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Moradabad: जिले के 265 स्कूलों ने बसों की नहीं कराई फिटनेस जांच, आरटीओ ने भेजा नोटिस..कहा- होगी कार्रवाई

Fri, 28 Jun 2024 01:48 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 28 Jun 2024 01:48 PM IST
सार

मुरादाबाद जिले में एक जुलाई से लगभग सभी स्कूल खुल जाएंगे। अभी तक जिले में चल रहे प्राइवेट स्कूलों में से 265 संचालकों ने बसों की फिटनेस जांच नहीं करवाई है। उन्हें आरटीओ की तरफ से नोटिस भेज दिया गया है। जिले में कुल 880 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। 

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Moradabad: 265 schools in the district did not get their buses fitness tested, RTO sent notice
स्कूल बस की जांच करती पुलिस (FILE) - फोटो : संवाद

विस्तार

मुरादाबाद में गर्मी की छुट्टी के बाद एक जुलाई से सभी स्कूल खुल जाएंगे। लेकिन अभी तक जिले के निजी स्कूल संचालकों ने 265 बसों की फिटनेस जांच नहीं कराई। ऐसे में बच्चों की जान जोखिम में डालकर बिना फिटनेस के बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। मुरादाबाद जिले में 5000 अनफिट वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं।

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जिसमें 268 स्कूली वाहन शामिल हैं। स्कूल खुलने में तीन दिन शेष बचे हैं। लेकिन संचालकों ने अभी तक स्कूली बसों का फिटनेस नहीं कराया है। ये वाहन किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं। परिवहन विभाग के अनुसार स्कूली वाहनों को 24 मानकों को पूरा करना पड़ता है।
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जिस पर खरा उतरने के बाद ही फिटनेस सर्टिफिकेट मिलता है। परिवहन विभाग के अनुसार स्कूलों में तीन तरह के वाहन चलाए जाने की अनुमति मिलती हैं। जिसमें स्कूल के नाम से वाहन, कैब और ठेका परमिट की बस शामिल है।
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इसके अलावा स्कूल में चलाने के लिए किसी तरह के वाहन को परमिट नहीं जारी किया जाता है। मुरादाबाद जिले में कुल 880 स्कूली वाहन हैं, जिसमें 502 बसें और 350 से अधिक कैब शामिल हैं।

वाहनों की फिटनेस प्रक्रिया
नए काॅमर्शियल वाहनों का फिटनेस आठ साल तक दो साल के लिए और आठ साल के बाद एक साल के लिए होता है। फिटनेस के लिए परिवहन विभाग में फीस जमा कराकर जांच कराने की तारीख ली जाती है। वाहनों के फिटनेस के लिए टायर, शीशे, खिड़की, लाइट, कैमरा आदि को दुरूस्त कर परिवहन विभाग कार्यालय में ले जाया जाता है। वहां परिवहन विभाग के अधिकारी जांच कर फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करते हैं।

ई-रिक्शा है प्रतिबंधित
परिवहन विभाग के अनुसार ई-रिक्शा पूर्णतया प्रतिबंधित हैं। क्योंकि ई-रिक्शा पूरी तरह से खुला होता है। ई-रिक्शा द्वारा  स्कूली मानकों का पालन नहीं किया जाता है। अगर ई-रिक्शा से स्कूली बच्चों को ले जाया जाता है, तो दुर्घटना होने की संभावना हमेशा बनी रहेगी।

जिन वाहनों का फिटनेस खत्म हो चुका है। उनके लिए नोटिस जारी कर दी गई है। स्कूली वाहनों की जांच के लिए जुलाई महीने में अभियान चलाया जाएगा। अगर ये वाहन सड़कों पर पाए गए, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -आंजनेय सिंह,        एआरटीओ (प्रशासन)

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