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Moradabad News: बुजुर्ग ग्रामीण बोले, थांवला में है मसूद गाजी के सिपहसालार की दरगाह

Thu, 20 Mar 2025 12:45 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद Updated Thu, 20 Mar 2025 12:45 AM IST
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Los aldeanos ancianos dijeron que hay una dargah del comandante de Masood Ghazi en Thanwala.
बिलारी। थांवला गांव के बुजुर्ग असगर हुसैन, मतलूब हुसैन, मोहम्मद यासीन समेत अन्य लोगों ने बताया कि थांवला के मोहल्ला पड़ाव में जिस दरगाह को सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह कहा जाता है, यह दरगाह मसूद गाजी के सिपहसालार की है। थांवला गांव के लोगों को जब यह पता चला कि नेजा मेला के आयोजन पर कुछ हिंदू संगठनों ने तहसील प्रशासन को ज्ञापन देकर विरोध जताया है। तब दोपहर बाद ग्रामीण मोहल्ला पड़ाव में मसूद गाजी के नाम से प्रसिद्ध दरगाह पर इकट्ठा होकर चर्चाएं करने लगे। ग्रामीणों ने कहा कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को बताएंगे कि थांवला की दरगाह सालार मसूद गाजी की नहीं, बल्कि उनके सिपहसालार की है, लेकिन मसूद गाजी के ही नाम से जानी जाती है। मसूद गाजी के काफिले का पड़ाव थांवला गांव में पड़ने के दौरान उनके जो सिपहसालार शहीद हुए थे, उन्हीं की याद में मजार बनाई गई थी।
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थांवला गांव के बुजुर्गों ने बताया कि सैयद सालार मसूद गाजी की याद में नेजा मेला संभल, बहराइच और पूरनपुर में लगता है। थांवला नेजा मेला लगने का चौथा स्थान है। जहां-जहां मसूद गाजी के काफिले का पड़ाव हुआ था, वहां उनकी याद में नेजा मेला लगना शुरू हो गया। बुजुर्गों के अनुसार, नेजा उस जमाने में नुकीला भाला रूपी हथियार होता था, जो पड़ाव वाले स्थान पर संकेत मिलने और सुरक्षा की दृष्टि से गाड़ा जाता था।
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सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार थांवला गांव में नेजा मेले की तीन स्थानों पर ढाल गाड़ी जाती है। नेजा मेला आयोजन से तीन दिन पहले यह ढाल थांवला की तुर्कों की चौपाल और दो दिन पहले थांवला गांव के मोहल्ला कुरैशियान में गाड़ी जाती है। नेजा मेले के आयोजन की पूर्व संध्या पर यही ढाल थांवला गांव में स्थित मसूद गाजी दरगाह पर गाड़ी जाती है। नेजा मेले के दौरान दरगाह पर आने वाले अकीदतमंद फातिहा पढ़कर दुआ भी मांगते हैं।
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