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विधायक जी मेरे वार्ड में काम नहीं हुआ कर दिया गया करोड़ों का भुगतान
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मुरादाबाद। नगर निगम के जलकल विभाग पर लगातार दूसरे दिन भी शहर विधायक रितेश गुप्ता के तेवर हमलावर दिखे। दो साल पहले बिना कार्य कराए करीब 16 करोड़ रुपये का चहेते ठेकेदारों को भुगतान करने की शिकायत मुख्यमंत्री से करने वाले विधायक के पास एक पार्षद और तीन महिला पार्षदों के पति (प्रतिनिधि) ने भी पहुंच कर अपनी पीड़ा बयां की। पार्षदों ने उन्हें कुछ अभिलेख भी उपलब्ध कराते हुए दावा किया कि उसमें दर्शाए गए कार्य उनके वार्ड में हुए ही नहीं और उसके नाम पर करोड़ों का भुगतान कर दिया गया। विधायक रितेश गुप्ता ने कहा कि अब वह इस मामले को दबने नहीं देंगे।
नगर विधायक रितेश गुप्ता ने शुक्रवार को एक पत्र मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री और मंडलायुक्त को लिखा था। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि वर्ष 2018-19 में नगर निगम के जल कल विभाग में विभिन्न कार्यों के निकाले गए ई-टेंडर व कोटेशन के आधार पर करीब 16 करोड़ रुपये का भुगतान निगम अधिकारियों ने चहेते ठेकेदारों को कर दिया। जबकि वह कार्य धरातल पर हुए ही नहीं। इस मामले को लेकर शहर विधायक दूसरे दिन भी नगर निगम पर हमलावर दिखाई दिए।
शनिवार को विधायक के गांधीनगर स्थित आवास पर वार्ड 23 के पार्षद अशोक सैनी के साथ वार्ड 4 की पार्षद रजनी देवी के पति कपिल, वार्ड 33 की पार्षद अंजलि राजपूत के पति मंगलसेन राजपूत और वार्ड 43 की पार्षद भाग्यवती सैनी के पति चंद्रभान सैनी ने पहुंच कर मुलाकात की। इन सभी पार्षदों ने विधायक को वर्ष 2018-19 में निकाले गए टेंडर की सूची व कुछ अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए। बताया कि उसमें उल्लेखित अधिकांश कार्यों का भुगतान बिना कार्य कराए निकाल लिया गया है। वार्ड चार की पार्षद रजनी देवी के पति कपिलदेव ने तो विधायक को बाकायदा तीन पन्नों की एक सूची उपलब्ध कराई। जिसके आधार पर उन्होंने दावा किया कि चारों पार्षदों के वार्ड में कई ऐसे विकास कार्यों के नाम पर करीब ढाई करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, जो धरातल पर हैं ही नहीं। पार्षद व पार्षद प्रतिनिधियों ने विधायक से यह भी कहा कि पहले भी यह मामला उठा था, लेकिन उसे जांच के नाम पर दबा दिया गया। जांच क्या हुई किसी को कुछ पता नहीं चला। इस पर विधायक ने उन्हें आश्वस्त किया कि अब इस मामले की जांच को दबने नहीं दिया जाएगा। विकास के नाम पर सरकार से आए धन का जिन-जिन लोगों ने बंदरबांट किया होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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कागजों में लग गया ट्यूबवेल, वार्ड के लोग पानी को परेशान
मुरादाबाद। करीब दो साल पहले कागजों में कार्य दिखा कर करोड़ों का भुगतान करने के आरोप के मामले में एक नया मामला भी सामने आया है। वार्ड-चार के कई मोहल्ले ऐसे हैं जहां रहने वाले लोग को नगर निगम की पेय सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लेकिन नगर निगम की ओर से वहां कागजों में ट्यूबवेल लगा दिखा कर करीब 4.50 लाख रुपये का भुगतान निकाला गया है। इसका दावा हम नहीं बल्कि वार्ड की पार्षद रजनी देवी ने स्वयं किया है। शहर विधायक के सामने भी शनिवार को यह तथ्य आया है।
