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यूपी: एक बार फिर खाकी हुई शर्मसार, 30 हजार की रिश्वत मांगते हुए दरोगा का वीडियो, गिरफ्तार
Sat, 19 Oct 2019 05:54 AM IST
Mohit Mudgal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
Published by: Mohit Mudgal
Updated Sat, 19 Oct 2019 05:54 AM IST
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अभिनव देसवाल को कोर्ट ले जाते पुलिस वाले।
- फोटो : अमर उजाला
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नामजद मुकदमे में से तीन आरोपियों का नाम बाहर निकालने की एवज में एक दरोगा ने 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। आरोपियों में दो सगे भाई हैं। उनके पिता ने दरोगा द्वारा रिश्वत मांगे जाने का वीडियो बनाकर एसएसपी को सौंप दिया गया और कार्रवाई की मांग की गई। एसएसपी के निर्देश पर दरोगा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर सिविल लाइन पुलिस ने उसे शुक्रवार सुबह थाने से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
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एसपी सिटी अंकित मित्तल ने बताया कि पकड़ा गया दरोगा अभिनव देशवाल मुजफ्फरनगर के शाहपुर का रहने वाला है। वह आशियाना चौकी में कार्यरत था। आशियाना चौकी क्षेत्र स्थित प्रेमनगर निवासी सूरजपाल सिंह ने बृहस्पतिवार को शिकायत कर एसएसपी को बताया कि 27सितंबर को उनके घर के पास कांवड़ियों के जत्थे को एक कार ने टक्कर मार दी थी।
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उस वक्त आसपास के लोगों ने वहां जाकर कार में तोड़फोड़ कर दी थी। जिसके संबंध में सिविल लाइन थाने में करीब सवा सौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इस एफआईआर में सूरजपाल के दो बेटे अशोक सैनी और विक्की सैनी सहित रामभरोसे का बेटा रोहित सैनी भी नामजद आरोपी है।
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मामले की विवेचना आशियाना चौकी पर तैनात दरोगा अभिनव देशवाल कर रहे थे।आरोप है कि विवेचक अवैध रूप से धन वसूली कर आरोपियों के नाम एफआईआर से बाहर निकाल रहे थे। सूरजपाल ने बताया कि उनके बेटे घटना वाले दिन हल्द्वानी में थे और रोहित अपने घर पर था।
आरोप है कि विवेचक ने बुधवार को सूरजपाल को फोन कर उनके बेटों और रोहित का नाम मुकदमे से बाहर निकलवाने की बात कही और इस संबंध में मिलने के लिए आशियाना फेज दो में एक अधिवक्ता के घर पर बुलाया। वहां पर 30 हजार रुपये तीनों आरोपियों का नाम बाहर निकालने की एवज में मांगे।
जिसका वीडियो सूरजपाल के साथ मौजूद एक भाजपा नेता ने बना लिया। यह वीडियो सूरजपाल ने बृहस्पतिवार को एसएसपी को सौंपते हुए कहा कि वह दरोगा को रिश्वत नहीं दे सकते हैं। उन्होंने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। एसपी सिटी ने बताया कि एसएसपी के निर्देश पर बृहस्पतिवार देर रात इस मामले में दरोगा अभिनव देशवाल के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई। शुक्रवार सुबह आठ बजे सिविल लाइन थाने से ही दरोगा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
ना...ना कहते रिश्वत के लिए हां कह गया दरोगा
सोशल मीडिया पर दरोगा का रिश्वत मांगने का वीडियो वायरल हुआ है। जिसमें शुरूआत में उनको रिश्वत की पेशकश की गई तो वह न न कहते रहे, लेकिन करीब 15 मिनट की मान मनौव्वल के बाद वह समय आया जब उन्होंने 30 हजार रुपये में तीनों आरोपियों का नाम केस से बाहर निकालने की हामी भर दी।
इस वीडियो में एक खास बात ये भी है कि दरोगा ने तीनों आरोपियों पर कार्रवाई के लिए बताया कि उनके पास एक वीडियो है, जिसमें आरोपी दिखाई दे रहे हैं। जबकि दूसरा पक्ष कह रहा है कि वह मौके पर नहीं थे। उन्होंने दरोगा से वीडियो दिखाने के लिए भी कहा, जिस पर बात बिगड़ गई। दरोगा नाराज हो गए, उन्होंने मामले का सेटलमेंट करने से इंकार कर दिया और अधिवक्ता के घर से बाहर निकल गए। अब अधिवक्ता उनके पीछे पीछे और एक भाजपा नेता दरोगा को समझाते हुए घर से बाहर निकले।
इस दौरान अधिवक्ता ने भाजपा नेता से कहा कि उन्होंने दरोगा से बात कर ली है, 30 हजार रुपये में मामला निपट जाएगा। जबकि दूसरा पक्ष 20 हजार रुपये में मामला रफा दफा करने के लिए कह रहा था। दरोगा और अधिवक्ता के बीच कार में कुछ देर बात होती है, इसके बाद भाजपा नेता कार में बैठकर दरोगा से डील करता है।
जिसमें उनको भारतीय जनता पार्टी का वास्ता भी दिया जाता है कि पार्टी के मान सम्मान में ही सही लेकिन मामला रफा दफा कर दो। जिसके बाद दरोगा ने रिश्वत लेने के लिए हां कहते हुए 30 हजार रुपये की मांग कर दी, भाजपा नेता 25 हजार रुपये देने को कहने लगा तो दरोगा ने इंकार कर दिया। दरोगा ने कहा कि 30 हजार रुपये देने पर ही तीनों का नाम हटेगा। जिसके बाद दरोगा को तीस हजार रुपये रिश्वत देने की बात तय कर दी जाती है, रिश्वत की रकम बाद में देने का कहा जाता है।
भाजपा नेता के भाई हैं दोनों आरोपी
सूरजपाल के बेटे सुभाष सैनी भाजपा नेता हैं। वह बूथ संख्या 372 (मऊ) के अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि एफआईआर होने के बाद जब पता चला कि उनके भाइयों अशोक सैनी और विक्की सैनी के अलावा रोहित का नाम एफआईआर में है तो उन्होंने आरोप झूठे बताए। विवेचक इसके बाद भी नहीं माने। वह पहले भी कई लोगों से इस केस में रुपये ले चुके हैं लेकिन साक्ष्य न होने पर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में उन्होंने वीडियो बनाकर विवेचक का खेल उजागर करने का प्लान बनाया, जिसमें दरोगा फंस गया।