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Moradabad News: संस्कृत स्कूल के नाम पर सिर्फ दो कमरे... पक्की छत व शौचालय नहीं
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मुरादाबाद। अंबिका प्रसाद इंटर कॉलेज परिसर में संचालित शारदा संस्कृत माध्यमिक विद्यालय, जिसे वर्ष 1967 में मान्यता मिली थी, आज भी बदहाली का प्रतीक बना हुआ है। कागजों में कक्षा 6 से 12 तक संचालित यह विद्यालय जमीनी हकीकत में दो शेड के कमरों में सिमटा है, जिन पर पक्की छत तक नहीं है। शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा तक यहां नहीं है। कार्यालय भी उन्हीं दो कमरों में चलता है। प्रबंधक का कहना है कि भवन निर्माण के लिए प्राेजेक्ट अलंकार के तहत प्रस्ताव भेजा गया है।
लिंटर नहीं होने की वजह से कमरों पर पड़े शेड में ही विद्यार्थियों को बैठना पड़ता है। विद्यालय में सबसे अधिक परेशानी गर्मी के समय होती है। शिक्षकों का कहना है कि कमरों में सिर्फ पंखे लगे हैं, जो टिन शेड की गर्मी के आगे बेअसर हैं। पहले पास में पीपल का बड़ा पेड़ था, जिससे कुछ राहत हो जाती थी, अब वह भी नहीं है। विद्यालय में कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाएं संचालित की जा रही थीं लेकिन इस सत्र से कक्षा 6 से आठ तक की कक्षाओं का संचालन भी शुरू किया गया है। विद्यालय में कक्षाएं तो बढ़ा दी गईं लेकिन संसाधन और सुविधाएं नहीं बढ़ीं। इस सत्र में 130 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें 25 छात्राएं हैं। नियमित उपस्थिति महज 20-25 छात्रों की रहती है। कक्षा 6, 7 और 8 में तो कुल तीन ही नए दाखिले हैं। प्रधानाचार्य मनोज माथुर ने कहा कि प्रोजेक्ट अलंकार के तहत दो कमरे, शौचालय और कार्यालय बनवाने की योजना पिछले साल से प्रस्तावित थी लेकिन इसके लिए न्यूनतम छात्र संख्या 115 होनी चाहिए थी। शिक्षकों का कहना है कि यह छात्र संख्या भी घर-घर जाकर बढ़ाई है।
एक भी स्थायी शिक्षक नहीं
विद्यालय में चार शिक्षक तैनात हैं लेकिन वह सभी मानदेय पर हैं। विद्यालय में वर्ष 2018-19 से एक भी स्थायी शिक्षक नहीं हैं। प्रधानाचार्य मनोज माथुर ने बताया कि उन्हें प्रधानाचार्य पद की जिम्मेदारी इसी वर्ष मार्च माह से मिली है। उन्होंने कहा कि इससे पहले रिचा शर्मा अटैचमेंट पर थीं।
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वर्जन...
विद्यालय शुरू से ही ऊपरी मंजिल पर दो कमरों में चल रहा है। विद्यार्थी और स्टॉफ इंटर कॉलेज की सुविधाओं का ही उपयोग करते हैं। अलग से फंड नहीं है जिससे कमरे बनवा सकें। अभी प्रोजेक्ट अलंकार के तहत चार कमरे, शौचालय बनवाने का प्रस्ताव विभाग को भेजा था। विभाग ने आपत्ति लगाकर उसे वापस कर दिया था। 15 दिन पहले उस आपत्ति को निस्तारित करते हुए वापस आवेदन किया है। -पंडित श्याम मोहन, प्रबंधक, शारदा संस्कृत माध्यमिक विद्यालय
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लिंटर नहीं होने की वजह से कमरों पर पड़े शेड में ही विद्यार्थियों को बैठना पड़ता है। विद्यालय में सबसे अधिक परेशानी गर्मी के समय होती है। शिक्षकों का कहना है कि कमरों में सिर्फ पंखे लगे हैं, जो टिन शेड की गर्मी के आगे बेअसर हैं। पहले पास में पीपल का बड़ा पेड़ था, जिससे कुछ राहत हो जाती थी, अब वह भी नहीं है। विद्यालय में कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाएं संचालित की जा रही थीं लेकिन इस सत्र से कक्षा 6 से आठ तक की कक्षाओं का संचालन भी शुरू किया गया है। विद्यालय में कक्षाएं तो बढ़ा दी गईं लेकिन संसाधन और सुविधाएं नहीं बढ़ीं। इस सत्र में 130 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें 25 छात्राएं हैं। नियमित उपस्थिति महज 20-25 छात्रों की रहती है। कक्षा 6, 7 और 8 में तो कुल तीन ही नए दाखिले हैं। प्रधानाचार्य मनोज माथुर ने कहा कि प्रोजेक्ट अलंकार के तहत दो कमरे, शौचालय और कार्यालय बनवाने की योजना पिछले साल से प्रस्तावित थी लेकिन इसके लिए न्यूनतम छात्र संख्या 115 होनी चाहिए थी। शिक्षकों का कहना है कि यह छात्र संख्या भी घर-घर जाकर बढ़ाई है।
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एक भी स्थायी शिक्षक नहीं
विद्यालय में चार शिक्षक तैनात हैं लेकिन वह सभी मानदेय पर हैं। विद्यालय में वर्ष 2018-19 से एक भी स्थायी शिक्षक नहीं हैं। प्रधानाचार्य मनोज माथुर ने बताया कि उन्हें प्रधानाचार्य पद की जिम्मेदारी इसी वर्ष मार्च माह से मिली है। उन्होंने कहा कि इससे पहले रिचा शर्मा अटैचमेंट पर थीं।
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वर्जन...
विद्यालय शुरू से ही ऊपरी मंजिल पर दो कमरों में चल रहा है। विद्यार्थी और स्टॉफ इंटर कॉलेज की सुविधाओं का ही उपयोग करते हैं। अलग से फंड नहीं है जिससे कमरे बनवा सकें। अभी प्रोजेक्ट अलंकार के तहत चार कमरे, शौचालय बनवाने का प्रस्ताव विभाग को भेजा था। विभाग ने आपत्ति लगाकर उसे वापस कर दिया था। 15 दिन पहले उस आपत्ति को निस्तारित करते हुए वापस आवेदन किया है। -पंडित श्याम मोहन, प्रबंधक, शारदा संस्कृत माध्यमिक विद्यालय