वार्ड-4 लाकड़ी की पार्षद रजनी देवी ने बताया कि उनके वार्ड के मोहल्ला चौहानों की मिलक, पुराना मझरा और लाकड़ी के लोगों को नगर निगम की पेयजल आपूर्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वजह यह है कि वहां ट्यूबवेल आदि की दिक्कत है। वार्ड के लोगों की पेयजल समस्या समेत कुछ अन्य समस्याओं को लेकर वह नगर निगम कार्यालय गईं थीं। वहां जल कल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उनके वार्ड में पहले काफी विकास कार्य हो चुके हैं। ब्योरा मांगने पर वहां से एक सूची दी गई। जिसमें 4.50 लाख रुपये की लागत से एक ट्यूबवेल लगा होना दिखाया गया है। जबकि ऐसा कोई ट्यूबवेल लगा ही नहीं है। यह भी दावा किया कि सूची में एक काम को दो बार दिखाकर उसका भुगतान एक ही ठेकेदार को दो बार किया गया है। जबकि एक अन्य कार्य में एक ही कार्य के नाम पर दो बार भुगतान अलग-अलग ठेकेदारों को किया गया है। उन्होंने दावा किया कि सूची के मुताबिक उनके वार्ड में करीब एक करोड़ रुपये से अधिक के ऐसे काम दिखाए गए हैं जो धरातल पर हैं ही नहीं। इसकी जानकारी मेयर और शहर विधायक को भी दी है।
दबने नहीं देंगे मामला, सच लाएंगे सामने : रितेश
मुरादाबाद। शहर विधायक रितेश गुप्ता ने कहा कि नगर निगम में दो साल पहले बिना कार्य के करोड़ों के भुगतान के मामले को निगम के जिम्मेदार लोगों ने दबाने का काम किया है। पर अब ऐसा नहीं हो पाएगा। शहर के विकास के लिए आई धनराशि का जिसने भी दुरुपयोग किया है उसके खिलाफ कार्रवाई होने तक वह चुप नहीं बैठेंगे।
उन्होंने कहा कि दो साल तक मामले को दबाए रखा गया। जब मैंने इसे उठाया तो अब निगम के जिम्मेदार लोग कह रहे हैं कि इस मामले में पहले जांच हो चुकी है। लेकिन इस संबंध में मेरा यह सवाल है कि वह कौन-कौन से लोग हैं जिन्होंने इस फर्जीवाड़ा को करने की कोशिश की। भुगतान अगर रद्द भी कर दिया गया तो भी यह सवाल है कि भुगतान तक फाइल तैयार करने अथवा वर्क ऑर्डर जारी करने वाले कौन लोग थे? उनके बारे में क्या कार्रवाई हुई।
पहले भी यह मामला सदन में उठा था। उस समय इसकी जांच कराई गई थी। अब पुन: इसकी जांच की मांग की गई है। इसलिए इसकी पुन: जांच करा ली जाएगी। जांच में अगर कोई अनियमितता पाई जाती है तो दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराई जाएगी।
विनोद अग्रवाल, महापौर मुरादाबाद
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नगर विधायक रितेश गुप्ता ने शुक्रवार को एक पत्र मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री और मंडलायुक्त को लिखा था। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि वर्ष 2018-19 में नगर निगम के जल कल विभाग में विभिन्न कार्यों के निकाले गए ई-टेंडर व कोटेशन के आधार पर करीब 16 करोड़ रुपये का भुगतान निगम अधिकारियों ने चहेते ठेकेदारों को कर दिया। जबकि वह कार्य धरातल पर हुए ही नहीं। इस मामले को लेकर शहर विधायक दूसरे दिन भी नगर निगम पर हमलावर दिखाई दिए।
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शनिवार को विधायक के गांधीनगर स्थित आवास पर वार्ड 23 के पार्षद अशोक सैनी के साथ वार्ड 4 की पार्षद रजनी देवी के पति कपिल, वार्ड 33 की पार्षद अंजलि राजपूत के पति मंगलसेन राजपूत और वार्ड 43 की पार्षद भाग्यवती सैनी के पति चंद्रभान सैनी ने पहुंच कर मुलाकात की। इन सभी पार्षदों ने विधायक को वर्ष 2018-19 में निकाले गए टेंडर की सूची व कुछ अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए। बताया कि उसमें उल्लेखित अधिकांश कार्यों का भुगतान बिना कार्य कराए निकाल लिया गया है। वार्ड चार की पार्षद रजनी देवी के पति कपिलदेव ने तो विधायक को बाकायदा तीन पन्नों की एक सूची उपलब्ध कराई। जिसके आधार पर उन्होंने दावा किया कि चारों पार्षदों के वार्ड में