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22 घंटे की मशक्कत से निकला जलकुंभी में फंसा तेंदुआ, डीयर पार्क में तोड़ा दम
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कांठ (मुरादाबाद)। ग्रामीणों के घेरे से भाग कर गांगन नदी की जलकुंभी में फंसे तेंदुए को करीब 22 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बाहर निकाला गया। तेंदुए के शरीर का पिछला हिस्सा काम नहीं कर रहा था। सोमवार तड़के वन विभाग की टीम उसे डीयर पार्क मुरादाबाद ले आई। वहां उपचार के दौरान करीब दस बजे उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के लिए वन विभाग की टीम मृत तेंदुए को इंडियन वेट्रिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) बरेली ले गई।
ज्ञात हो कि मुरादाबाद और अमरोहा जनपद की सीमा से गुजर रही गांगन नदी के किनारे रविवार सुबह करीब छह बजे गांव मल्हपुर खईया नजराना के कुछ किसानों ने तेंदुए को देखा था। इसके बाद भारी संख्या में ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने तेंदुए की घेराबंदी की लेकिन वह भाग निकला और कुछ दूरी पर गांगन नदी की जलकुंभी में फंस गया। ग्रामीणों की सूचना पर जिला वन अधिकारी सूरज अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। साथ ही अमरोहा जनपद की वन विभाग की टीम भी पहुंच गई। दोनों टीमों ने पूरी रात के साझा प्रयास से 22 घंटे बाद सफलता पाई। सोमवार तड़के करीब चार बजे जेसीबी से गांगन नदी में रास्ता बनवाकर जलकुंभी में फंसे तेंदुए को बाहर निकाला गया। चिकित्सकों ने उसका परीक्षण किया और पाया कि तेंदुए के शरीर का पीछे का हिस्सा काम नहीं कर रहा था। उपचार के लिए उसे मुरादाबाद के डीयर पार्क लाया गया, यहां सोमवार सुबह करीब 10 बजे उसकी मौत हो गई। इसकी जानकारी डीएफओ सूरज को दी गई। उन्होंने वन क्षेत्राधिकारी सरोप सिंह रावत, डिप्टी रेंजर कांठ वीरेंद्र सिंह टीम केे साथ मृत तेंदुए पोस्टमार्टम के लिए भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान केंद्र (आईवीआरआई) बरेली भेजा। दोपहर बाद शव का पोस्टमार्टम हुआ।
लकवे के कारण आधा धड़ निष्क्रिय होने का अनुमान
कांठ। वन क्षेत्राधिकारी मुरादाबाद सरोप सिंह रावत ने बताया कि ऐसा लगा रहा था कि जैसे ज्यादा देर पानी में रहने के कारण लकवे से तेंदुए का आधा धड़ निष्क्रिय हो गया। वहीं डिप्टी रेंजर कांठ वीरेंद्र सिंह का कहना है कि यदि किसी ने तेंदुए को लाठी-डंडों से पीटा है तो इसकी भी जांच की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यदि इसकी पुष्टि होती है तो संबंधितों के खिलाफ मुकदमा कराया जाएगा। संवाद
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जेसीबी से रास्ता बनाना था अंतिम विकल्प
कांठ। वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर तेंदुए को बाहर निकलने के लिए काफी प्रयास किए। जलकुंभी के पास जाल लगाया गया था। इसी के साथ एक पिंजड़ा मुरादाबाद और दूसरा पिंजड़ा अमरोहा जनपद की सीमा में लगाया था। तेंदुए के लिए नदी में लकड़ियों की बल्लियों से एक अस्थायी रास्ता भी बनाया
था। जिससे तेंदुआ स्वयं इन बल्लियों के सहारे निकल सके। शरीर काम न करने के कारण वह निकल नहीं पाया। अंत में जेसीबी से नदी में रास्ता बनाया गया और यहां झाड़ियों व जलकुंभी को हटवाया गया, तब कहीं जाकर तेंदुए को निकाला जा सका। संवाद
वर्जन
