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Moradabad Court: अखबार वितरक की हत्या करने वाले दो भाइयों समेत तीन को उम्रकैद, मेड़ को लेकर हुआ था विवाद
Sat, 17 Aug 2024 06:11 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 17 Aug 2024 06:11 AM IST
सार
मुरादाबाद की एक कोर्ट ने हत्या के मामले में दो भाइयों समेत तीन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। तीनों दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला अक्तूबर 2009 को पाकबड़ा थाने में दर्ज किया गया था।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अखबार वितरक की हत्या के मामले में अदालत ने शुक्रवार को दो सगे भाइयों समेत तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही तीनों पर 27-27 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। दोषियों ने मुकदमे में समझौता न करने पर हत्याकांड को अंजाम दिया था।
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पाकबड़ा थाना क्षेत्र के गांव मढ़न (अब संभल जिले के असमोली क्षेत्र का गांव) निवासी विजय सिंह ने 12 अक्तूबर 2009 को पाकबड़ा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया था कि उनका छोटा भाई जसराम बाइक से अखबार बांटने का काम करता था। 12 अक्तूबर की सुबह वह अखबार लेने पाकबड़ा गया था।
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रिश्तेदारी में गए माता-पिता भी जयराम को रास्ते में मिल गए। उन्हें साथ लेकर जसराम अखबार बांटते हुए घर आ रहा था। सिडलमाफी से मढ़न की ओर जाने वाले रास्ते पर मढ़न गांव निवासी तेजेंद्र उर्फ भीम, उसका भाई शिशुपाल और गांव निवासी लखपत मिल गए। आरोपियों ने जसराम की बाइक रुकवा ली।
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माता-पिता को बाइक से उतारकर आरोपियों ने जसराम के गोली मार दी थी। आरोपियों ने जमीन की रंजिश में चल रहे मुकदमे में फैसला न करने पर हत्याकांड को अंजाम दिया था। इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या पांच अचल लवानिया की अदालत में हुई।
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने कहा कि उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। उन्होंने किसी की हत्या नहीं की है। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपी तेजेंद्र उर्फ भीम, शिशुपाल और लखपत को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
दोनों पक्षों में मेड़ को लेकर था विवाद
दोनों पक्षों के बीच में जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कौशल गुप्ता ने बताया कि दोनों ही पक्षों के खेत आसपास थे। जिसमें मेड़ को लेकर विवाद था और मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन था। आरोपी पक्ष लगातार जसराम के परिवार पर समझौते का दबाव बना रहा था। समझौता न करने पर आरोपियों ने 12 अक्तूबर की सुबह हत्या को अंजाम दिया था।