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बिके नहीं तो अब 500 ईडब्ल्यूएस मकानों को पीएम आवास रूप में खपाने की तैयारी में एमडीए
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मुरादाबाद विकास प्राधिकरण लंबे समय से नहीं बिक रहे करीब 500 ईडब्ल्यूएस के अपने मकानों को पीएम आवास योजना लाभार्थियों की देने की तैयारी कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि एमडीए वीसी ने यह प्रस्ताव तैयार करने के बाद इस पर कमिश्नर से चर्चा भी कर ली है। अब इस प्रस्ताव को बोर्ड की बैठक में रखने की तैयारी है।
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के शहर में मंडी समिति के पीछे तथा नया मुरादाबाद में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 700 से अधिक मकान बनाए थे। बीते दस सालों में इनमें से करीब 200 मकान ही एमडीए बेच सका है। करीब 500 आवास खाली पड़े हैं। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के यह प्रत्येक आवास को एमडीए पहले आओ पहले पाओ योजना के तहत सात लाख रुपये में बेचने का भी प्रयास काफी समय से कर रहा है। लेकिन इसमें भी उसे बेहतर रिसपांस नहीं मिल पा रहा है। एमडीए ने पिछले दिनों इसे प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले लोगों को भी किराए पर देने का बोर्ड में प्रस्ताव पास कराया था, लेकिन उसमें भी कोई खास सफलता नहीं मिल सकी है। इसके चलते एमडीए की करीब 35 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं।
सूत्र बताते हैं कि एमडीए इस धनराशि को भी निकालने के लिए इन्हें प्रधानमंत्री गरीब शहरी आवास योजना के तहत चयन किए जाने वाले लाभार्थियों को देने की योजना बना रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि एमडीए ने बाकायदा इसके लिए एक योजना तैयार की है। जिसके मुताबिक पीएम आवास योजना के तहत सरकार से जो धनराशि लाभार्थी को मिलती है, वह सीधे एमडीए ले लेगा और उससे ऊपर की जो धनराशि खर्च होगी उसे वह लाभार्थियों से आसान किस्तों अथवा एक मुश्त ले सकता है। सूत्र बताते हैं कि इस संबंध में वीसी मदसूदन हुल्गी की कमिश्नर/एमडीए चेयरमैन आंजनेय कुमार सिंह से इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा भी हो चुकी और उन्होंने सहमति भी जता दी है। यह प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में ही तय हो सकता है, लिहाजा विधान परिषद चुनाव को लेकर जारी आचार संहिता के खत्म होने के बाद बोर्ड की होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जा सकता है।
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मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के शहर में मंडी समिति के पीछे तथा नया मुरादाबाद में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 700 से अधिक मकान बनाए थे। बीते दस सालों में इनमें से करीब 200 मकान ही एमडीए बेच सका है। करीब 500 आवास खाली पड़े हैं। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के यह प्रत्येक आवास को एमडीए पहले आओ पहले पाओ योजना के तहत सात लाख रुपये में बेचने का भी प्रयास काफी समय से कर रहा है। लेकिन इसमें भी उसे बेहतर रिसपांस नहीं मिल पा रहा है। एमडीए ने पिछले दिनों इसे प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले लोगों को भी किराए पर देने का बोर्ड में प्रस्ताव पास कराया था, लेकिन उसमें भी कोई खास सफलता नहीं मिल सकी है। इसके चलते एमडीए की करीब 35 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं।
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सूत्र बताते हैं कि एमडीए इस धनराशि को भी निकालने के लिए इन्हें प्रधानमंत्री गरीब शहरी आवास योजना के तहत चयन किए जाने वाले लाभार्थियों को देने की योजना बना रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि एमडीए ने बाकायदा इसके लिए एक योजना तैयार की है। जिसके मुताबिक पीएम आवास योजना के तहत सरकार से जो धनराशि लाभार्थी को मिलती है, वह सीधे एमडीए ले लेगा और उससे ऊपर की जो धनराशि खर्च होगी उसे वह लाभार्थियों से आसान किस्तों अथवा एक मुश्त ले सकता है। सूत्र बताते हैं कि इस संबंध में वीसी मदसूदन हुल्गी की कमिश्नर/एमडीए चेयरमैन आंजनेय कुमार सिंह से इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा भी हो चुकी और उन्होंने सहमति भी जता दी है। यह प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में ही तय हो सकता है, लिहाजा विधान परिषद चुनाव को लेकर जारी आचार संहिता के खत्म होने के बाद बोर्ड की होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जा सकता है।
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