{"_id":"61ba3d60aa9826087b0634a9","slug":"kotdar-sitting-on-hand-waiting-for-salt-moradabad-news-mbd4127627101","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथ पर हाथ धरे बैठे कोटेदार, कर रहे नमक का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथ पर हाथ धरे बैठे कोटेदार, कर रहे नमक का इंतजार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद। खाद्यान्न के साथ मुफ्त तेल, चना और नमक वितरण की व्यवस्था चार दिन बाद भी पटरी पर नहीं आ सकी है। हैंडलिंग की व्यवस्था देख रहा नैफेड बीते दो दिनों में मुरादाबाद नमक की खेप भेजने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था ही नहीं कर सका है।इसके चलते बीते दो दिनों से नमक की आवक जिले में नहीं हो सकी है। उपलब्धता की बात करें तो जिले में अभी तक मात्र 61 प्रतिशत ही नमक पहुंच सका है। जिन्हें करीब 50 फीसदी दुकानों पर पहुंचा दिया गया है। जिले की करीब 630 उचित दर विक्रेता नमक के इंतजार में जहां हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, वहीं ढाई लाख से अधिक राशनकार्ड धारकों को भी नमक के चक्कर में खाद्यान नहीं मिल पा रहा है। इससे उनमें वितरण व्यवस्था को लेकर रोष बढ़ता जा रहा है।
जिले में 5.50 लाख राशनकार्ड धारक हैं। जिन्हें जिले की 1235 उचित दर विक्रेताओं (कोटेदारों) के माध्यम से खाद्यान्न का वितरण किया जाता है। इन कार्ड धारकों में 30090 राशनकार्ड धारक ऐसे हैं जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सरकार ने दिसंबर माह के पहले चक्र में खाद्यान्न (गेहूं व चावल) के साथ एक किलो चना, एक किलो रिफाइंड तथा एक किलो आयोडाइज्ड नमक का वितरण 12 दिसंबर से 20 दिसंबर तक किया जाना है।
शहर से सटी ग्राम पंचायत सोनकपुर देहात की कोटे की दुकान 12 दिसंबर को खुलने के बाद से अभी तक बंद है। ग्रामीणों ने बताया कि मुफ्त खाद्यान्न की आस में वह लोग प्रतिदिन सुबह कोटे की दुकान कामकाज छोड़ कर आते हैं और शटर बंद देख निराश होकर लौट जाते हैं। कोटेदार तुफैल अहमद ने बताया कि पिछले तीन दिनों से नमक के अभाव में वितरण कार्य ठप है।
विज्ञापन
सुबह गोदाम पर भी करीब 100 कोटेदार नमक उठान के लिए पहुंचे, लेकिन वहां पहुंच उन्हें जानकारी मिली की मेरठ से ही नमक की खेप पिछले दो दिनों से नहीं आई है। जिसके बाद वह मायूस होकर लौट गए। ऐसा नहीं कि नमक अभाव में सिर्फ सोनकपुर देहात स्थित कोटे की दुकान बंद है बल्कि जिले की करीब 630 कोटेदारों की दुकानों पर नमक न पहुंच पाने के कारण कोटेदार दुकान बंद कर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। इनसे जुड़े करीब 2.50 लाख से अधिक उपभोक्ता भी मुफ्त खाद्यान्न, तेल, चना व नमक के चक्कर में कोटे की दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं।
उधर गुजरात से रैक के माध्यम से मेरठ पहुंचा नमक न तो मंगलवार को मुरादाबाद में ट्रकों के माध्यम से पहुंच सका और न ही बुधवार को। हैंडलिंग कार्य का जिम्मा लिए में नैफेड को ट्रांसपोर्टिंग की व्यवस्था न हो पाने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। जिला पूर्ति अधिकारी अजय प्रताप सिंह ने भी बताया कि ट्रक उपलब्ध न हो पाने के कारण नमक यहां नहीं पहुंच पाया है।
उन्होंने बताया कि बुधवार को इस मामले में उन्होंने उच्चाधिकारियों से बात की है। साथ ही मुरादाबाद से स्पेशल मैसेंजर भेज कर मेरठ में ट्रकों की व्यवस्था कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को नमक मुरादाबाद पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने स्वीकार किया कि अभी तक जिले में करीब 60 फीसदी नमक ही पहुंच सका है।
जिन्हें जिले के आधे से भी कम उचित दर विक्रेताओं के यहां भेजा जा सका है। अभी भी जिले में करीब 630 कोटेदारों की दुकानों पर नमक न पहुंचने के कारण वहां वितरण व्यवस्था ठप है। इसके चलते उनसे जुड़े करीब 2.50 लाख से अधिक उपभोक्ता खाद्यान्न की आस में कोटेदारों की दुकान के चक्कर लगा रहे हैं।
मंडल का रामपुर जिला वितरऋण में सबसे पीछे
मुरादाबाद। खाद्यान्न के साथ एक किलो चना, नमक व रिफाइंड की मुफ्त वितरण व्यवस्था का हाल सिर्फ मुरादाबाद में ही बुरा नहीं नहीं है बल्कि प्रदेश के अधिकांश स्थानों जिलों की स्थिति इससे कहीं अधिक बुरी है। मंडल में रामपुर की स्थिति सबसे अधिक खराब है। वहां बीते चार दिन में मात्र 13,65 फीसदी उपभोक्ताओं को ही मुफ्त राशन का वितरण हो सका है।