कई ऐसे विकास कार्यों के नाम पर करीब ढाई करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, जो धरातल पर हैं ही नहीं। पार्षद व पार्षद प्रतिनिधियों ने विधायक से यह भी कहा कि पहले भी यह मामला उठा था, लेकिन उसे जांच के नाम पर दबा दिया गया। जांच क्या हुई किसी को कुछ पता नहीं चला। इस पर विधायक ने उन्हें आश्वस्त किया कि अब इस मामले की जांच को दबने नहीं दिया जाएगा। विकास के नाम पर सरकार से आए धन का जिन-जिन लोगों ने बंदरबांट किया होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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कागजों में लग गया ट्यूबवेल, वार्ड के लोग पानी को परेशान
मुरादाबाद। करीब दो साल पहले कागजों में कार्य दिखा कर करोड़ों का भुगतान करने के आरोप के मामले में एक नया मामला भी सामने आया है। वार्ड-चार के कई मोहल्ले ऐसे हैं जहां रहने वाले लोग को नगर निगम की पेय सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लेकिन नगर निगम की ओर से वहां कागजों में ट्यूबवेल लगा दिखा कर करीब 4.50 लाख रुपये का भुगतान निकाला गया है। इसका दावा हम नहीं बल्कि वार्ड की पार्षद रजनी देवी ने स्वयं किया है। शहर विधायक के सामने भी शनिवार को यह तथ्य आया है।
वार्ड-4 लाकड़ी की पार्षद रजनी देवी ने बताया कि उनके वार्ड के मोहल्ला चौहानों की मिलक, पुराना मझरा और लाकड़ी के लोगों को नगर निगम की पेयजल आपूर्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वजह यह है कि वहां ट्यूबवेल आदि की दिक्कत है। वार्ड के लोगों की पेयजल समस्या समेत कुछ अन्य समस्याओं को लेकर वह नगर निगम कार्यालय गईं थीं। वहां जल कल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उनके वार्ड में पहले काफी विकास कार्य हो चुके हैं। ब्योरा मांगने पर वहां से एक सूची दी गई। जिसमें 4.50 लाख रुपये की लागत से एक ट्यूबवेल लगा होना दिखाया गया है। जबकि ऐसा कोई ट्यूबवेल लगा ही नहीं है। यह भी दावा किया कि सूची में एक काम को दो बार दिखाकर उसका भुगतान एक ही ठेकेदार को दो बार किया गया है। जबकि एक अन्य कार्य में एक ही कार्य के नाम पर दो बार भुगतान अलग-अलग ठेकेदारों को किया गया है। उन्होंने दावा किया कि सूची के मुताबिक उनके वार्ड में करीब एक करोड़ रुपये से अधिक के ऐसे काम दिखाए गए हैं जो धरातल पर हैं ही नहीं। इसकी जानकारी मेयर और शहर विधायक को भी दी है।
दबने नहीं देंगे मामला, सच लाएंगे सामने : रितेश
मुरादाबाद। शहर विधायक रितेश गुप्ता ने कहा कि नगर निगम में दो साल पहले बिना कार्य के करोड़ों के भुगतान के मामले को निगम के जिम्मेदार लोगों ने दबाने का काम किया है। पर अब ऐसा नहीं हो पाएगा। शहर के विकास के लिए आई धनराशि का जिसने भी दुरुपयोग किया है उसके खिलाफ कार्रवाई होने तक वह चुप नहीं बैठेंगे।
उन्होंने कहा कि दो साल तक मामले को दबाए रखा गया। जब मैंने इसे उठाया तो अब निगम के जिम्मेदार लोग कह रहे हैं कि इस मामले में पहले जांच हो चुकी है। लेकिन इस संबंध में मेरा यह सवाल है कि वह कौन-कौन से लोग हैं जिन्होंने इस फर्जीवाड़ा को करने की कोशिश की। भुगतान अगर रद्द भी कर दिया गया तो भी यह सवाल है कि भुगतान तक फाइल तैयार करने अथवा वर्क ऑर्डर जारी करने वाले कौन लोग थे? उनके बारे में क्या कार्रवाई हुई।
पहले भी यह मामला सदन में उठा था। उस समय इसकी जांच कराई गई थी। अब पुन: इसकी जांच की मांग की गई है। इसलिए इसकी पुन: जांच करा ली जाएगी। जांच में अगर कोई अनियमितता पाई जाती है तो दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराई जाएगी।
विनोद अग्रवाल, महापौर मुरादाबाद