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भगवान राम ने सदैव दीन-हीनों को गौरव प्रदान किया : कथाव्यास
Mon, 08 Dec 2025 01:50 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Mon, 08 Dec 2025 01:50 AM IST
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बिलारी। नगर के रायसत्ती मंदिर के कुमार कार्तिकेय सभागार में चल रही श्रीराम कथा के छठे दिन रविवार को कथाव्यास पंडित बृजेश पाठक ने कहा कि संसार में लोग उन्हीं लोगों से संबंध बनाते हैं जिनसे संबंध बनाकर उनका गौरव बढ़े। जबकि प्रभु राम ने सदैव दीन-हीनों से संबंध बनाकर उन्हें गौरव प्रदान किया।
कथाव्यास ने कहा कि रामायण में प्रभु राम ने सबरी और जटायु को वह सम्मान और गौरव प्रदान किया जो सम्मान माता कौशल्या और महाराज दशरथ को भी प्राप्त नहीं हुआ। प्रभु राम को तृप्त करने का गौरव माता सबरी को प्राप्त है। इसी प्रकार हमारी संस्कृति में बड़े पुत्र के हाथों पिता के अंतिम संस्कार का विधान है। पर यह सौभाग्य महाराज दशरथ को नहीं मिला, क्योंकि श्रीराम उनके पास नहीं थे। उनका अंतिम संस्कार भरत ने किया जबकि जटायु का अंतिम संस्कार प्रभु राम ने अपने हाथों से किया।
कथाव्यास ने आगे कहा कि जब प्रभु राम वन से लौट करके आए और उनके मित्रों ने उनके संस्मरण पूछे तो भगवान राम ने किसी ऋषि मुनि का नाम नहीं लिया बल्कि बार-बार जटायु और माता सबरी का स्मरण किया। अपनी इसी विशेषता के कारण श्री राम लोगों के हृदय में भगवान के रूप में विराजमान हो गए। रविवार शाम श्रीराम कथा के प्रारंभ में व्यास पीठ का पूजन विजेंद्र चौहान एवं सुधीर कुमार गुप्ता द्वारा किया गया। कथा की व्यवस्थाओं में संजय जैन, शिव ओम गुप्ता, दुष्यंत चौहान, अखिलेश श्रीवास्तव, सुरेश कुमार गुप्ता, सुरेंद्र चुग, नरेश कुमार गुप्ता, विजेंद्र चौहान, राकेश कुमार गुप्ता, नवल किशोर गुप्ता, पंकज चौहान आदि का सहयोग रहा।
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कथाव्यास ने कहा कि रामायण में प्रभु राम ने सबरी और जटायु को वह सम्मान और गौरव प्रदान किया जो सम्मान माता कौशल्या और महाराज दशरथ को भी प्राप्त नहीं हुआ। प्रभु राम को तृप्त करने का गौरव माता सबरी को प्राप्त है। इसी प्रकार हमारी संस्कृति में बड़े पुत्र के हाथों पिता के अंतिम संस्कार का विधान है। पर यह सौभाग्य महाराज दशरथ को नहीं मिला, क्योंकि श्रीराम उनके पास नहीं थे। उनका अंतिम संस्कार भरत ने किया जबकि जटायु का अंतिम संस्कार प्रभु राम ने अपने हाथों से किया।
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कथाव्यास ने आगे कहा कि जब प्रभु राम वन से लौट करके आए और उनके मित्रों ने उनके संस्मरण पूछे तो भगवान राम ने किसी ऋषि मुनि का नाम नहीं लिया बल्कि बार-बार जटायु और माता सबरी का स्मरण किया। अपनी इसी विशेषता के कारण श्री राम लोगों के हृदय में भगवान के रूप में विराजमान हो गए। रविवार शाम श्रीराम कथा के प्रारंभ में व्यास पीठ का पूजन विजेंद्र चौहान एवं सुधीर कुमार गुप्ता द्वारा किया गया। कथा की व्यवस्थाओं में संजय जैन, शिव ओम गुप्ता, दुष्यंत चौहान, अखिलेश श्रीवास्तव, सुरेश कुमार गुप्ता, सुरेंद्र चुग, नरेश कुमार गुप्ता, विजेंद्र चौहान, राकेश कुमार गुप्ता, नवल किशोर गुप्ता, पंकज चौहान आदि का सहयोग रहा।
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