मुरादाबाद मंडल के संभल जिले की स्थिति सबसे बेहतर है। 49 फीसदी उपभोक्ताओं को वितरण के साथ यह जिला प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। वहीं मुरादाबाद 46.74 फीसदी कार्ड धारकों को खाद्यान्न वितरण कर प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। 38.60 फीसदी वितरण के साथ अमरोहा प्रदेश में सातवें तथा 31.20 फीसदी वितरण के साथ बिजनौैर प्रदेश में दसवें स्थान पर है। रामपुर जिले में कुल 13.65 फीसदी उपभोक्ताओं को ही खाद्यान्न वितरण किया जा सका है। वह प्रदेश में 21 वें स्थान पर है।
विज्ञापन
जिले में 5.50 लाख राशनकार्ड धारक हैं। जिन्हें जिले की 1235 उचित दर विक्रेताओं (कोटेदारों) के माध्यम से खाद्यान्न का वितरण किया जाता है। इन कार्ड धारकों में 30090 राशनकार्ड धारक ऐसे हैं जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सरकार ने दिसंबर माह के पहले चक्र में खाद्यान्न (गेहूं व चावल) के साथ एक किलो चना, एक किलो रिफाइंड तथा एक किलो आयोडाइज्ड नमक का वितरण 12 दिसंबर से 20 दिसंबर तक किया जाना है।
विज्ञापन
शहर से सटी ग्राम पंचायत सोनकपुर देहात की कोटे की दुकान 12 दिसंबर को खुलने के बाद से अभी तक बंद है। ग्रामीणों ने बताया कि मुफ्त खाद्यान्न की आस में वह लोग प्रतिदिन सुबह कोटे की दुकान कामकाज छोड़ कर आते हैं और शटर बंद देख निराश होकर लौट जाते हैं। कोटेदार तुफैल अहमद ने बताया कि पिछले तीन दिनों से नमक के अभाव में वितरण कार्य ठप है।
विज्ञापन
सुबह गोदाम पर भी करीब 100 कोटेदार नमक उठान के लिए पहुंचे, लेकिन वहां पहुंच उन्हें जानकारी मिली की मेरठ से ही नमक की खेप पिछले दो दिनों से नहीं आई है। जिसके बाद वह मायूस होकर लौट गए। ऐसा नहीं कि नमक अभाव में सिर्फ सोनकपुर देहात स्थित कोटे की दुकान बंद है बल्कि जिले की करीब 630 कोटेदारों की दुकानों पर नमक न पहुंच पाने के कारण कोटेदार दुकान बंद कर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। इनसे जुड़े करीब 2.50 लाख से अधिक उपभोक्ता भी मुफ्त खाद्यान्न, तेल, चना व नमक के चक्कर में कोटे की दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं।
उधर गुजरात से रैक के माध्यम से मेरठ पहुंचा नमक न तो मंगलवार को मुरादाबाद में ट्रकों के माध्यम से पहुंच सका और न ही बुधवार को। हैंडलिंग कार्य का जिम्मा लिए में नैफेड को ट्रांसपोर्टिंग की व्यवस्था न हो पाने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। जिला पूर्ति अधिकारी अजय प्रताप सिंह ने भी बताया कि ट्रक उपलब्ध न हो पाने के कारण नमक यहां नहीं पहुंच पाया है।
उन्होंने बताया कि बुधवार को इस मामले में उन्होंने उच्चाधिकारियों से बात की है। साथ ही मुरादाबाद से स्पेशल मैसेंजर भेज कर मेरठ में ट्रकों की व्यवस्था कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को नमक मुरादाबाद पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने स्वीकार किया कि अभी तक जिले में करीब 60 फीसदी नमक ही पहुंच सका है।
जिन्हें जिले के आधे से भी कम उचित दर विक्रेताओं के यहां भेजा जा सका है। अभी भी जिले में करीब 630 कोटेदारों की दुकानों पर नमक न पहुंचने के कारण वहां वितरण व्यवस्था ठप है। इसके चलते उनसे जुड़े करीब 2.50 लाख से अधिक उपभोक्ता खाद्यान्न की आस में कोटेदारों की दुकान के चक्कर लगा रहे हैं।
मंडल का रामपुर जिला वितरऋण में सबसे पीछे
मुरादाबाद। खाद्यान्न के साथ एक किलो चना, नमक व रिफाइंड की मुफ्त वितरण व्यवस्था का हाल सिर्फ मुरादाबाद में ही बुरा नहीं नहीं है बल्कि प्रदेश के अधिकांश स्थानों जिलों की स्थिति इससे कहीं अधिक बुरी है। मंडल में रामपुर की स्थिति सबसे अधिक खराब है। वहां बीते चार दिन में मात्र 13,65 फीसदी उपभोक्ताओं को ही मुफ्त राशन का वितरण हो सका है।
मुरादाबाद मंडल के संभल जिले की स्थिति सबसे बेहतर है। 49 फीसदी उपभोक्ताओं को वितरण के साथ यह जिला प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। वहीं मुरादाबाद 46.74 फीसदी कार्ड धारकों को खाद्यान्न वितरण कर प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। 38.60 फीसदी वितरण के साथ अमरोहा प्रदेश में सातवें तथा 31.20 फीसदी वितरण के साथ बिजनौैर प्रदेश में दसवें स्थान पर है। रामपुर जिले में कुल 13.65 फीसदी उपभोक्ताओं को ही खाद्यान्न वितरण किया जा सका है। वह प्रदेश में 21 वें स्थान पर है।