22 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के बाद तेंदुए को तो नदी की जलकुंभी से बाहर निकाल लिया गया लेकिन दुख की बात है कि उसकी जान नहीं बच पाई। तेंदुए के पीछे का आधा धड़ काम नहीं कर रहा था। डीयर पार्क लाकर तेंदुए का उपचार भी कराया गया, लेकिन इसके बद भी उसकी मौत हो गई।
- सूरज, जिला वन अधिकारी
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ज्ञात हो कि मुरादाबाद और अमरोहा जनपद की सीमा से गुजर रही गांगन नदी के किनारे रविवार सुबह करीब छह बजे गांव मल्हपुर खईया नजराना के कुछ किसानों ने तेंदुए को देखा था। इसके बाद भारी संख्या में ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने तेंदुए की घेराबंदी की लेकिन वह भाग निकला और कुछ दूरी पर गांगन नदी की जलकुंभी में फंस गया। ग्रामीणों की सूचना पर जिला वन अधिकारी सूरज अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। साथ ही अमरोहा जनपद की वन विभाग की टीम भी पहुंच गई। दोनों टीमों ने पूरी रात के साझा प्रयास से 22 घंटे बाद सफलता पाई। सोमवार तड़के करीब चार बजे जेसीबी से गांगन नदी में रास्ता बनवाकर जलकुंभी में फंसे तेंदुए को बाहर निकाला गया। चिकित्सकों ने उसका परीक्षण किया और पाया कि तेंदुए के शरीर का पीछे का हिस्सा काम नहीं कर रहा था। उपचार के लिए उसे मुरादाबाद के डीयर पार्क लाया गया, यहां सोमवार सुबह करीब 10 बजे उसकी मौत हो गई। इसकी जानकारी डीएफओ सूरज को दी गई। उन्होंने वन क्षेत्राधिकारी सरोप सिंह रावत, डिप्टी रेंजर कांठ वीरेंद्र सिंह टीम केे साथ मृत तेंदुए पोस्टमार्टम के लिए भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान केंद्र (आईवीआरआई) बरेली भेजा। दोपहर बाद शव का पोस्टमार्टम हुआ।
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लकवे के कारण आधा धड़ निष्क्रिय होने का अनुमान
कांठ। वन क्षेत्राधिकारी मुरादाबाद सरोप सिंह रावत ने बताया कि ऐसा लगा रहा था कि जैसे ज्यादा देर पानी में रहने के कारण लकवे से तेंदुए का आधा धड़ निष्क्रिय हो गया। वहीं डिप्टी रेंजर कांठ वीरेंद्र सिंह का कहना है कि यदि किसी ने तेंदुए को लाठी-डंडों से पीटा है तो इसकी भी जांच की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यदि इसकी पुष्टि होती है तो संबंधितों के खिलाफ मुकदमा कराया जाएगा। संवाद
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जेसीबी से रास्ता बनाना था अंतिम विकल्प
कांठ। वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर तेंदुए को बाहर निकलने के लिए काफी प्रयास किए। जलकुंभी के पास जाल लगाया गया था। इसी के साथ एक पिंजड़ा मुरादाबाद और दूसरा पिंजड़ा अमरोहा जनपद की सीमा में लगाया था। तेंदुए के लिए नदी में लकड़ियों की बल्लियों से एक अस्थायी रास्ता भी बनाया
था। जिससे तेंदुआ स्वयं इन बल्लियों के सहारे निकल सके। शरीर काम न करने के कारण वह निकल नहीं पाया। अंत में जेसीबी से नदी में रास्ता बनाया गया और यहां झाड़ियों व जलकुंभी को हटवाया गया, तब कहीं जाकर तेंदुए को निकाला जा सका। संवाद
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22 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के बाद तेंदुए को तो नदी की जलकुंभी से बाहर निकाल लिया गया लेकिन दुख की बात है कि उसकी जान नहीं बच पाई। तेंदुए के पीछे का आधा धड़ काम नहीं कर रहा था। डीयर पार्क लाकर तेंदुए का उपचार भी कराया गया, लेकिन इसके बद भी उसकी मौत हो गई।
- सूरज, जिला वन अधिकारी