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Moradabad News: श्रमिक संगठनों ने वेतन और आठ घंटे का कार्यदिवस लागू करने को लेकर भरी हुंकार
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मुरादाबाद। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर श्रमिक संगठनों ने 15वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम वेतन सभी संस्थानों में लागू करने की मांग उठाई। आरोप लगाया कि कुछ संस्थान आठ की जगह 12 घंटे का कार्य दिवस संचालित कर रहे हैं। इस मामले में ट्रेड यूनियन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से वेतन पुनरीक्षण की मांग की हैं।
श्रमिक नेता रोहिताश राजपूत ने बताया कि मई दिवस पर जिला प्रशासन ने शुक्रवार को शहर में जुलूस निकालने की इजाजत नहीं दी। इसी कारण श्रमिक संगठनों के केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साझा मंच के माध्यम से कंपनीबाग में सभा की। इस दौरान आयोजित श्रमिकों की सभा के दौरान सर्व सम्मति से पारित प्रस्ताव किया गया। आरोप लगाया कि प्रदेश में वर्ष 2014 से मजदूरों को मिलने वाले न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण नहीं किया गया है।
इस वजह से मजदूरों की आर्थिक स्थिति असहनीय हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के घोषित उद्देश्य 8 घंटे का कार्य दिवस का ज्यादातर संस्थान उल्लंघन कर रहे है। श्रमिकों को 8 घंटे की जगह 12 और कहीं 18 घंटे तक प्रतिदिन काम लिया जा रहा है। काम करने के एवज में डबल रेट से जो ओवर टाइम मिलना चाहिए, वह भी नहीं दिया जाता है।
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नोएडा, गाजियाबाद और अन्य शहरों में हुए मजदूर आंदोलन के बाद सरकार ने श्रमिकों को मिलने वाले न्यूनतम वेतन में तदर्थ वृद्धि की घोषणा की है। यह वेतन वृद्धि आवश्यकता से बहुत कम है। इस मामले में यूनियन के नेताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम स्निग्धा चतुर्वेदी को दिया।
बताया कि न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण के लिए केंद्रीय श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों को लेकर शीघ्र ही कमेटी का गठन किया जाना चाहिए। श्रमिक विरोधी चार श्रम संहिताएं सरकार को तुरंत वापस लेना होगा। आशा, आंगनबाड़ी सहित सभी स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
इस दौरान श्रमिक नेता रोहितास राजपूत, विजयपाल सिंह, थान सिंह, निर्मला पाल, चमनआरा, नीतू गोस्वामी, लता सागर, भूरी देवी, विपिन कुमार, चंद्रपाल आजाद, सुरेश कुमार, इस्लाम अली, शरीफ अहमद, रजन नंदा आदि मौजूद थे।
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श्रमिक नेता रोहिताश राजपूत ने बताया कि मई दिवस पर जिला प्रशासन ने शुक्रवार को शहर में जुलूस निकालने की इजाजत नहीं दी। इसी कारण श्रमिक संगठनों के केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साझा मंच के माध्यम से कंपनीबाग में सभा की। इस दौरान आयोजित श्रमिकों की सभा के दौरान सर्व सम्मति से पारित प्रस्ताव किया गया। आरोप लगाया कि प्रदेश में वर्ष 2014 से मजदूरों को मिलने वाले न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण नहीं किया गया है।
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इस वजह से मजदूरों की आर्थिक स्थिति असहनीय हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के घोषित उद्देश्य 8 घंटे का कार्य दिवस का ज्यादातर संस्थान उल्लंघन कर रहे है। श्रमिकों को 8 घंटे की जगह 12 और कहीं 18 घंटे तक प्रतिदिन काम लिया जा रहा है। काम करने के एवज में डबल रेट से जो ओवर टाइम मिलना चाहिए, वह भी नहीं दिया जाता है।
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नोएडा, गाजियाबाद और अन्य शहरों में हुए मजदूर आंदोलन के बाद सरकार ने श्रमिकों को मिलने वाले न्यूनतम वेतन में तदर्थ वृद्धि की घोषणा की है। यह वेतन वृद्धि आवश्यकता से बहुत कम है। इस मामले में यूनियन के नेताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम स्निग्धा चतुर्वेदी को दिया।
बताया कि न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण के लिए केंद्रीय श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों को लेकर शीघ्र ही कमेटी का गठन किया जाना चाहिए। श्रमिक विरोधी चार श्रम संहिताएं सरकार को तुरंत वापस लेना होगा। आशा, आंगनबाड़ी सहित सभी स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
इस दौरान श्रमिक नेता रोहितास राजपूत, विजयपाल सिंह, थान सिंह, निर्मला पाल, चमनआरा, नीतू गोस्वामी, लता सागर, भूरी देवी, विपिन कुमार, चंद्रपाल आजाद, सुरेश कुमार, इस्लाम अली, शरीफ अहमद, रजन नंदा आदि मौजूद थे।