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होलिका दहन
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मुरादाबाद। पीतल नगरी इस बार पर्यावरण संरक्षण के लिए अनूठी मिशाल पेश करने जा रही है। शहर में इस बार 200 स्थानों पर गो काष्ठ से होलिका दहन की तैयारी की जा रही है। दिविज्ञा केयर वेलनेस फाउंडेशन की इस पहल को जिला प्रशासन का साथ मिला है। जिलाधिकारी ने बताया कि नगर निगम के अधिकारियों के साथ इस दिशा में कार्य करने के लिए मंथन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने शहरवासियों से भी उपले और गो-काष्ठ से होलिका दहन करने का आह्वान किया है।
दिविज्ञा केयर वेलनेस फाउंडेशन की गौरी जैन ने बताया कि उनका उद्देश्य होली के दहन के लिए पेड़ों के कटान को रोकना है। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्तियां और दीपावली पर दीये, लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां गाय के गोबर से बनाई थीं। अयोध्या में एक लाख दीये भेजे भी गए थे। इसके बाद से ही होली के लिए गो-काष्ठ बनाने का कार्य शुरू हो गया था। शहर के 200 स्थानों में मानपुर, बुध बाजार, स्टेशन रोड, बुद्धि विहार, प्रभात मार्केट, सिविल लाइंस, मंडी चौक, दीनदयाल नगर, महाकालेश्वर धाम भी प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इस पहल में शहर के पराग हृयूमन फाउंडेशन, कार्तिकेय संस्था, आप सब की रसोई, छू ले आसमां, गोपाल गोशाला, दिव्यलोक आश्रम, कृष्णा गोशला (ब्रजघाट) का सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि अब तक उनके पास 200 बुकिंग आ चुकी हैं। उन्होंने चार-चार क्विंटल के पैकेट बनाए हैं। इस गो-काष्ठ में हवन-सामग्री, नीम और कपूर भी मिलाया गया है। उन्होंने कहा कि वैसे तो गो-काष्ठ की कीमत दस से 15 रुपये किलो है। चूंकि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह शुरुआत है। इसलिए लोग जो गोशाला को सहयोग राशि देना चाहेंगे, उनको ही देंगे। उन्होंने बताया कि शहर में 50 से ज्यादा स्थानों पर लकड़ी तैयार की जा रही है।
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दिविज्ञा केयर वेलनेस फाउंडेशन की गौरी जैन ने बताया कि उनका उद्देश्य होली के दहन के लिए पेड़ों के कटान को रोकना है। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्तियां और दीपावली पर दीये, लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां गाय के गोबर से बनाई थीं। अयोध्या में एक लाख दीये भेजे भी गए थे। इसके बाद से ही होली के लिए गो-काष्ठ बनाने का कार्य शुरू हो गया था। शहर के 200 स्थानों में मानपुर, बुध बाजार, स्टेशन रोड, बुद्धि विहार, प्रभात मार्केट, सिविल लाइंस, मंडी चौक, दीनदयाल नगर, महाकालेश्वर धाम भी प्रमुख रूप से शामिल हैं।
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इस पहल में शहर के पराग हृयूमन फाउंडेशन, कार्तिकेय संस्था, आप सब की रसोई, छू ले आसमां, गोपाल गोशाला, दिव्यलोक आश्रम, कृष्णा गोशला (ब्रजघाट) का सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि अब तक उनके पास 200 बुकिंग आ चुकी हैं। उन्होंने चार-चार क्विंटल के पैकेट बनाए हैं। इस गो-काष्ठ में हवन-सामग्री, नीम और कपूर भी मिलाया गया है। उन्होंने कहा कि वैसे तो गो-काष्ठ की कीमत दस से 15 रुपये किलो है। चूंकि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह शुरुआत है। इसलिए लोग जो गोशाला को सहयोग राशि देना चाहेंगे, उनको ही देंगे। उन्होंने बताया कि शहर में 50 से ज्यादा स्थानों पर लकड़ी तैयार की जा रही है।
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