Iran Israel War: युद्ध की आग से उबलने लगा कच्चा तेल, शिपिंग के खर्च में उछाल से निर्यातकों की बढ़ी बेचैनी
इस्राइल-ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से मुरादाबाद के निर्यातकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। शिपिंग लागत बढ़ने और सरकार द्वारा निर्धारित सीमित रोडटेप दरों के कारण समस्याएं और गहरा गई हैं। निर्यातकों ने बताया कि लागत वृद्धि से ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और पैकेजिंग प्रभावित हो रहे हैं।
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इस्राइल-ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से निर्यातकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों के कारण शिपिंग की लागत बढ़ रही है। वहीं सरकार द्वारा निर्धारित रोडटेप की दरें सीमित हैं। इन मुद्दों को लेकर सोमवार को डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) ने मुरादाबाद के निर्यातकों के साथ ऑनलाइन बैठक की।
वहीं दूसरी ओर निर्यातकों की समस्या सुनने के लिए केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद बुधवार को मुरादाबाद आ सकते हैं। यहां एसईजेड में उनका दौरा प्रस्तावित है। ऑनलाइन बैठक में निर्यातकों के बयान और अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट्स के मुताबिक शिपिंग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड ऑयल) की कीमत एक सप्ताह में तीन प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी है।
सोमवार को कीमत 77 डॉलर प्रति बैरल रही। निर्यातकों को डर है कि स्थिति यही रही तो तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने में समय नहीं लगेगा। कारोबारियों के सामने पहली परेशानी शिपिंग और कंटेनर लॉजिस्टिक्स में बढ़ती लागत के रूप में सामने आई है। दूसरी समस्या डीजल कीमतों की वृद्धि ने पैदा कर दी है।
इससे ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और पैकेजिंग सभी काम प्रभावित हो रहे हैं। ईपीसीएच के अध्यक्ष नीरज खन्ना का कहना है कि मुरादाबाद की इकाइयां पहले ही अंतरराष्ट्रीय मंदी और मूल्य प्रतिस्पर्धा से जूझ रही हैं। नई समस्याओं ने स्थिति को और भी नाजुक बना दिया है। बैठक में ईपीसीएच के अध्यक्ष नीरज खन्ना, अवधेश अग्रवाल, शफी, रोहित ढल, एके भूषण आदि निर्यातक शामिल रहे।
20 साल पुरानी फाइल मांगकर निर्यातकों को न करें परेशान
मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (एमएचईए) के अध्यक्ष नवेदुर्रहमान ने बैठक में कहा कि निर्यातकों से 20 साल पुरानी फाइलें मांगी जा रही हैं। 2002-04 में सारा काम मैनुअल ढंग से होता था। कई चीजों का रिकॉर्ड अब उपलब्ध नहीं है। उन्होंने मांग उठाई कि दो दशक पुरानी फाइलें न मांगी जाए। जब से सारा काम ऑनलाइन हुआ है, तब तक का ब्योरा ही निर्यातकों से लिया जाए।
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रोडटेप की दरें बढ़ाने की मांग
यस के अध्यक्ष जेपी सिंह ने बैठक में कहा कि रोडटेप योजना के तहत जो टैक्स रिफंड मिलता है, वह निर्यात में लगने वाले वास्तविक खर्च का मात्र एक छोटा हिस्सा है। डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, ऐसे में रोडटेप की वर्तमान दरें निर्यातकों के लिए राहतभरी नहीं हैं। हस्तशिल्प उत्पादों पर रोडटेप दरें औसतन 0.5% से 1% के बीच हैं। वास्तविक लॉजिस्टिक और ईंधन संबंधी खर्च कई बार इससे पांच गुना तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में रोडटेप की दरें सरकार को बढ़ानी चाहिए।