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Moradabad News: आदमखोर हुए तेंदुए...पंद्रह दिन में दो महिलाओं को मार डाला, 17 लोगों पर हमले

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 19 Aug 2026 02:37 AM IST
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Leopards turn man-eaters... two women killed and 17 people attacked in fifteen days.
मुरादाबाद। तेंदुए आदमखोर हो गए हैं। ठाकुरद्वारा में पंद्रह दिनों के भीतर तेंदुओं ने दो महिलाओं की जान ने ली जबकि एक जुलाई से 15 अगस्त तक 17 लोगों पर हमले किए हैं। हालांकि पांच तेंदुए वन विभाग के पिंजरे में कैद भी हो गए लेकिन खेतों के आसपास लगातार इनकी मौजूदगी से दहशत बढ़ती जा रही है। वन विभाग ने 16 पिंजरे लगाए हुए हैं। विभाग मान रहा है कि ठाकुरद्वारा क्षेत्र में 30 तेंदुए हैं।
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पिछले करीब एक महीने में ठाकुरद्वारा और डिलारी क्षेत्र में तेंदुओं की मौजूदगी और हमलों ने ग्रामीणों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। लालापुर पीपलसाना में तीन अगस्त को तेंदुए ने संतोष देवी 45) की जान ले ली थी। वह खेत में चारा काट रहीं थीं। वहीं मंगलवार को ठाकुरद्वारा के बहापुर बलिया गांव में खेत पर काम कर रही ब्रह्मो देवी (55) पर हमला कर दिया। ब्रह्मो देवी की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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इन गांवों में हुए हमले
एक जुलाई को गोपालपुर, ठाकुरद्वारा में खेत में चारा लेने गई 17 वर्षीय सानिया पर तेंदुए ने हमला किया
पांच जुलाई को बीचपुरी असगरीपुर में तेंदुआ किसान के घर में घुस आया
11 जुलाई को डिलारी क्षेत्र में आठ वर्षीय आयुष पर खेत में तेंदुए ने हमला किया
19 जुलाई को राईभूड़, ठाकुरद्वारा में चारा काट रही मंजू पर तेंदुए ने हमला किया
20 जुलाई को राईभूड़ में फिर तेंदुआ दिखा और हमले का प्रयास किया
25 जुलाई को पीपली अहीर, ठाकुरद्वारा में तेंदुआ गांव में घुसा
3 अगस्त को लालापुर पीपलसाना में तेंदुए ने महिला का मार डाला
7 अगस्त को तेंदुए ने मलकपुर सेमली में तीन लोगों पर हमला किया।
12 अगस्त को मलकपुर सेमली में खेत में खाद डाल रहे पुष्पेंद्र पर हमला किया
(वन विभाग के रिकार्ड के मुताबिक 17 हमले हुए हैं)



सिर्फ पिंजरा नहीं, पहचान भी जरूरी

वन्यजीव प्रबंधन में किसी हमलावर जानवर की पहचान सबसे अहम कड़ी है। कैमरा ट्रैप, हमले के स्थान से साक्ष्य और गतिविधियों की निगरानी से यह साबित किया जा सकता है कि कौन सा जानवर संघर्ष में शामिल है। राष्ट्रीय स्तर की मानक प्रक्रिया में भी समस्या पैदा करने वाले बड़े बिल्ली प्रजाति के जानवर की पहचान के लिए कैमरा ट्रैप और घटनास्थल के साक्ष्यों पर जोर दिया गया है। ठाकुरद्वारा में अब चुनौती केवल तेंदुए पकड़ने की नहीं, बल्कि यह साबित करने की है कि पकड़ा गया तेंदुआ वही है या नहीं जिसने हमला किया था। मंगलवार की मौत के बाद ग्रामीणों के मन में यही सबसे बड़ा सवाल है। पांच तेंदुए पिंजरों में पहुंच चुके हैं, लेकिन अगर खेतों में मौत का खतरा अब भी मौजूद है तो अभियान की सफलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि डीएफओ डॉ. विनय पांडे का कहना है कि तेंदुए की पहचान वास्तव में मुश्किल काम है लेकिन लालापुर पीपलसाना और मलकपुर सेमली में तेंदुए उन्हीं स्थानों पर लगे पिंजरों में फंसे हैं, जहां उन्होंने हमला किया था। अन्य तेंदुओं अपेक्षा उनका व्यवहार ज्यादा हमलावर था, इसलिए उन्हें आदमखोर माना जा रहा है।
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