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प्रथमा बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी प्रबंधक को सीबीआई ने दबोचा
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हसनपुर में प्रथमा बैंक की मंडी समिति शाखा में वर्ष 2017 में हुए 14.85 करोड़ के घोटाले के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी तत्कालीन बैंक प्रबंधक विपिन कुमार को सीबीआई ने बृहस्पतिवार को सैदनगली स्थित उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई की टीम आरोपी को अपने साथ गाजियाबाद ले गई। वहां कोर्ट में पेश करने के बाद बैंक प्रबंधक को जेल भेज दिया गया। मामले के दो अन्य आरोपियों को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
जानकारी के मुताबिक हसनपुर में प्रथमा बैंक की मंडी समिति शाखा में अगस्त 2017 में 14.85 करोड़ों के घोटाले की पोल खुली थी। तत्कालीन शाखा प्रबंधक विपिन कुमार द्वारा ओवरड्राफ्ट लिमिट के उन खातों में करोड़ों की धनराशि ट्रांसफर कर दी थी, जिनकी लिमिट एक से दस लाख रुपये तक थी। ये खाते उनके चहेतों के थे। ये लोग इस धनराशि का प्रयोग प्रापर्टी डीलिंग समेत अन्य धंधों में करते थे। इससे होने वाले मुनाफे में बैंक मैनेजर की भी हिस्सेदारी थी। बैंक के शीर्ष अधिकारियों ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक विपिन कुमार, फील्ड अफसर नवीन शर्मा एवं वीसी जितेंद्र आर्य समेत पूरे स्टाफ को हटाकर नए स्टाफ की तैनाती की थी। मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। पिछले चार साल से सीबीआई की टीम घोटाले की जांच कर रही है। कई बार बैंक एवं प्रबंधक के घर में जाकर भी जांच पड़ताल की जा चुकी है। 25 फरवरी 2022 को घोटाले का आरोपी तत्कालीन फील्ड अफसर नवीन शर्मा गाजियाबाद सीबीआई की अदालत में पेश हुआ था। दूसरे आरोपी वीसी जितेंद्र आर्य को पांच अप्रैल को सीबीआई की टीम ने हसनपुर से गिरफ्तार किया था जबकि घोटाले का मुख्य आरोपी तत्कालीन बैंक प्रबंधक विपिन कुमार फरार हो गया था। सीबीआई की टीम उसकी तलाश में लगी हुई थी। सीबीआई टीम ने बृहस्पतिवार को सैदनगली पहुंचकर मुख्य आरोपी तत्कालीन बैंक प्रबंधक विपिन कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उसे अपने साथ गाजियाबाद ले जाकर कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया गया।
प्रथमा बैंक की मंडी समिति शाखा में अगस्त 2017 में घोटाले की पोल खुली थी। तत्कालीन ब्रांच मैनेजर विपिन कुमार ने ओवर ड्राफ्ट लिमिट के उन खातों में करोड़ों की धनराशि ट्रांसफर कर दी थी, जिनकी लिमिट एक से दस लाख रुपये तक थी। ये खाते उनके चहेतों के थे। इसकी भनक लगने पर बैंक अधिकारियों ने ओवर ड्राफ्ट लिमिट के एक खाते में निर्धारित सीमा से कई गुना धनराशि ट्रांसफर का मामला पकड़ा तो उनका माथा ठनक गया था। इसके बाद जब अन्य खातों की पड़ताल की गई तो पता चला कि नियमों को दरकिनार कर लगभग आठ करोड़ रुपये ऐसे ही अन्य खातों में भी ट्रांसफर किए गए हैं। उन्होंने मामले की सूचना बैंक मुख्यालय को दी तो हड़कंप मच गया था। बाद में सीबीआई को जांच सौंपी गई तो बैंक में 14.85 करोड़ का घोटाला सामने आया।
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जानकारी के मुताबिक हसनपुर में प्रथमा बैंक की मंडी समिति शाखा में अगस्त 2017 में 14.85 करोड़ों के घोटाले की पोल खुली थी। तत्कालीन शाखा प्रबंधक विपिन कुमार द्वारा ओवरड्राफ्ट लिमिट के उन खातों में करोड़ों की धनराशि ट्रांसफर कर दी थी, जिनकी लिमिट एक से दस लाख रुपये तक थी। ये खाते उनके चहेतों के थे। ये लोग इस धनराशि का प्रयोग प्रापर्टी डीलिंग समेत अन्य धंधों में करते थे। इससे होने वाले मुनाफे में बैंक मैनेजर की भी हिस्सेदारी थी। बैंक के शीर्ष अधिकारियों ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक विपिन कुमार, फील्ड अफसर नवीन शर्मा एवं वीसी जितेंद्र आर्य समेत पूरे स्टाफ को हटाकर नए स्टाफ की तैनाती की थी। मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। पिछले चार साल से सीबीआई की टीम घोटाले की जांच कर रही है। कई बार बैंक एवं प्रबंधक के घर में जाकर भी जांच पड़ताल की जा चुकी है। 25 फरवरी 2022 को घोटाले का आरोपी तत्कालीन फील्ड अफसर नवीन शर्मा गाजियाबाद सीबीआई की अदालत में पेश हुआ था। दूसरे आरोपी वीसी जितेंद्र आर्य को पांच अप्रैल को सीबीआई की टीम ने हसनपुर से गिरफ्तार किया था जबकि घोटाले का मुख्य आरोपी तत्कालीन बैंक प्रबंधक विपिन कुमार फरार हो गया था। सीबीआई की टीम उसकी तलाश में लगी हुई थी। सीबीआई टीम ने बृहस्पतिवार को सैदनगली पहुंचकर मुख्य आरोपी तत्कालीन बैंक प्रबंधक विपिन कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उसे अपने साथ गाजियाबाद ले जाकर कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया गया।
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प्रथमा बैंक की मंडी समिति शाखा में अगस्त 2017 में घोटाले की पोल खुली थी। तत्कालीन ब्रांच मैनेजर विपिन कुमार ने ओवर ड्राफ्ट लिमिट के उन खातों में करोड़ों की धनराशि ट्रांसफर कर दी थी, जिनकी लिमिट एक से दस लाख रुपये तक थी। ये खाते उनके चहेतों के थे। इसकी भनक लगने पर बैंक अधिकारियों ने ओवर ड्राफ्ट लिमिट के एक खाते में निर्धारित सीमा से कई गुना धनराशि ट्रांसफर का मामला पकड़ा तो उनका माथा ठनक गया था। इसके बाद जब अन्य खातों की पड़ताल की गई तो पता चला कि नियमों को दरकिनार कर लगभग आठ करोड़ रुपये ऐसे ही अन्य खातों में भी ट्रांसफर किए गए हैं। उन्होंने मामले की सूचना बैंक मुख्यालय को दी तो हड़कंप मच गया था। बाद में सीबीआई को जांच सौंपी गई तो बैंक में 14.85 करोड़ का घोटाला सामने आया।
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