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Moradabad News: मोहन का सत्रह दिन बाद भी पता नहीं लग सका
Tue, 04 Nov 2025 02:08 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Tue, 04 Nov 2025 02:08 AM IST
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कांठ। कस्बे के नवादड़ी से लापता डेढ़ साल के मोहन का सत्रह दिन बाद भी पता नहीं लग सका। बच्चे की खोजबीन में जुटे परिवार का कामधंधा भी चाैपट हो गया है, जिससे उसके सामने आर्थिक संकट आ गया और वह कर्ज में डूबता जा रहा है। गरीबी की मार झेल रहे दंपती के बच्चे के न मिलने से आंसू सूख रहे हैं।
मोहन के पिता अंकित पांच साल से छजलैट में नूरपूर रोड़ के किनारे डेरे में जड़ी-बूटी बेचकर पत्नी बंटी, बेटे रोहन, मोहन, बेटी दीप्ती सहित पांच लोगों के परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। जब से मोहन लापता हुआ है तब से उसकी तलाश में इधर-उधर जाने से यह काम भी चाैपट सा हो गया है। ऊपर से भाग-दाैड़ में खर्च के साथ ही परिवार की गुजर बसर से परिवार कर्ज में डूब चुका है।
अंकित ने बताया कि पिछले चार महीने से धंधा बहुत ही मंदा चल रहा था। रोज तो दवाई बिकती नहीं थी। कभी कोई आ जाता तो 300-400 रुपये मिल जाते थे। इसी से तंगहाली में गुजर बसर हो रही थी। अंकित कहते हैं कि 16 अक्तूबर का दिन उनके परिवार के लिए काले दिन के रूप में आया।
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उनका बच्चा तो गुम हो ही गया। साथ ही कामधंधा भी चाैपट है। बेटे की तलाश में भाग दाैड़ के कारण वह डेरे पर नहीं रुक रहे हैं। जिस वजह से जो जड़ी-बूटी बेचकर परिवार की गुजर बसर हो जाती थी वह भी अब होना मुश्किल हो गया है। जान-पहचान वालों से कर्ज भी लेना पड़ा है।
17 दिन बाद भी बच्चे का कोई पता न चल पाने से माता-पिता के आंसू सूख चुके हैं। वह टकटकी लगाए बच्चे का इंतजार कर रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह भी है कि अभी तक कोई भी सामाजिक संगठन या राजनीतिक व्यक्ति इस परिवार के दुख में शामिल होने या मदद को आगे नहीं आया है। अब तो यह परिवार पुलिस के ही भरोसे बैठा है। उधर पुलिस लगातार बच्चे की तलाश में प्रयास कर रही है।
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मोहन के पिता अंकित पांच साल से छजलैट में नूरपूर रोड़ के किनारे डेरे में जड़ी-बूटी बेचकर पत्नी बंटी, बेटे रोहन, मोहन, बेटी दीप्ती सहित पांच लोगों के परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। जब से मोहन लापता हुआ है तब से उसकी तलाश में इधर-उधर जाने से यह काम भी चाैपट सा हो गया है। ऊपर से भाग-दाैड़ में खर्च के साथ ही परिवार की गुजर बसर से परिवार कर्ज में डूब चुका है।
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अंकित ने बताया कि पिछले चार महीने से धंधा बहुत ही मंदा चल रहा था। रोज तो दवाई बिकती नहीं थी। कभी कोई आ जाता तो 300-400 रुपये मिल जाते थे। इसी से तंगहाली में गुजर बसर हो रही थी। अंकित कहते हैं कि 16 अक्तूबर का दिन उनके परिवार के लिए काले दिन के रूप में आया।
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उनका बच्चा तो गुम हो ही गया। साथ ही कामधंधा भी चाैपट है। बेटे की तलाश में भाग दाैड़ के कारण वह डेरे पर नहीं रुक रहे हैं। जिस वजह से जो जड़ी-बूटी बेचकर परिवार की गुजर बसर हो जाती थी वह भी अब होना मुश्किल हो गया है। जान-पहचान वालों से कर्ज भी लेना पड़ा है।
17 दिन बाद भी बच्चे का कोई पता न चल पाने से माता-पिता के आंसू सूख चुके हैं। वह टकटकी लगाए बच्चे का इंतजार कर रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह भी है कि अभी तक कोई भी सामाजिक संगठन या राजनीतिक व्यक्ति इस परिवार के दुख में शामिल होने या मदद को आगे नहीं आया है। अब तो यह परिवार पुलिस के ही भरोसे बैठा है। उधर पुलिस लगातार बच्चे की तलाश में प्रयास कर रही है।