फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   mohammad Azam did blood donation in roza to save life in moradabad

आजम ने पेश की इंसानियत की मिसाल, अंजान की जान बचाने के लिए रोजे में किया रक्तदान

Sat, 18 May 2019 02:32 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 18 May 2019 02:32 PM IST
विज्ञापन
mohammad Azam did blood donation in roza to save life in moradabad
आजम आजम - फोटो : अमर उजाला

इंसानियत से बड़ा कोई मजहब नहीं होता। पाकबड़ा के सिविल इंजीनियर मो. आजम ने रमजान में इसे साबित कर इंसानियत की मिसाल पेश की है। आजम ने रोजा रखते हुए भी सड़क दुर्घटना में जख्मी एक अंजान शख्स को अपना खून देकर उसकी जान बचाई ली। 

विज्ञापन


पाकबड़ा, बड़ी मस्जिद गली नंबर चार में रहने वाले मो. आजम जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में नियमित स्वैच्छिक रक्तदान करते हैं। उनका (ओ पॉजिटिव) ब्लड ग्रुप है। ब्लड बैंक के ब्लड डोनर रजिस्टर में उनका नाम दर्ज है। ब्लड बैंक में अक्सर ओ पॉजिटिव और दूसरे रेयर ब्लड ग्रुप की कमी रहती है। इमरजेंसी होने पर अस्पताल कर्मचारी मो. आजम को रक्तदान करने के लिए फोन कर खुद ही बुलवा लेते हैं। 
विज्ञापन


ब्लड बैंक के टेक्निकल सुपरवाइजर बृजेश कुमार और सीबी सिंह बताते हैं, दो रोज पहले सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल व्यक्ति को ओ पॉजिटिव ग्रुप के खून की जरूरत थी। सरकारी और दूसरे प्राइवेट अस्पतालों के ब्लड बैंक में ओ पॉजिटिव नहीं था। घायल के परिजन काफी परेशान थे। बृजेश बताते हैं, उन्होंने ब्लड डोनर रजिस्टर चेक किया। किसी ने कुछ दिन पहले ही ब्लड देने तो किसी ने शहर से दूर होने की बात कही।
विज्ञापन
विज्ञापन


रमजान माह में न चाहते हुए भी मो. आजम को फोन लगाया। आजम ने फोन रिसीव करते ही जल्द ब्लड बैंक पहुंचने की बात कही। सीबी सिंह बताते हैं, आजम कुछ देर बाद ब्लड बैंक पहुंच गए और अंजान घायल के लिए रोजे में रक्तदान किया। आजम के रक्तदान से घायल की जिंदगी बच गई। आजम बीटेक हैं और पिता मो. एहसान रीयल स्टेट कारोबार से जुड़े हैं। आजम कहते हैं, रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। इसमें मजहब कभी आड़े नहीं आता है। 

फेसबुक पोस्ट देख दिल्ली गए खून देने
आजम तीन महीने पहले ही एक अंजान को खून देने दिल्ली गए। आजम ने बताया कि फेसबुक पर मुरादाबाद के एक व्यक्ति की पोस्ट पढ़ी। जिसमें उसने दिल्ली में भर्ती पिता को खून की जरूरत बताया। पोस्ट पढ़कर उससे संपर्क किया और दिल्ली जाकर खून दिया। 


ब्लड बैंक में खून की कमी
जिला अस्पताल का ब्लड बैंक खून की कमी से जूझ रहा है। एक हजार यूनिट क्षमता वाले ब्लड बैंक में दो सौ यूनिट खून रिजर्व में होना चाहिए। लेकिन बैंक में मात्र 23 यूनिट ब्लड है। रेयर ग्रुप नहीं हैं। ब्लड बैंक से दुर्घटना के लावारिस घायल, कैदी, एचआईवी, महिला डिलीवरी और थैलेसीमिया के मरीजों को निशुल्क ब्लड यूनिट दिया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed