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सजा: बहनोई को जिंदा जलाकर मारने के मामले में दो को आजीवन कारावास, नाराज पत्नी को बुलाने सुसराल गया था पति

Thu, 20 Jan 2022 10:43 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 20 Jan 2022 10:43 PM IST
सार

संभल जनपद के चंदौसी थानाक्षेत्र के कैथल गांव में सात साल पहले बरेली के खतैता गांव निवासी छत्रपाल की जलाकर हत्या कर दी थी।अदालत ने दो आरोपियों को घटना का दोषी करार देते हुए दोनों को आजीवन कारावास के साथ साथ प्रत्येक पर बीस हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई 
 

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Life imprisonment for two people for killing brother-in-law by burning alive In
फाइल फोटो - फोटो : amar ujala

विस्तार

सात साल पहले संभल जिले के चंदौसी थानाक्षेत्र में एक युवक को जिंदा जलाकर मौत के घाट उतारने के मामले में अदालत ने उसके दो सालों को आजीवन कारावास की सजा के साथ साथ प्रत्येक पर बीस- बीस हजार रुपए का अर्थदंड लगाया है।  
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संभल जनपद के चंदौसी थानाक्षेत्र के कैथल गांव में सात साल पहले बरेली के खतैता गांव निवासी छत्रपाल की जलाकर हत्या कर दी थी। जिसके भाई नेत्रपाल निवासी खतैता जिला बरेली ने मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें कहा था कि छत्रपाल की शादी वर्ष 2013 में कैथल निवासी प्रीति के साथ हुई थी। 
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शादी के बाद से ही दोनों पति पत्नी के बीच अक्सर झगड़ा होता रहता था। प्रीति अपने पिता के घर आ जाती थी।  13 जनवरी 2015 को भी प्रीति अपने पिता के घर कैथल आई हुई थी। जिसे बुलाने के लिए छत्रपाल गया था। जहां प्रीति के भाई श्योराज व बदन सिंह पुत्र ओमप्रकाश ने अपनी बहन को भेजने से पहले शादी में दिया गया जेवर मांगा। 
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जिसको लेकर साले बहनोई में विवाद हो गया। इसी विवाद में श्योराज व बदन सिंह ने छत्रपाल के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी। जिससे में वह बुरी तरह से झुलस गया था। उपचार के लिए उसे मुरादाबाद के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसने मजिस्ट्रेट के समक्ष मृत्यु पूर्व अपने बयान दर्ज कराए और घटना की पुष्टि की थी।

उक्त मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्ञानेंद्र सिंह यादव की अदालत में की गई। जहां बचाव पक्ष का कहना था कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। उन्होंने छत्रपाल को नहीं जलाया। 

वहीं सरकार की ओर से पैरवी करते हुए सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र सिंह कश्यप ने कहा कि मृतक ने मृत्यु पूर्व अपने बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए थे। जिसमें उसने घटना की पुष्टि की थी।  अदालत ने दोनों आरोपियों को घटना का दोषी करार देते हुए दोनों को आजीवन कारावास के साथ साथ प्रत्येक पर बीस हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई 
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