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आजम खां की बढ़ती उम्र का हवाला देकर मांगी जमानत, सुनवाई की तारीख दी
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मुरादाबाद। छजलैट के बारह साल पुराने हाईवे जाम और बवाल मामले में आरोपी रामपुर के सांसद आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जमानत याचिका पर शुक्रवार को एमपी/एमएलए स्पेशल न्यायाधीश की अदालत में बहस चली। इसमें आजम खां के अधिवक्ता ने उनकी 71 वर्ष की उम्र और बीमारी का हवाला देकर जमानत की मांग की। जिसका अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने विरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोबारा सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।
29 जनवरी 2008 को छजलैट थाने के सामने रामपुर के तत्कालीन विधायक आजम खां की गाड़ी को पुलिस ने रुकवा कर चेक किया था। उस वक्त आजम खां परिवार के साथ मुजफ्फरनगर एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। गाड़ी चेक करने के विरोध में आजम खां थाने के सामने ही सड़क पर बैठ गए थे। इसकी जानकारी मिलने पर आस पड़ोस के जनपदों से भी सपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता आ गए थे। इसके बाद हाईवे जाम कर हंगामा किया था। इस मामले में पुलिस की ओर से आजम खां, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम, डीपी यादव, राज कुमार प्रजापति, विधायक हाजी इकराम कुरैशी, अमरोहा के विधायक महबूब अली, नूरपुर विधायक नईम उल हसन, नगीना विधायक मनोज पारस के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। पुलिस इस मामले में तफ्तीश पूरी करने के बाद आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इस मामले की सुनवाई एमपी/एमएलए स्पेशल न्यायाधीश एडीजे-2 पुनीत गुप्ता की अदालत में चल रही है।
आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की फाइल अन्य आरोपियों से अलग कर दी गई है। आजम खां के अधिवक्ता शाहनवाज की ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई थी। जिस पर शुक्रवार को सुनवाई चली। आजम खां के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि आजम खां की उम्र 71 वर्ष से अधिक है और वह बीमार हैं। उन्हें जमानत दी जाए। जबकि सरकार की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता मुनीष भटनागर ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम एक साल तक कोर्ट में पेश नहीं हुए। उन्होंने अदालत के आदेश अवहेलना की थी। जमानत देने से केस की सुनवाई बाधित हो सकती है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत याचिका पर दोबारा सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।
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29 जनवरी 2008 को छजलैट थाने के सामने रामपुर के तत्कालीन विधायक आजम खां की गाड़ी को पुलिस ने रुकवा कर चेक किया था। उस वक्त आजम खां परिवार के साथ मुजफ्फरनगर एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। गाड़ी चेक करने के विरोध में आजम खां थाने के सामने ही सड़क पर बैठ गए थे। इसकी जानकारी मिलने पर आस पड़ोस के जनपदों से भी सपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता आ गए थे। इसके बाद हाईवे जाम कर हंगामा किया था। इस मामले में पुलिस की ओर से आजम खां, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम, डीपी यादव, राज कुमार प्रजापति, विधायक हाजी इकराम कुरैशी, अमरोहा के विधायक महबूब अली, नूरपुर विधायक नईम उल हसन, नगीना विधायक मनोज पारस के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। पुलिस इस मामले में तफ्तीश पूरी करने के बाद आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इस मामले की सुनवाई एमपी/एमएलए स्पेशल न्यायाधीश एडीजे-2 पुनीत गुप्ता की अदालत में चल रही है।
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आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की फाइल अन्य आरोपियों से अलग कर दी गई है। आजम खां के अधिवक्ता शाहनवाज की ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई थी। जिस पर शुक्रवार को सुनवाई चली। आजम खां के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि आजम खां की उम्र 71 वर्ष से अधिक है और वह बीमार हैं। उन्हें जमानत दी जाए। जबकि सरकार की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता मुनीष भटनागर ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम एक साल तक कोर्ट में पेश नहीं हुए। उन्होंने अदालत के आदेश अवहेलना की थी। जमानत देने से केस की सुनवाई बाधित हो सकती है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत याचिका पर दोबारा सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।
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