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ग्राम पंचायतों में धन के दुरुपयोग की जांच एक महीने बाद भी पूरी नहीं
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मुरादाबाद। ग्राम पंचायतों में प्रशासकों द्वारा ग्राम निधि का दुरुपयोग करने पर कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने पांच जून को मंडल के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर जांच कराने को कहा था। अब तक किसी भी जिले से जांच रिपोर्ट कमिश्नरी तक नहीं पहुंची है।
25 दिसंबर 2020 को प्रधानी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायत सचिवों को प्रशासक बनाया गया। जिले के आठ ब्लाकों में 28 दिसंबर 2020 से 27 मई 2021 तक कुल 38 करोड़ रुपये की ग्राम निधि खर्च की गई है।
इसमें से 12 करोड़ रुपये की ग्राम निधि आचार संहिता के दौरान और 26 करोड़ की निधि आचार संहिता लगने से पूर्व खर्च की गई है। अमर उजाला ने गांवों में पड़ताल की तो सोनकपुर ग्राम पंचायत में कोई काम नहीं मिला, रतनपुरकलां में हैंडपंप रिबोर कराए बिना पैसा निकालने की बात सामने आई, मौढ़ा तैया में तो श्मशान के नाम पर पैसा निकाल लिया गया, लेकिन काम नहीं कराया गया। इसी तरह गांव गोट, बहादुरपुर खद्दर और बढ़ेरा में भी आधे-अधूरे काम मिले।
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यह मुद्दा उठा तो पंचायती राज विभाग में खलबली मच गई। आनन-फानन में जांच शुरू की गई, लेकिन लीपापोती के अंदाज में। जिन ग्राम पंचायतों में अनियमितताओं के खुलासे की खबर प्रकाशित की गई थी, वहां जांच के दौरान कहीं आधे-अधूरे काम मिले तो कुछ गांवों में काम ही नहीं कराए गए थे।
यहां कार्रवाई के बाद काम कराने के लिए मोहलत देकर लीपापोती की गई। ग्राम पंचायतों में घपलेबाजी की आशंका पर कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने मंडल के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर प्रशासकों के कार्यकाल में निकाली गई ग्राम निधि की धनराशि और उससे किए जाने वाले कार्यों की संपूर्ण जांच रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अब तक यह जांच रिपोर्ट कमिश्नरी कार्यालय तक नहीं पहुंची है।
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25 दिसंबर 2020 को प्रधानी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायत सचिवों को प्रशासक बनाया गया। जिले के आठ ब्लाकों में 28 दिसंबर 2020 से 27 मई 2021 तक कुल 38 करोड़ रुपये की ग्राम निधि खर्च की गई है।
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इसमें से 12 करोड़ रुपये की ग्राम निधि आचार संहिता के दौरान और 26 करोड़ की निधि आचार संहिता लगने से पूर्व खर्च की गई है। अमर उजाला ने गांवों में पड़ताल की तो सोनकपुर ग्राम पंचायत में कोई काम नहीं मिला, रतनपुरकलां में हैंडपंप रिबोर कराए बिना पैसा निकालने की बात सामने आई, मौढ़ा तैया में तो श्मशान के नाम पर पैसा निकाल लिया गया, लेकिन काम नहीं कराया गया। इसी तरह गांव गोट, बहादुरपुर खद्दर और बढ़ेरा में भी आधे-अधूरे काम मिले।
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यह मुद्दा उठा तो पंचायती राज विभाग में खलबली मच गई। आनन-फानन में जांच शुरू की गई, लेकिन लीपापोती के अंदाज में। जिन ग्राम पंचायतों में अनियमितताओं के खुलासे की खबर प्रकाशित की गई थी, वहां जांच के दौरान कहीं आधे-अधूरे काम मिले तो कुछ गांवों में काम ही नहीं कराए गए थे।
यहां कार्रवाई के बाद काम कराने के लिए मोहलत देकर लीपापोती की गई। ग्राम पंचायतों में घपलेबाजी की आशंका पर कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने मंडल के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर प्रशासकों के कार्यकाल में निकाली गई ग्राम निधि की धनराशि और उससे किए जाने वाले कार्यों की संपूर्ण जांच रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अब तक यह जांच रिपोर्ट कमिश्नरी कार्यालय तक नहीं पहुंची है।