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Moradabad News: मानसिक रोगियों को नहीं मिल रही पूरी दवा, छह माह से विशेषज्ञ का इंतजार
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मुरादाबाद। जिला अस्पताल में छह माह से विशेषज्ञ न होने पर मानसिक रोग विभाग में मरीजों का इलाज काउंसलिंग टीम का सहारे चल रहा है। दवा की जरूरत पड़ने पर मरीजों के सामने परेशानी खड़ी हो रही है। कई मरीजों को पूरी दवा नहीं मिल पा रही है, जबकि जिन मरीजों को दवा बदलवाने या उसकी मात्रा तय कराने की जरूरत है, उन्हें विशेषज्ञ नहीं मिल रहा। ऐसे मरीजों को फिजिशियन के पास भेजे जाने की बात सामने आई है।
जिला अस्पताल में फरवरी 2026 तक मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव शेखर तैनात थे। उनकी संविदा समाप्त होने के बाद अब तक दूसरे विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। मरीजों की परेशानी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मनोरोग में दवा का चयन और उसकी मात्रा मरीज की स्थिति के अनुसार तय होती है। खासतौर पर बाइपोलर डिसऑर्डर में अवसाद और उन्माद के दौर के अनुसार उपचार में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। वहीं सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर में मौसम और दिन की रोशनी में बदलाव के साथ अवसाद के लक्षण बढ़ सकते हैं। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ दवा, मनोचिकित्सा या अन्य उपचार की रणनीति तय करते हैं।
बृहस्पतिवार को भी जिला अस्पताल में कई मरीज पूरी दवा न मिलने की शिकायत लेकर भटकते दिखाई दिए। मरीजों का कहना था कि पुरानी दवा से आराम नहीं मिल रहा है। दवा किससे बदलवाएं, यहां डॉक्टर ही नहीं हैं। एसआईसी डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय का कहना है कि दवाओं की कमी नहीं है। यदि किसी मरीज को दवा नहीं मिल रही है तो वह शिकायत कर सकते हैं। फिजिशियन मरीजों को देख रहे हैं। विशेषज्ञ की तैनाती के लिए निदेशालय से अनुरोध किया गया है।
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बोले मरीज...
डिप्रेशन के इलाज के लिए काफी समय से दवा ले रहा हूं। डॉक्टर ने लगातार दवा लेने को कहा है, लेकिन अस्पताल में पूरी दवा नहीं मिल रही। दवा खत्म होने पर बाहर से खरीदना पड़ता है। विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से यह भी पता नहीं चल पा रहा कि दवा जारी रखनी है या बदलनी है। - उमेश कुमार
बाइपोलर डिसऑर्डर की बीमारी के कारण लंबे समय से इलाज चल रहा है। दवा की मात्रा और समय डॉक्टर की सलाह से ही तय होता है। अब अस्पताल में मानसिक रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। दवा पूरी न मिलने और इलाज में बदलाव की जरूरत होने पर परेशानी होती है। फिजिशियन के पास भेज दिया जाता है। - संगीता पाल
मुझे लगातार घबराहट, बेचैनी और नींद की परेशानी रहती है। इसके लिए मानसिक रोग विशेषज्ञ से इलाज चल रहा था। अब विशेषज्ञ नहीं हैं, इसलिए दवा को लेकर सही सलाह नहीं मिल पा रही। अस्पताल में पूरी दवा भी नहीं मिलती। बीमारी के लक्षण बढ़ने पर समझ नहीं आता कि किस डॉक्टर को दिखाएं। - दीपक सिंह
मुझे भूलने की समस्या है। काफी समय से इलाज चल रहा है और दवा नियमित लेनी पड़ती है। कुछ दवाएं अस्पताल में पूरी नहीं मिल पातीं। बाहर से दवा खरीदना हर बार संभव नहीं होता। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि दवा बदलने या उसकी मात्रा कम-ज्यादा करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। - राजेश
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जिला अस्पताल में फरवरी 2026 तक मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव शेखर तैनात थे। उनकी संविदा समाप्त होने के बाद अब तक दूसरे विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। मरीजों की परेशानी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मनोरोग में दवा का चयन और उसकी मात्रा मरीज की स्थिति के अनुसार तय होती है। खासतौर पर बाइपोलर डिसऑर्डर में अवसाद और उन्माद के दौर के अनुसार उपचार में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। वहीं सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर में मौसम और दिन की रोशनी में बदलाव के साथ अवसाद के लक्षण बढ़ सकते हैं। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ दवा, मनोचिकित्सा या अन्य उपचार की रणनीति तय करते हैं।
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बृहस्पतिवार को भी जिला अस्पताल में कई मरीज पूरी दवा न मिलने की शिकायत लेकर भटकते दिखाई दिए। मरीजों का कहना था कि पुरानी दवा से आराम नहीं मिल रहा है। दवा किससे बदलवाएं, यहां डॉक्टर ही नहीं हैं। एसआईसी डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय का कहना है कि दवाओं की कमी नहीं है। यदि किसी मरीज को दवा नहीं मिल रही है तो वह शिकायत कर सकते हैं। फिजिशियन मरीजों को देख रहे हैं। विशेषज्ञ की तैनाती के लिए निदेशालय से अनुरोध किया गया है।
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बोले मरीज...
डिप्रेशन के इलाज के लिए काफी समय से दवा ले रहा हूं। डॉक्टर ने लगातार दवा लेने को कहा है, लेकिन अस्पताल में पूरी दवा नहीं मिल रही। दवा खत्म होने पर बाहर से खरीदना पड़ता है। विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से यह भी पता नहीं चल पा रहा कि दवा जारी रखनी है या बदलनी है। - उमेश कुमार
बाइपोलर डिसऑर्डर की बीमारी के कारण लंबे समय से इलाज चल रहा है। दवा की मात्रा और समय डॉक्टर की सलाह से ही तय होता है। अब अस्पताल में मानसिक रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। दवा पूरी न मिलने और इलाज में बदलाव की जरूरत होने पर परेशानी होती है। फिजिशियन के पास भेज दिया जाता है। - संगीता पाल
मुझे लगातार घबराहट, बेचैनी और नींद की परेशानी रहती है। इसके लिए मानसिक रोग विशेषज्ञ से इलाज चल रहा था। अब विशेषज्ञ नहीं हैं, इसलिए दवा को लेकर सही सलाह नहीं मिल पा रही। अस्पताल में पूरी दवा भी नहीं मिलती। बीमारी के लक्षण बढ़ने पर समझ नहीं आता कि किस डॉक्टर को दिखाएं। - दीपक सिंह
मुझे भूलने की समस्या है। काफी समय से इलाज चल रहा है और दवा नियमित लेनी पड़ती है। कुछ दवाएं अस्पताल में पूरी नहीं मिल पातीं। बाहर से दवा खरीदना हर बार संभव नहीं होता। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि दवा बदलने या उसकी मात्रा कम-ज्यादा करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। - राजेश