें मेरठ और मुजफ्फनगर भी शामिल हैं। दो-तीन दिन में हवा की गति बढ़ते ही प्रदूषण का स्तर कम हो जाएगा।
विकास मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
शहर एक्यूआई
गाजियाबाद 418
बुलंदशहर 417
कानपुर 416
ग्रेटर नोएडा 404
नोएडा 390
मुजफ्फरनगर 382
लखनऊ 378
दिल्ली 370
यमुना नगर 366
मेरठ 365
बागपत 361
जींद 358
फतेहाबाद 352
कुरुक्षेत्र 344
आगरा 341
पानीपत 336
सिंगरौली 330
फरीदाबाद 329
मुरादाबाद 325
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मुरादाबाद का वायु प्रदूषण प्रशासनिक अधिकारियों के उन दावों को हवा कर रहा है, जिसमें वह प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कहते हैं। यदि अवैध पीतल भट्ठियों और ई-कचरे से निकलने वाले काले धुएं से इसी तरह शहर का वातावरण जहरीला होता रहा तो इसमें सांस लेना मुश्किल हो सकता है। चिकित्सकों के अनुसार प्रदूषण की बढ़ोतरी से हृदय रोगियों में सांस फूलने की समस्या आ रही है। साथ ही कोरोना संक्रमण के समय जिन लोगों को निमोनिया हुआ था, उनके फेफड़ों में फाइब्रोसिस होने के भी मामले आए हैं। मुरादाबाद में पिछले चार दिन से प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही है। मंगलवार सुबह सात बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 418 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। इसमें पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर पांच सौ, न्यूनतम 324 और औसत 418 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर था। पीएम 10 का अधिकतम स्तर पांच सौ, न्यूनतम 197 और औसत 366 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। तीन दिन लाल निशान पर रहने के बाद बुधवार को एक्यूआई मैरून निशान पर पहुंच गया।
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अधिकतम 238 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रही नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड
प्रदूषण के स्तर में नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड में मानक से पांच गुना अधिक बढ़ोतरी हुई है। 24 घंटे में नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का अधिकतम स्तर 50 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए, लेकिन मंगलवार को गैस की वातावरण में अधिकतम उपलब्धता 238 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर हो गई। औसत भी तीन गुना से अधिक 159 और न्यूनतम 12 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रही।
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मानक से 48 गुना अधिक रही कार्बन मोनो ऑक्साइड
शोधार्थी अतुल कुमार चौहान का कहना है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर प्रत्येक घंटे में आंकड़े बदलते हैं। वातावरण में कार्बन मोनो ऑक्साइड एक घंटे में चार मिली ग्राम प्रति घन मीटर होनी चाहिए। वायु गुणवत्ता सूचकांक में कार्बन मोनो ऑक्साइड की अधिकतम मात्रा 192 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, औसत 143 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर और न्यूनतम 106 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।
गलियों में धधक रहीं अवैध पीतल भट्ठियां
शहर की तंग गलियों में पीतल गलाने का काम अवैध रूप से होता है। दिन में अधिकारी निरीक्षण पर रहते हैं, इसलिए अब यह काम रात के अंधेरे में होने लगा है। रामगंगा नदी के किनारे और भोजपुर के कुछ क्षेत्रों में ई-कचरा भी जलाया जाता है। इसकी वजह से सुबह के समय वायु गुणवत्ता सूचकांक में बढ़ोतरी होती है।
वर्जन...
कोरोना संक्रमण की वजह से जिन मरीजों में निमोनिया हुआ था, उनमें फेफड़ों का फाइब्रोसिस उत्पन्न होता है। दमा और सीओपीडी की बीमारी के मरीज बढ़ रहे है। प्रदूषण में बढ़ोतरी होने से हृदय रोगियों की सांस फूलती है। कोरोना काल में प्रदूषण से उनकी हालात और खराब होगी।
डॉ. प्रवीण शाह, वरिष्ठ फिजिशियन।
हवा में गति नहीं है। वातावरण में धुंध नहीं, कोहरा है। इसलिए प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। प्रदूषण को कम करने के लिए जो उपाय किए जाने चाहिए, सब किए जा रहे हैं। सौ किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी जनपदों का प्रदूषण स्तर बढ़ा है। इसमें मेरठ और मुजफ्फनगर भी शामिल हैं। दो-तीन दिन में हवा की गति बढ़ते ही प्रदूषण का स्तर कम हो जाएगा।
विकास मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
शहर एक्यूआई
गाजियाबाद 418
बुलंदशहर 417
कानपुर 416
ग्रेटर नोएडा 404
नोएडा 390
मुजफ्फरनगर 382
लखनऊ 378
दिल्ली 370
यमुना नगर 366
मेरठ 365
बागपत 361
जींद 358
फतेहाबाद 352
कुरुक्षेत्र 344
आगरा 341
पानीपत 336
सिंगरौली 330
फरीदाबाद 329
मुरादाबाद 325