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Moradabad: बैंकों में 16 करोड़ रुपये डालकर भूल गए खातेदार, 73 हजार ग्राहक दस साल से नहीं पहुंचे बैंक

Thu, 02 May 2024 06:35 PM IST
विमल शर्मा साैरभ यादव, मुरादाबाद
साैरभ यादव, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 02 May 2024 06:35 PM IST
सार

मुरादाबाद जिले के 73299 खातों को बैंकों ने निष्क्रिय कर दिया है। पिछले दस साल से खाताधारकों ने खाते की सुध नहीं ली है। अब बैंकों ने खाते की राशि डेफ खाते में डाल दी है। 

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Moradabad: Account holders forgot depositing Rs 16 crore in banks, 73 thousand customers not reach bank
भारतीय स्टेट बैंक - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

मुरादाबाद जिले के सभी 34 बैंकों में 73299 खाता धारकों ने पिछले दस साल से अपने खातों की सुध नहीं ली है। जिससे बैंकों ने खाते की राशि डेफ खाते में डाल दी। अब यह रकम आरबीआई को स्थानांतरित की जाएगी।

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इसके बाद ग्राहकों को पैसे निकाले में लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। ग्राहक खाता खुलवाने के बाद उसमें जमा राशि भूल गए और कुछ खाता धारकों की मृत्यु हो गई। इन्हीं खातों के रुपये का कोई लेनदार नहीं है।
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बैंकों के अनुसार 73299 खाते में दो साल तक कोई लेन-देन नहीं हुए तो इन्हें निष्कि्रय कर दिया गया। इसके बावजूद ग्राहक आठ साल तक खातों की सुध नहीं ली। इसके बाद बैंकों ने ग्राहकों से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन कोई भी प्रतिक्रिया नहीं मिली।
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आरबीआई के नियम अनुसार कोई ग्राहक दस साल तक खातों की जानकारी नहीं लेता है तो खाते में जमा राशि डेफ खाते में स्थानांतरित कर दी जाती है। वहीं बैंक लगभग 73 हजार खातों की राशि 15.92 करोड़ रुपये आरबीआई को भेजेगा।

बैंक खातों में सरकारी योजनाओं के सबसे अधिक रुपये हैं। बहुत से खाताधारक सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अलग से खाते खुलवाए। इनमें रुपये तो आ गए, लेकिन ग्राहक दोबारा खाते की सुध लेने नहीं गए।

बैंक अधिकारी ने बताया कि सरकारी विभाग में विकास कार्य के लिए अलग से खाता खुलवाया जाते हैं। इसके बाद काम खत्म हो जाने के बाद विभाग के खाते में थोड़े रुपये बच जाते हैं। इसके बाद खातों की निगरानी नहीं का जाती है तो इनके रुपये डेफ फंड में हैं।

वहीं कुछ ग्राहकों की मृत्यु हो गई और उनके परिजन पैसे नहीं निकाले है। जिनके खाते के रुपये को डेफ खाते में डाल दिया गया।

क्या होता है डेफ खाता

डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड को डेफ खाता बोलते हैं। यह खाता बैंकों का होता है। जिसमें लावारिस खातों की राशि जमा की जाती है। बैंकों में जाकर ग्राहक दस साल तक खातों की सुध नहीं लेता है तो जमा राशि को डेफ फंड में डाल दिया जाता है। जिसे कागजी प्रकिया पूरी करने पर ब्याज के साथ में रुपये वापस मिल जाते हैं।  

यह 16 बैंकों के हैं रुपये

इसमें एसबीआई, पंजाब नेशनल, केनरा, बैंक ऑफ बड़ौदा, इलाहाबाद आदि बैंकों को मिलाकर 16 बैंक में 15.92 करोड़ रुपये डेफ खाते में हैं। जिसमें सबसे अधिक प्रथमा बैंक के 6.92 करोड़ रुपये हैं। एसबीआई में 2.89 करोड़ रुपये हैं। वहीं पंजाब नेशनल में 1.30 करोड़ रुपये हैं। बाकी के 13 बैंकों में 4.70 करोड़ रुपये हैं।

ऐसे मिलेंगे डेफ के रुपये

डेफ खाते की धन राशि ग्राहकों को एक सप्ताह में मिल जाएंगी। इसके लिए उन्हें जिस शाखा खाता है। उसमें जाने होगा। इसके बाद साबूत के साथ में रुपये पर क्लेम करना होगा। वहीं ग्राहक के पास सभी कागजात पूरे होने चाहिए। इसके बाद एक फार्म भरना होगा। बैंक आरबीआई को पैसे वापसी का रिक्वेस्ट भेजकर एक सप्ताह में रुपये ग्राहक के खाते में ट्रांसफर कर देगी।



बैंकों ने ग्राहकों से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन किसी ग्राहक से प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद बैंक खाताधारक के पते पर नोटिस भेजा। इसके बाद भी कोई रुपयों पर हक जताने नहीं आया तो खाते की धनराशि को डेफ खाते में डाल दिया गया। -विशाल दीक्षित, एलडीएम

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