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पूरी रात चला मातम, मजलिस का दौर
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मुरादाबाद। नवीं मोहर्रम पर शिया समुदाय के लोगों में मजलिस, मातम का दौर पूरी रात चलता रहा। मछली बाजार स्थित इमामबाड़े पर कुली खां का घोड़ा उठाया गया। जिसके दीदार को सैकड़ों लोगों ने पहुंच कर दीदार किया। अकीदतमंदों ने मन्नतें मांगी, दुआएं की। लाकड़ीवालान और दौलतबाग में पूरी रात मजलिस और मातम का दौर चलता रहा। सभी ओर हुसैन की सदाएं बुलंद हो रही थीं।
इसके अलावा एक मजलिस सिब्ते नबी साहब के घर पर हुई। जिसको मौलाना तनवीर अब्बास ने खिताब किया। मौलाना ने शोहदाय कर्बला का जिक्र करते हुए कहा की यजीदी फ़ौज में लाखों का लश्कर था। इमाम हुसैन की फौज में छह माह का बच्चा भी तीन दिन का भूखा प्यासा था। लेकिन उसके बावजूद एक भी शहीद इमाम हुसैन को छोड़ कर यजीदी फौज में नहीं गया। जबकि इसके विपरीत यजीदी फौज से जनाबे हूर और उनका जवान बेटा इमाम हुसैन की फौज में शामिल हो गया। उसने इमाम हुसैन के लिए अपनी जान तक दे दी। तभी से हूर से हूर अलेहिस्लाम कहलाने लगे।
मौलाना ने कहा की आज की रात इबादत की रात है। कर्बला में 10 मोहर्रम को इमाम हुसैन को शहीद कर दिया जाएगा। जिसको सुनकर अजादारों के आंसू निकल आए और अजादार या हुसैन की सदाएं बुलंद करने लगे। मजलिस के बाद असीम यावर नकवी ने नोहा ख्वानीकी। देर रात में इमाम बाड़ा कुली खां में अजादरों ने छुरियों का मातम किया। इमाम हुसैन के घोड़े की शबी/जुलजनाह बरामद हुआ। देर रात तक अजादरों ने हर इमामबाड़े में जाकर नजरों नियाज़ और नोहा ख्वानी की।
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मजलिस और जुलूस में अली अनवर प्रिंस, मोहम्मद अब्बास, सिब्ते नबी, अनीस बावरी, नसीम हैदर जैदी, हाजी कायम हसनैन, मोहम्मद आलम आब्दी, गुलरेज हैदर, अली हैदर, नौशाद हैदर, अजीम हैदर, दिलनवाज नकवी सहित भारी संख्या में अजादार मौजूद रहे।
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इसके अलावा एक मजलिस सिब्ते नबी साहब के घर पर हुई। जिसको मौलाना तनवीर अब्बास ने खिताब किया। मौलाना ने शोहदाय कर्बला का जिक्र करते हुए कहा की यजीदी फ़ौज में लाखों का लश्कर था। इमाम हुसैन की फौज में छह माह का बच्चा भी तीन दिन का भूखा प्यासा था। लेकिन उसके बावजूद एक भी शहीद इमाम हुसैन को छोड़ कर यजीदी फौज में नहीं गया। जबकि इसके विपरीत यजीदी फौज से जनाबे हूर और उनका जवान बेटा इमाम हुसैन की फौज में शामिल हो गया। उसने इमाम हुसैन के लिए अपनी जान तक दे दी। तभी से हूर से हूर अलेहिस्लाम कहलाने लगे।
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मौलाना ने कहा की आज की रात इबादत की रात है। कर्बला में 10 मोहर्रम को इमाम हुसैन को शहीद कर दिया जाएगा। जिसको सुनकर अजादारों के आंसू निकल आए और अजादार या हुसैन की सदाएं बुलंद करने लगे। मजलिस के बाद असीम यावर नकवी ने नोहा ख्वानीकी। देर रात में इमाम बाड़ा कुली खां में अजादरों ने छुरियों का मातम किया। इमाम हुसैन के घोड़े की शबी/जुलजनाह बरामद हुआ। देर रात तक अजादरों ने हर इमामबाड़े में जाकर नजरों नियाज़ और नोहा ख्वानी की।
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मजलिस और जुलूस में अली अनवर प्रिंस, मोहम्मद अब्बास, सिब्ते नबी, अनीस बावरी, नसीम हैदर जैदी, हाजी कायम हसनैन, मोहम्मद आलम आब्दी, गुलरेज हैदर, अली हैदर, नौशाद हैदर, अजीम हैदर, दिलनवाज नकवी सहित भारी संख्या में अजादार मौजूद रहे।