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झांसी की नेपियर, गिन्नी और दीनानाथ घास खाकर भूख मिटाएंगे हिरन और खरगोश

Tue, 02 Mar 2021 03:40 AM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 02 Mar 2021 03:40 AM IST
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in wildlife of moradabad division deer and rabbits will eat jhansi napier guinea and dinanath grass
काला हिरण (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : amar ujala

वन विभाग अब मुरादाबाद मंडल की बिजनौर डिविजन स्थित वाइल्ड लाइफ में खरगोश, चीतल और हिरन के लिए नेपियर, गिन्नी और दीनानाथ घास लगाएगा। माना जाता है कि यह घास इन जानवरों को लुभाती है और ये मजे से इसे खाते हैं। इसके अलावा वन में गुलदार और तेंदुए की खोज अब ड्रोन से की जाएगी। अप्रैल से इस पर काम शुरू हो जाएगा।

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वन विभाग ने खरगोश और हिरन के भोजन के लिए नई घास लगाने की योजना बनाई है। वन विभाग मुरादाबाद वन मंडल की बिजनौर डिविजन स्थित वाइल्ड लाइफ में इनके लिए नेपियर, गिन्नी, और दीनानाथ घास लगाएगा जिससे कि ये जानवर वनों से बाहर जाकर खेतों में चरने न जाएं। उनको वाइल्ड लाइफ में ही यह चारा मिले। अप्रैल में यह घास लगाई जाएगी। यह घास झांसी के ग्रास लैंड इंस्टीट्यूट से मंगाई जाएगी। नेपियर घास एक बार लगाने के बाद पांच से छह साल तक हरी भरी रहती है। गिन्नी घास का वानस्पतिक नाम मेगार्थिसस मैक्सिमस है। इसकी लंबाई तीन से चार मीटर लंबी होती है। यह सदाबहार घास है। इसके पत्तों के सिरे तीखे और लंबे होते हैं। पशुओं के लिए दीनानाथ घास अच्छी होती है।
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ड्रोन की नजर से नहीं बच पाएंगे गुलदार और तेंदुए
घने जंगल या हरे भरे खेतों में गुलदार और तेंदुए का पता लगाने के लिए ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जाएगा।  मुरादाबाद मंडल में छह डिविजन हैं। सभी डिविजनों के लिए कैमरे खरीदे जाएंगे।
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स्टाफ की सुरक्षा होगी
गुलदार और तेंदुए के हमले से बचने के लिए स्टाफ के लिए सेफ्टी जैकेट, रैपिड एक्शन टीम, रेस्क्यू वाहन, रेस्क्यू टीम का गठन किया जाएगा।

मुरादाबाद वन मंडल की बिजनौर डिविजन में स्थित वाइल्ड लाइफ में खरगोश, हिरन के लिए नेपियर, गिन्न्नी, और दीनानाथ घास झांसी से लाकर लगाई जाएगी। गुलदार और तेंदुए को तलाश करने के लिए अभियान में वन या घने खेतों में मिल नहीं पाता है तो उसे तलाशने के लिए ड्रोन कैमरे से उसकी तलाश की जाएगी। - विजय सिंह वन संरक्षक मुरादाबाद मंडल

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