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ऑक्सीजन सिलिंडर की बढ़ी मांग, रोजाना चार से साढ़े चार हजार सिलिंडर की खपत
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मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में रोगियों के बढ़ने से ऑक्सीजन सिलिंडर की भी मांग बढ़ गई है। पहले जिले में मुश्किल से आठ सौ से एक हजार ऑक्सीजन सिंलिंडर की खपत थी। अब यह खपत दो हजार सिलिंडर तक पहुंच गई है।
महानगर में तीन ऑक्सीजन के प्लांट हैं, जिनमें हर रोज दो से तीन हजार तक सिलिंडर रीफिल हो रहे थे। ऑक्सीजन उत्पादन करने वाले उद्यमियों के अनुसार एक हजार क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन का उत्पादन प्रति घंटे किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के पहले महानगर के बड़े अस्पतालों में 60 से 80 सिलिंडर की जरूरत होती थी, लेकिन अब यह खपत तीन सौ से 350 ऑक्सीजन सिलिंडर तक पहुंच गई है। ऑक्सीजन सिलिंडर की रीफिलिंग भी महंगी हो गई है। पहले 1.5 क्यूबिक मीटर के सिलिंडर को रीफिल करने में 160 रुपये लगते थे। अब वही 200 से 220 रुपये लिए जा रहे हैं।
जिला अस्पताल में रोजाना हो रहा 100 सिलिंडरों का प्रयोग
जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर का रख रखाव करने वाले नत्थू सिंह बताते हैं कि यहां ऑक्सीजन का स्टाक फुल रहता है। 20 सिलिंडर खाली होते ही उन्हें रिफिल करा लिया जाता है। पहले दस बीस सिलिंडर की ही जरूरत होती थी, लेकिन अब रोजाना सौ सिलिंडर खाली हो रहे हैं। हालांकि, जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर का पर्याप्त स्टाक है।
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अस्पतालों में बढ़ी ऑक्सीजन की मांग
महानगर में 50 से अधिक बेड वाले अस्पतालों की संख्या दस के करीब है। कोरोना संक्रमण के इस दौर में ऑक्सीजन सिलिंडर की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ी है। कोविड अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों को ऑक्सीजन देना होता है। इस कारण हर अस्पताल में वेंटिलेटर भी फुल हो रहे हैं। यही वजह है कि 50 से अधिक बेड वाले अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत तीन सौ तक पहुंच रही है।
ऑक्सीजन सिलिंडर की उत्पादन और खपत निरंतर बढ़ रही है। करीब 80 फीसदी तक ऑक्सीजन की खपत बढ़ गई है। मुरादाबाद में फिलहाल ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। तीन प्लांट और पर्याप्त डिस्ट्रीब्यूटर होने की कारण कोई समस्या नहीं आएगी। विनय कुमार चौधरी, ऑक्सीजन सिलिंडर डिस्ट्रीब्यूटर
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महानगर में तीन ऑक्सीजन के प्लांट हैं, जिनमें हर रोज दो से तीन हजार तक सिलिंडर रीफिल हो रहे थे। ऑक्सीजन उत्पादन करने वाले उद्यमियों के अनुसार एक हजार क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन का उत्पादन प्रति घंटे किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के पहले महानगर के बड़े अस्पतालों में 60 से 80 सिलिंडर की जरूरत होती थी, लेकिन अब यह खपत तीन सौ से 350 ऑक्सीजन सिलिंडर तक पहुंच गई है। ऑक्सीजन सिलिंडर की रीफिलिंग भी महंगी हो गई है। पहले 1.5 क्यूबिक मीटर के सिलिंडर को रीफिल करने में 160 रुपये लगते थे। अब वही 200 से 220 रुपये लिए जा रहे हैं।
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जिला अस्पताल में रोजाना हो रहा 100 सिलिंडरों का प्रयोग
जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर का रख रखाव करने वाले नत्थू सिंह बताते हैं कि यहां ऑक्सीजन का स्टाक फुल रहता है। 20 सिलिंडर खाली होते ही उन्हें रिफिल करा लिया जाता है। पहले दस बीस सिलिंडर की ही जरूरत होती थी, लेकिन अब रोजाना सौ सिलिंडर खाली हो रहे हैं। हालांकि, जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर का पर्याप्त स्टाक है।
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अस्पतालों में बढ़ी ऑक्सीजन की मांग
महानगर में 50 से अधिक बेड वाले अस्पतालों की संख्या दस के करीब है। कोरोना संक्रमण के इस दौर में ऑक्सीजन सिलिंडर की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ी है। कोविड अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों को ऑक्सीजन देना होता है। इस कारण हर अस्पताल में वेंटिलेटर भी फुल हो रहे हैं। यही वजह है कि 50 से अधिक बेड वाले अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत तीन सौ तक पहुंच रही है।
ऑक्सीजन सिलिंडर की उत्पादन और खपत निरंतर बढ़ रही है। करीब 80 फीसदी तक ऑक्सीजन की खपत बढ़ गई है। मुरादाबाद में फिलहाल ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। तीन प्लांट और पर्याप्त डिस्ट्रीब्यूटर होने की कारण कोई समस्या नहीं आएगी। विनय कुमार चौधरी, ऑक्सीजन सिलिंडर डिस्ट्रीब्यूटर