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जिपं सदस्य के जाति प्रमाण पत्र को बताया गलत, निरस्त करने की मांग
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मुरादाबाद। वार्ड-17 से जिपं सदस्य निर्वाचित शशिबाला समेत मुस्लिमों से विवाह कर चुकी दो महिलाओं के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त करने की मांग उठाई गई है। इस मामले में शुक्रवार को एक ग्रामीण ने डीएम के समक्ष पेश होकर इस आशय की शिकायत की। इस पर डीएम ने संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को जांच के आदेश दिए हैं।
ब्लाक डिलारी के ग्राम सुल्तानपुर मुंडा निवासी गुलशेर शुक्रवार को कुछ अन्य ग्रामीणों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे तथा वहां डीएम के समक्ष पेश होकर उन्हें एक शिकायती प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें उन्होंने कहा है कि ग्राम दौलारा विकास खंड मूंढापांडे निवासी शशिबाला पत्नी सलीम वर्तमान में जिला पंचायत के वार्ड संख्या-17 से जिला पंचायत सदस्य हैं। उन्होंने अपना नाम शशिबाला उर्फ अर्शी रखा है। इसके अलावा तहसील ठाकुरद्वारा के विकास खंड बिलारी के ग्राम ईलर निवासी पूजा उर्फ फातमा पत्नी नफीस अहमद भी जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ चुकी हैं।
शिकायत में कहा गया है कि दोनों ही अनुसूचित जाति महिलाओं ने मुस्लिमों से विवाह के पश्चात इस्लाम धर्म को अपना लिया है। ऐसे में संविधान अनुसूचित जातियां, आदेश 1950 के अनुसार किसी जात का होते हुए भी कोई व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से भिन्न धर्म मानता है, अनुसूचित जाति का सदस्य ना समझा जाएगा। तर्क दिया कि इस आधार पर दोनों के नियम विरुद्ध जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। जिन्हें निरस्त किया जाए। उन्होेंने कहा कि पंचायत चुनाव 2021 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित जिला पंचायत सदस्य वार्ड संख्या-17 से दोनों ही महिलाओं ने नामांकन कराया था। जिसमें शशिबाला चुनाव जीत कर जिला पंचायत सदस्य भी बन गईं। इनके जाति प्रमाण पत्रों को नियम विरुद्ध बताते हुए निरस्त करने की मांग की है। डीएम ने इसकी जांच एसडीएम को सौंपी है।
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इन दोनों के द्वारा अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्रों का फायदा उठाकर आरक्षण का लाभ प्राप्त किया जा रहा है, जबकि मुस्लिमों से विवाह करने के बाद संविधान के अनुसार इन दोनों को अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है। इसकी शिकायत डीएम से की है। यदि इनके जाति प्रमाण पत्र यहां से निरस्त नहीं किए जाते हैं तो न्यायालय की शरण लूंगा।
- गुलशेर, शिकायतकर्ता
मैंने वर्ष 2016 में मुस्लिम रीति रिवाज के अनुसार स्वेच्छा से नफीस अहमद से शादी की है। दोनों लोगों की पहली शादी है। दो बच्चे भी हैं। धर्म बदलने से जाति नहीं बदलती है। मेरा जाति प्रमाणपत्र तहसील प्रशासन ने जांच पड़ताल के बाद जारी किया है। पहले भी इस तरह की कुछ लोग शिकायत कर चुके हैं। जो जांच में निराधार पाई जा चुकी हैं।
- पूजा उर्फ फातिमा
मैं अनुसूचित जाति की हूं। मैंने मुस्लिम से शादी की है। मेरे पास इसका जाति प्रमाण पत्र है। मैं लगातार दूसरी बार जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुईं हूं। अगर मेरा जाति प्रमाण पत्र गलत होता तो निर्वाचन के दौरान अधिकारी उसे स्वत: निरस्त कर देते। आरोप लगाने वाले गुलशेर को मैं नहीं जानती। आरोप निराधार है।
- शशिबाला, जिपं सदस्य
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ब्लाक डिलारी के ग्राम सुल्तानपुर मुंडा निवासी गुलशेर शुक्रवार को कुछ अन्य ग्रामीणों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे तथा वहां डीएम के समक्ष पेश होकर उन्हें एक शिकायती प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें उन्होंने कहा है कि ग्राम दौलारा विकास खंड मूंढापांडे निवासी शशिबाला पत्नी सलीम वर्तमान में जिला पंचायत के वार्ड संख्या-17 से जिला पंचायत सदस्य हैं। उन्होंने अपना नाम शशिबाला उर्फ अर्शी रखा है। इसके अलावा तहसील ठाकुरद्वारा के विकास खंड बिलारी के ग्राम ईलर निवासी पूजा उर्फ फातमा पत्नी नफीस अहमद भी जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ चुकी हैं।
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शिकायत में कहा गया है कि दोनों ही अनुसूचित जाति महिलाओं ने मुस्लिमों से विवाह के पश्चात इस्लाम धर्म को अपना लिया है। ऐसे में संविधान अनुसूचित जातियां, आदेश 1950 के अनुसार किसी जात का होते हुए भी कोई व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से भिन्न धर्म मानता है, अनुसूचित जाति का सदस्य ना समझा जाएगा। तर्क दिया कि इस आधार पर दोनों के नियम विरुद्ध जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। जिन्हें निरस्त किया जाए। उन्होेंने कहा कि पंचायत चुनाव 2021 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित जिला पंचायत सदस्य वार्ड संख्या-17 से दोनों ही महिलाओं ने नामांकन कराया था। जिसमें शशिबाला चुनाव जीत कर जिला पंचायत सदस्य भी बन गईं। इनके जाति प्रमाण पत्रों को नियम विरुद्ध बताते हुए निरस्त करने की मांग की है। डीएम ने इसकी जांच एसडीएम को सौंपी है।
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इन दोनों के द्वारा अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्रों का फायदा उठाकर आरक्षण का लाभ प्राप्त किया जा रहा है, जबकि मुस्लिमों से विवाह करने के बाद संविधान के अनुसार इन दोनों को अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है। इसकी शिकायत डीएम से की है। यदि इनके जाति प्रमाण पत्र यहां से निरस्त नहीं किए जाते हैं तो न्यायालय की शरण लूंगा।
- गुलशेर, शिकायतकर्ता
मैंने वर्ष 2016 में मुस्लिम रीति रिवाज के अनुसार स्वेच्छा से नफीस अहमद से शादी की है। दोनों लोगों की पहली शादी है। दो बच्चे भी हैं। धर्म बदलने से जाति नहीं बदलती है। मेरा जाति प्रमाणपत्र तहसील प्रशासन ने जांच पड़ताल के बाद जारी किया है। पहले भी इस तरह की कुछ लोग शिकायत कर चुके हैं। जो जांच में निराधार पाई जा चुकी हैं।
- पूजा उर्फ फातिमा
मैं अनुसूचित जाति की हूं। मैंने मुस्लिम से शादी की है। मेरे पास इसका जाति प्रमाण पत्र है। मैं लगातार दूसरी बार जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुईं हूं। अगर मेरा जाति प्रमाण पत्र गलत होता तो निर्वाचन के दौरान अधिकारी उसे स्वत: निरस्त कर देते। आरोप लगाने वाले गुलशेर को मैं नहीं जानती। आरोप निराधार है।
- शशिबाला, जिपं सदस्य