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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   IVF technique: If your age is above 45 then don worry, you can also become a mother.

आईवीएफ तकनीक: आयु 45 से अधिक है तो चिंता न करें, आप भी बन सकती हैं मां, पढ़ें डॉक्टर की सलाह

Sun, 12 May 2024 03:47 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Sun, 12 May 2024 03:47 PM IST
सार

हर महिला की ख्वाहिश मां बनने की होती है लेकिन कुछ समस्याओं के चलते वह इससे वंचित हो जाती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि अब आईवीएफ तकनीक के माध्यम से महिलाएं मां बन सकती हैं। 

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IVF technique: If your age is above 45 then don worry, you can also become a mother.
Women - फोटो : Pexel

विस्तार

मां बनना हर महिला की ख्वाहिश होती है, लेकिन कई बार कुछ शारीरिक समस्याओं की वजह से बहुत सी महिलाएं इस खुशी से वंचित रह जाती हैं। उनकी इस बेबसी को बयां नहीं किया जा सकता है। पिछले दिनों मशहूर सिंगर सिद्धू मूसेवाला की मां ने 56 वर्ष की उम्र में बेटे को जन्म देकर दोबारा मातृत्व सुख पाने में सहायक आईवीएफ तकनीक को चर्चा में ला दिया था।

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ऐसा अपने मुरादाबाद में भी हो रहा है। यहां के चिकित्सकों ने दंपतियों को 45 से 50 आयु वर्ष में इसी तकनीक के माध्यम से संतान की खुशी दिलवाई है। चिकित्सकों का कहना है कि जब महिलाएं मां बनती हैं तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू बहते हैं। इस मातृत्व दिवस पर प्रस्तुत हैं कुछ ऐसी ही कहानियां....

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हादसे ने छीने दो बेटे, आईवीएफ से मिलीं खुशियां
मुरादाबाद निवासी एक महिला के दो बेटे थे तो उन्होंने नसबंदी करवा ली थी। लेकिन एक सड़क दुर्घटना ने उनके जीवन की सारी खुशियां छींन ली। उस हादसे में उन्होंने अपने दोनों बेटों को खो दिया। वह मानसिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह से टूट गई थीं। हर वक्त अपने बेटों के जाने का गम उन्हें खाए जा रहा था।

उनके पति से उनकी यह हालत देखी नहीं गई। उन्होंने दोबारा चिकित्सकों से संपर्क किया तो उन्होंने आईवीएफ के बारे में बताया। 46 वर्ष की उम्र में महिला ने इस तकनीक के सहारे एक बेटे को जन्म दिया। अब उनका परिवार बहुत खुश है। 

हर उम्मीद के खो जाने के बाद मिली बेटी
रामपुर निवासी एक महिला की शादी को 30 वर्ष हो गए थे, लेकिन उन्हें कोई संतान नहीं हुई। मां बनने की उम्मीद छोड़ दी थी, क्योंकि उनकी उम्र 48 वर्ष हो गई थी। ऐसे में जब उन्हें आईवीएफ के बारे में पता चला तो उन्होंने चिकित्सकों से वार्ता की। चिकित्सकों ने उन्हें उम्मीद की किरण दिखाई, लेकिन महिला के इस प्रयास में पति को भरोसा नहीं था।

इसलिए शुरुआती दिनों में वह चिकित्सकों के पास नहीं आते थे। बाद में महिला की जिद करने पर वह आए और सहमति दी। चिकित्सकों ने स्टैम सेल्स से उपचार किया। जब वह गर्भवती हुईं तो फिर उनके पति ने पूरा ध्यान रखा और महिला ने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया।

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ये है आईवीएफ प्रणाली 
डॉ. मनीषा जैन के मुताबिक आईवीएफ को इन विट्रो फर्टीलाइजेशन के नाम से भी जाना जाता है। जब महिला का शरीर ऐग को फर्टिलाइज करने में सक्षम नहीं होता है, तो उसे लैब में फर्टीलाइज कराया जाता है। इसमें महिला के ऐग्स और पुरुष के स्पर्म को मिलाया जाता है।

एक बार जब इसके संयोजन से भ्रूण का निर्माण हो जाता है, तो उसे वापस महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया जाता है। आईवीएफ को हिंदी में भ्रूण प्रत्यारोपण भी कहा जाता है और आईवीएफ के द्वारा जन्में शिशु को टेस्ट ट्यूब बेबी कहा जाता है।

50 वर्ष आयु से अधिक की महिला की आईवीएफ नहीं करते हैं। मैंने 48 वर्ष की महिला को इस तकनीक से संतान सुख दिलवाया है। अब तक करीब 20 ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने 45 से 48 वर्ष की उम्र तक संतान पैदा की है। मां बनने के सुख की किसी भी दौलत आदि से तुलना नहीं की जा सकती है। -डॉ. पूनम सिंह, स्पर्श आईवीएफ

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